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.. तो दूसरा निठारी बन जाता परखम

Thu, 30 Jul 2015 12:09 AM IST
परखम से लौटकर चंद्रमोहन शर्मा
परखम से लौटकर चंद्रमोहन शर्मा Updated Thu, 30 Jul 2015 12:09 AM IST
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mob have killed the accused of gangrape in mathura
निठारी के नरपिशाच को तो जानते ही होंगे आप। इंसान की शक्ल में वो हैवान जो मासूम बच्चियों को हवस का शिकार बनाता और फिर बड़ी बेरहमी से मौत के घाट उतारकर लाश नाले में फेंक देता। दरिंदगी की वही दास्तान दोहराई जा रही थी परखम में। यहां पुलिसिया लापरवाही की भी वैसी ही शर्मनाक पराकाष्ठा सामने आई है, जैसी निठारी में रही। बच्ची लापता होती, पुलिस हाथ पर हाथ धरे बैठी रहती और फिर उसकी लाश मिल जाती। दरिंदे खुले घूमते रहते और पुलिस बगैर जांच-पड़ताल के बेकुसूरों को जेल भेजती रहती। खून के घूंट पीते जा रहे गांव वालों को पुलिस के इसी लापरवाह रवैये ने मजबूर किया कानून हाथ में लेने के लिए।
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इंटर कॉलेज से सटे कंटीली झाड़ियों से ढके जिस गड्ढे में मंगलवार सुबह 12 साल की बिटिया की लाश मिली, ठीक  इसी जगह 23 दिसंबर, 2011 को भी एक बच्ची की इसी तरह से रेप के बाद बेरहमी से हत्या की गई थी। वह बिटिया भी रेल लाइन पार की ठाकुर बस्ती की थी। रेल लाइन के एक तरफ राजपूत रहते हैं। दूसरी ओर वाल्मीकि समाज की बस्ती है।
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तब एफआईआर रंजिश के आधार पर दर्ज कराई गई। पुलिस ने जांच-पड़ताल किए बगैर नामजद आरोपी गिरफ्तार कर लिए। असली गुनहगार खुले घूमते रहे। नतीजा। इसके दो साल बाद झाड़ियों से थोड़ी दूर एक और बच्ची की रेप के बाद हत्या कर दी गई। अगर पहली घटना की जांच ठीक से होती, तो दूसरी बच्ची हैवानियत का शिकार होने से बच जाती। लेकिन पुलिस अभी भी नहीं सुधरी। नतीजा। तीसरी वारदात। बेशक इस बार गांव वालों ने कानून हाथ में लेकर सही नहीं किया, लेकिन उन्हें खून से हाथ रंगने पर मजबूर पुलिस ने ही किया।
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एक के बाद एक  वहशियाना वारदातों ने गांव का खून खौला दिया था। बच्ची की लाश देखते ही नसें फड़फड़ाने लगीं, और फिर पुलिस के सामने ही एक आरोपी का काम तमाम कर दिया। दूसरे को मरा समझकर छोड़ दिया। यह घटना बताती है कि गांव का पुलिस से भरोसा उठ चुका था। अब और लापरवाही बर्दाश्त नहीं हो रही थी। उन्हें लगता है कि पुलिस सोती रहती, और बच्चियां एक -एक कर मारी जाती रहतीं।

अभी रात हो रही है, सुबह को आएंगे
पुलिस चौकी परखम में ही है। गांव वाले सोमवार की रात ही यहां पहुंच गए थे। बताया था, बच्ची लापता हो गई है। दो पुलिसवाले राजपूत बस्ती पहुंचे। लेकिन यह कहकर लौट गए कि अभी रात हो रही है, अंधेरे में कहां ढूंढें, सुबह को आएंगे। फोन फरह थाने पर भी किया था, लेकिन वहां से इंस्पेक्टर क्या सिपाही तक नहीं आया। तब भी नहीं, जब अगली सुबह बच्ची की लाश मिल गई।


अफसरों ने नहीं दिखाई गंभीरता
मंगलवार सुबह बच्ची की लाश मिल जाने केबाद भी मथुरा जिला मुख्यालय से पुलिस प्रशासन का कोई जिम्मेदार अधिकारी परखम नहीं पहुंचा। गांव वालों ने पुलिस के सामने आरोपियों से पूछताछ की, तब भी कोई अधिकारी नहीं पहुंचा। घंटों तक  जंगलराज रहा। जब चौकी से खींचकर एक आरोपी को पीट-पीटकर मार दिया गया, तब अफसरों में हड़कंप मचा।
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