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Mathura News: भक्त चरणामृत समझकर पी रहे सफाई और भोग के बर्तन धोने का जल

Amar Ujala Bureau अमर उजाला ब्यूरो
Updated Tue, 05 Nov 2024 01:27 AM IST
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Devotees are drinking water for cleaning and washing utensils as Charanamrit (charanamrit)
वृंदावन। ठाकुर श्रीबांकेबिहारी मंदिर का एक वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो रहा है। इसमें बिहारीजी के भक्त मंदिर के गर्भगृह से निकलने वाले जल को चरणामृत समझकर पी रहे हैं, जबकि यह जल भोग, बर्तन और सफाई का बताया जा रहा है।
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सोशल मीडिया पर वायरल हो रहे वीडियो में कुछ लोग बांकेबिहारी मंदिर की परिक्रमा में गर्भगृह के पीछे पत्थर के बने दो हाथियों के मुंह से आ रहे पानी को माथे पर लगा रहे हैं। कुछ लोग ग्लास में लेकर चरणामृत की तरह उसे पी रहे हैं। जानकारी करने पर पता चला कि यह जो पत्थर के हाथी के मुंह बने हैं यह तभी से हैं जब से मंदिर बना। इनमें से भगवान के गर्भगृह की सफाई का और भोग के बर्तन धोने का जल आता है।
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वायरल हो रहे वीडियो के बारे में मंदिर के सेवाधिकारी श्रीनाथ गोस्वामी ने बताया कि गोस्वामियों ने कभी किसी से नहीं कहा की वह जल चरणामृत है। उन्होंने बताया कि मंदिर के गर्भगृह की साफ-सफाई का वह जल आता है जिसे श्रद्धालु और मंदिर के गोस्वामी भी श्रद्धाभाव से अपने शरीर पर छिड़कते हैं।
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मंदिर के सेवाधिकारी ने बताया कि भगवान का चरणामृत तो अमृत समान है। उसे इस तरह से बहाकर पैरों में नहीं डाला जा सकता। चरणामृत को शुद्ध पात्र में रखते हैं और फिर उसे श्रद्धालुओं को दिया जाता है। वहीं एक और सेवायत मनोज गोस्वामी ने दावा किया कि जो सोशल मीडिया पर कहा जा रहा है वह बिल्कुल गलत है। जहां भगवान का प्रसाद बनाया जाता है वहां देखा तो मंदिर के कर्मचारी भोग के बर्तन साफ करते हुए नजर आए। इसी रसोई से गर्भगृह में जाने का रास्ता है लेकिन वहां सेवायतों के अलावा किसी को जाने की अनुमति नहीं है।

श्रीबांके बिहारीजी के गर्भगृह से निकलने वाले जल को लेने के लिए श्रद्धालु आतुर नजर आ रहे थे। दिल्ली के एक भक्त ने कहा कि यह जल जो भी हो गर्भगृह से ही रहा है, जहां भगवान विराजमान हैं। मंदिर के एक सेवायत ने नाम न बताते हुए बताया कि गर्भगृह में जब लाइट ही नहीं है तो एसी का सवाल कहां से उठ गया।
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