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श्रीकृष्ण जन्मस्थान-ईदगाह मामला: ईदगाह की दीवार में उभर आए हैं खंडित अवशेष, मरम्मत में छिपा दिए जाते थे

Sun, 01 Jan 2023 12:14 AM IST
भूपेन्द्र सिंह संवाद न्यूज एजेंसी, मथुरा
संवाद न्यूज एजेंसी, मथुरा Published by: भूपेन्द्र सिंह Updated Sun, 01 Jan 2023 12:14 AM IST
सार

ईदगाह की दक्षिण की तरफ की दीवार इतिहास के राज उगलती रही है। इस दीवार में पुरातत्व महत्व के अवशेष बाहर की तरफ उभरे हुए हैं, जो ईदगाह के स्थान पर मंदिर होने का साक्ष्य बन सकते हैं। सैकड़ों फुट ऊंची यह दीवार ही ईदगाह को श्री कृष्ण जन्मस्थान के भव्य मंदिर से अलग करती है। 
 

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Fragmented remains have emerged in wall between temple and Idgah in Sri Krishna birth place at mathura
Shri Krishna Janmabhoomi - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

दरअसल, वर्ष 1968 में समझौता हुआ था। इसी समय इस दीवार का निर्माण कराया गया, जो श्री कृष्ण जन्मस्थान पर मौजूद भागवत भवन के उत्तर तथा ईदगाह के दक्षिण का हिस्सा है। काफी ऊंची दीवार की आगे की ओर ईदगाह का हिस्सा है। दीवार पर ईंटों को लगाया गया है। बीच-बीच में यह ईंटें बाहर निकल गई हैं। इनके स्थान पर कुछ पुरातत्व महत्व के अवशेष उभर आए हैं। यह अवशेष किसी मंदिर के हिस्से हो सकते हैं। समय-समय पर इस दीवार की मरम्मत की जाती रही है। मरम्मत के बाद यह अवशेष दीवार के अंदर छिप जाते हैं। 

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निकलते हैं मंदिर के अवशेष 

यह बात तो पहले से ही पुष्ट है कि इस स्थान पर जब-जब खुदाई हुई मंदिरों के टूटे हुए हिस्से निकले हैं। यदि दीवार से भी कोई अवशेष निकल रहा है तो वह कोई नई बात नहीं हैं। श्री कृष्ण जन्मस्थान पर जब पुलिस कंट्रोल रूम तैयार कराया जा रहा था, तब भी काफी अवशेष निकले थे। -कपिल शर्मा, सचिव श्री कृष्ण जन्मस्थान सेवा संस्थान

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आक्रांताओं ने तोड़े हैं मंदिर

कई दफा आक्रांताओं ने श्रीकृष्ण जन्म स्थान के मंदिर तोड़े हैं। वर्ष 1017 ईसवी में महमूद गजनबी ने सम्राट चन्द्रगुप्त द्वारा निर्मित मंदिर को तोड़ा। वर्ष 1150 ईसवी में मगोर्रा के सामंत शासक जाजन उर्फ जज्ज सिंह द्वारा निर्मित मंदिर को सिकंदर लोदी ने 16 वीं सदी में क्षतिग्रस्त कर दिया। वर्ष 1618 ईसवी में ओरछा के बुंदेला राजा वीर सिंह जुदेव ने मंदिर का निर्माण कराया जिसे वर्ष 1669 ईसवी में मुगल शासक औरंगजेब ने क्षतिग्रस्त कर दिया।

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बंद कमरे में हुई ईदगाह कमेटी की गोपनीय बैठक

श्री कृष्ण जन्मस्थान-ईदगाह प्रकरण पर अध्यक्ष डॉ. जहीर हसन द्वारा दिया गया अदालत के बाहर मामले को मिल बैठकर सुलझाने संबंधी बयान के बाद ईदगाह कमेटी की पहली बैठक आयोजित की गई। कमेटी द्वारा मुद्दे पर बोलने का समस्त अधिकार सचिव तनवीर अहमद को दिया गया। कमेटी के निर्णय के साथ ही अध्यक्ष द्वारा की जा रही पैरवी पर विराम लग गया है। इस संबंध में अध्यक्ष डॉ. जहीर हसन ने बताया कि जो जानकारी देंगे सचिव ही देंगे।

शनिवार सुबह से ही ईदगाह कमेटी की बैठक होने की चर्चा जोर पकड़ने लगी। अपराह्न पश्चात तीन बजे ईदगाह कमेटी के कुछ सदस्य डॉ. जहीर हसन के चंदनवन स्थित आवास पर पहुंचे। यहां पर बंद कमरे में ईदगाह कमेटी की बैठक आयोजित की गई। बैठक में सदस्यों द्वारा श्री कृष्ण जन्मस्थान संबंधी मामले पर विचार-विमर्श किया तथा अदालत में चल रही कार्रवाई को अमल में लाने का निर्णय लिया गया। 

बैठक में यह भी निर्णय लिया गया कि आगे से ईदगाह प्रकरण पर जो भी वक्तव्य दिया जाएगा, वह सचिव ईदगाह द्वारा ही दिया जाएगा। एडवोकेट तनवीर अहमद के अनुसार यह कमेटी की मासिक बैठक थी। वहीं इस मामले में महेंद्र प्रताप सिंह का कहना है कि हमें अच्छी तरह से पता था कि ईदगाह कमेटी के अध्यक्ष द्वारा अदालत के बाहर के रास्ता अपनाने संबंधी बयान भ्रामक था। अयोध्या प्रकरण में भी यही हाल हुआ था।

ईदगाह की जिन दीवारों पर साक्ष्य दिख रहे हैं उनका सर्वे होना चाहिए। उन्हें साक्ष्य के तौर पर पेश किया जाना चाहिए। हमने इस प्रकार की मांग अदालत से की है। -शैलेष दुबे, अधिवक्ता, वादी विष्णु गुप्ता

हमने अदालत में प्रार्थना पत्र दिया है कि ईदगाह की दीवारों पर जो साक्ष्य हैं उनको नष्ट होने से बचाया जाए ताकि वह आगे चलकर अदालत में साक्ष्य बन सकें। -दिनेश शर्मा, कोषाध्यक्ष अखिल भारत हिंदू महासभा

हमने अपने वाद में मंदिरों के टूटने संबंधी जानकारी दी है। उसमें बताया है कि किस प्रकार से आक्रांताओं ने मंदिर तोडे़ और उनके अवशेष आज भी मौजूद हैं। -मनीष यादव, वादी
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