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Janmashtami 2024: 26 या 27 अगस्त, कब है जन्माष्टमी? नंदगांव में इस दिन जन्मेंगे कन्हैया
Tue, 20 Aug 2024 09:34 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, मथुरा
संवाद न्यूज एजेंसी, मथुरा
Published by: अमर उजाला ब्यूरो
Updated Tue, 20 Aug 2024 09:34 AM IST
सार
भाद्रपद माह के कृष्ण पक्ष की अष्टमी तिथि को श्रीकृष्ण जन्माष्टमी का पर्व मनाया जाता है। इस वर्ष 26 अगस्त 2024 को श्री कृष्ण जन्माष्टमी मनाया जाएगा, लेकिन भगवान श्रीकृष्ण की क्रीडा स्थली नंदगांव में कान्हा 27 अगस्त को जन्म लेंगे।
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श्रीकृष्ण जन्माष्टमी
- फोटो : अमर उजाला
विस्तार
भगवान श्रीकृष्ण की क्रीडा स्थली नंदगांव में बालकृष्ण 27 अगस्त को जन्म लेंगे। ब्रज के तमाम मंदिरों में कन्हैया 26 अगस्त को जन्म लेंगे, लेकिन नंदगांव में वह 27 अगस्त को जन्मेंगे। इस विविधता का कारण खुर गिनती है। नंदगांव में श्रीकृष्ण जन्माष्टमी समेत अन्य त्योहार खुर गिनती रीति से मनाए जाते हैं। जिसके चलते कई बार नंदभवन में जन्माष्टमी सबसे अलग तारीख को हो जाती है और अन्य स्थानों से मेल नहीं खाती।
नंदगांव में प्रचलित रीति के अनुसार रक्षा बंधन से ठीक आठ दिन बाद ही जन्माष्टमी मनाई जाती है। इस दौरान यदि कोई तिथि घटमी या बढ़ती है तो नंदगांव में जन्माटष्मी की तिथि बदल जाती है। अन्य कई त्यौहार भी खुर गिनती रीति से ही निर्धारित किए जाते हैं। जन्मोत्सव के अगले दिन नवमी को नंदगांव में श्री कृष्ण का जन्मोत्सव धूमधाम से मनाया जाता है।
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नंदगांव में प्रचलित रीति के अनुसार रक्षा बंधन से ठीक आठ दिन बाद ही जन्माष्टमी मनाई जाती है। इस दौरान यदि कोई तिथि घटमी या बढ़ती है तो नंदगांव में जन्माटष्मी की तिथि बदल जाती है। अन्य कई त्यौहार भी खुर गिनती रीति से ही निर्धारित किए जाते हैं। जन्मोत्सव के अगले दिन नवमी को नंदगांव में श्री कृष्ण का जन्मोत्सव धूमधाम से मनाया जाता है।
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जन्मोत्सव के अवसर पर विशाल दंगल का आयोजन भी होता है जिसमें विभिन्न राज्यों के नामी पहलवान अपने मल्ल कौशल का प्रदर्शन करते हैं। इस दिन नंदगांव बरसाना के गोस्वामीजनों द्वारा संयुक्त समाज गायन, दधि कांधो, शंकरलीला, मल्ल युद्ध, बांस बधाई आदि का आयोजन नंदभवन में किया जाता है। अष्टमी वाले दिन रात्री में भजन संध्या के साथ साथ श्रीकृष्ण के कुल का बखान ढांडी ढांडन लीला के द्वारा किया जाता है। नंदबाबा मंदिर के सेवायत व पूर्व चेयरमैन ताराचंद गोस्वामी ने बताया कि नंदगांव में जन्माष्टमी 27 अगस्त को तथा 28 अगस्त को नंदोत्सव धूमधाम से मनाया जाएगा।
नौ वर्ष तक नंदगांव में रहे श्रीकृष्ण
मान्यता रही हैं कि मथुरा जेल में जन्म के बाद श्री कृष्ण को गोकुल ले जाया गया। कंस के भय के चलते नंदीश्वर पर्वत को सुरक्षित स्थान मान नंदबाबा सपरिवार नंदगांव आकर बस गए। यहां श्री कृष्ण करीब 9 तक रहे। मान्यता है कि कंस के भय के चलते नंदबाबा ने श्रीकृष्ण जन्मोत्सव भी नंदगांव में ही मनाया। इस दौरान विभिन्न देवी देवता भी अलग अलग रूपों में नंदगांव आए जिनका प्रमाण नंदबाबा मंदिर की समाज शृंखला एवं अन्य धार्मिक पुस्तकों में मिलता है।
मान्यता रही हैं कि मथुरा जेल में जन्म के बाद श्री कृष्ण को गोकुल ले जाया गया। कंस के भय के चलते नंदीश्वर पर्वत को सुरक्षित स्थान मान नंदबाबा सपरिवार नंदगांव आकर बस गए। यहां श्री कृष्ण करीब 9 तक रहे। मान्यता है कि कंस के भय के चलते नंदबाबा ने श्रीकृष्ण जन्मोत्सव भी नंदगांव में ही मनाया। इस दौरान विभिन्न देवी देवता भी अलग अलग रूपों में नंदगांव आए जिनका प्रमाण नंदबाबा मंदिर की समाज शृंखला एवं अन्य धार्मिक पुस्तकों में मिलता है।
महादेव को करनी पड़ी थी तपस्या
बालकृृष्ण के दर्शनों को कैलाश पर्वत से आए भोलेनाथ को नंदभवन में मैया यशोदा ने दर्शन नहीं कराए थे। इसके लिए उन्हें तपस्या करनी पडी। इसके लिए वे आसेश्वर नामक वन में तपस्या पर बैठे थे। तब जाकर कान्हा ने भोलेनाथ को दर्शन दिए थे। शनिदेव को भी बाल कृष्ण ने कोकिलावन नामक स्थान पर दर्शन दिए थे।
बालकृृष्ण के दर्शनों को कैलाश पर्वत से आए भोलेनाथ को नंदभवन में मैया यशोदा ने दर्शन नहीं कराए थे। इसके लिए उन्हें तपस्या करनी पडी। इसके लिए वे आसेश्वर नामक वन में तपस्या पर बैठे थे। तब जाकर कान्हा ने भोलेनाथ को दर्शन दिए थे। शनिदेव को भी बाल कृष्ण ने कोकिलावन नामक स्थान पर दर्शन दिए थे।