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Mathura News: लावारिस कुत्तों और बंदरों को पकड़ने के दावे बेकार

Amar Ujala Bureau अमर उजाला ब्यूरो
Updated Sat, 30 Aug 2025 12:49 AM IST
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Claims of catching stray dogs and monkeys are useless
मथुरा। नगर निगम प्रशासन लावारिस कुत्तों और बंदरों के आतंक पर अंकुश लगाने में पूरी तरह विफल हो रहा है। लोग लावारिस कुत्तों के आतंक से परेशान हैं। वहीं बंदर भी आए दिन लोगों पर हमला करके घायल कर रहे हैं। जिला अस्पताल के आंकड़े लावारिस कुत्तों और बंदरों के इस आतंक की गवाही दे रहे हैं।
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आंकड़ों के अनुसार, बीते सात माह में 13 हजार से अधिक लोग लावारिस कुत्तों या फिर खूंखार बंदरों के हमले के शिकार हो चुके हैं। इसमें 8111 पुरुष और 5408 महिलाएं शामिल हैं। हमले का शिकार होने के बाद इन लोगों ने जिला अस्पताल में उपचार कराया है। इधर, सड़कों पर कुत्ते झुंड में बैठे रहते हैं। नगर निगम की टीम लगातार लावारिस कुत्तों को पकड़ने का अभियान चला रहा है। इसके बाद भी शहर में जगह-जगह कुत्तों का झुंड बैठा मिल जाएगा।
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मथुरा-वृंदावन के धार्मिक स्थलों पर बंदरों का भी ऐसा ही आतंक है। दूर-दराज से आने वाले श्रद्धालुओं को बंदर लगातार घायल कर रहे हैं। इसके बाद भी निगम पुख्ता इंतजाम करने में विफल साबित हो रहा है। एबीसी सेंटर के डॉ. कृष्णा का कहना है कि लावारिस कुत्तों को पकड़ने का लगातार अभियान चलाया जा रहा है। इस दौरान टीम को कई चुनौतियों का सामना करना पड़ रहा है। कहीं लोग विरोध करने लगते हैं तो कहीं कोई पालतू कुत्ता बता देता है। ऐसे में निराशा ही हाथ लगती है।
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ग्रामीणों ने नहीं पकड़ने दिए बच्ची पर हमला करने वाले कुत्ते
तेहरा गांव में बच्ची पर हमला करने के बाद कुत्तों को पकड़ने गई टीम को खाली हाथ लौटना पड़ा। ग्रमीणों ने हमला करने वाले कुत्तों का पता बताने से इंकार कर दिया और विरोध करने लगे। एबीसी सेंटर के डॉ. कृष्णा ने बताया कि बृहस्पतिवार को गांव तेहरा में सात वर्षीय बच्ची पर दो कुत्तों ने हमला कर दिया था। घटना के बाद कुछ लोगों ने एबीसी सेंटर में शिकायत की। इसके बाद नगर निगम की टीम बृहस्पतिवार देर रात कुत्तों को पकड़ने के लिए गांव पहुंची। टीम ने ग्रामीणों से हमलावर कुत्तों के बारे में पूछा, लेकिन किसी ने कोई जानकारी नहीं दी। थोड़ी देर बाद कुछ ग्रामीण एकजुट हो गए और कुत्तों को पकड़ने का विरोध करने लगे। ग्रामीणों ने कहा कि ये पालतू कुत्ते हैं। शुक्रवार को भी नगर निगम की टीम को विरोध झेलना पड़ा और गांव से खाली हाथ लौटना पड़ा।
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