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डाक्टर और बाबू से सैंटिंग कर बनवा लिया दिव्यांग प्रमाणपत्र

Wed, 22 Jan 2020 12:13 AM IST
Agra Bureau आगरा ब्यूरो
Updated Wed, 22 Jan 2020 12:13 AM IST
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मथुरा। सीएमओ दफ्तर में मन मुताबिक दिव्यांग प्रमाणपत्र न बनने के बाद युवक ने मंगलवार को तहसील दिवस में पुन: दिव्यांग प्रमाणपत्र जारी करा लिया। मामला पकड़ में आने के बाद सीएमओ ने जांच बैठा दी है। मामले में जिला अस्पताल में कार्यरत डॉक्टर और बाबू जांच के घेरे में आ गए हैं। वहीं तहसील दिवस में निर्गत किए गए दिव्यांग प्रमाणपत्र को निरस्त कर दिया गया है।
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छाता के गांव नौगांव धर्मवीर ने आखों में कमी के चलते सोमवार को सीएमओ कार्यालय में अस्थाई दिव्यांग प्रमाणपत्र बनवा लिया। यहां विकलांग बोर्ड ने धर्मवीर को दिव्यांग प्रमाणपत्र 40 प्रतिशत बनाया गया। धर्मवीर ने मंगलवार को तहसील दिवस में विकलांग बोर्ड में मौजूद जिला अस्पताल में कार्यरत डॉ. लाल सिंह से संपर्क किया और दूसरा दिव्यांग प्रमाणपत्र निर्गत करा लिया।
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डॉ. लाल सिंह ने तहसील दिवस में मौजूद सीएमओ डॉ. शेर सिंह के हस्ताक्षर भी करा लिए गए। तहसील दिवस की समाप्ति के बाद सीएमओ के संज्ञान में मामला आ गया। सीएमओ ने सोमवार को विकलांग बोर्ड में मौजूद डॉ. मुनीष पौरुष एवं डॉ. प्रभाकर से इस बारे में पूछताछ की। डॉक्टरों ने सीएमओ को बताया कि प्रमाणपत्र 40 प्रतिशत का बना था। वहीं मंगलवार को जारी करवाया गया स्थाई प्रमाणपत्र 42 प्रतिशत का बनाया गया।
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सीएमओ ने मामले को गंभीरता से लेते हुए डॉ. लाल सिंह एवं संबंधित बाबू के खिलाफ जांच के आदेश दिए हैं। वहीं तहसील दिवस में निर्गत किए गए दिव्यांग प्रमाणपत्र को निरस्त कर दिया गया है।

हड्डी के डॉक्टर ने आंखों की जांच कैसे कर ली
मथुरा। मथुरा के सीएमओ कार्यालय में विकलांगों का दिव्यांग प्रमाणपत्र बनाने के नाम पर खुलेआम रुपये की मांग की जाती रही है। बिना रुपये दिए डॉक्टर दिव्यांगों के प्रमाणपत्र नहीं बनाते। मंगलवार को भी ऐसा ही मामला पकड़ में आ ही गया। बताया जाता है कि सीएमओ को उस समय मामले में उस वक्त शक हुआ जब हड्डी के डॉक्टर ने आंखों की कमी का दिव्यांग प्रमाणपत्र बना डाला।
दिव्यांग प्रमाणपत्र बनाने वाले डॉक्टर और बाबू पर जांच बैठा दी गई है। जांच के बाद दोषी के खिलाफ विभागीय कार्रवाई की जाएगी।
- डॉ. शेर सिंह, सीएमओ मथुरा।
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