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मथुरा सुसाइड केस में नया खुलासा: तीनों सहेलियों ने लिखा था लेटर, 'बाबा ने बुलाया है; ढूंढने की कोशिश मत करना'

Wed, 29 May 2024 02:00 PM IST
अमर उजाला ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, मथुरा
संवाद न्यूज एजेंसी, मथुरा Published by: अमर उजाला ब्यूरो Updated Wed, 29 May 2024 02:00 PM IST
सार

मथुरा सुसाइड केस में नया खुलासा हुआ है। तीनों सहेलियों ने घर से निकलने से पहले पत्र लिखा था। इसमें लिखा कि 'बाबा ने बुलाया है; ढूंढने की कोशिश मत करना'। 

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revelation made in Mathura suicide case Girls written letter saying Baba called them should not try to find
मथुरा में रेल ट्रैक पर मिले थे तीन शव - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

उत्तर प्रदेश के मथुरा में सामूहिक आत्महत्या करने वाली तीन किशोरियों की मंगलवार को शिनाख्त हो गई। वह बिहार के मुजफ्फरपुर की रहने वाली थीं। घर से निकलने से पहले एक-एक पत्र छोड़कर आई थीं। इसमें उन्होंंने लिखा था कि बाबा ने बुलाया है। भक्ति के लिए हिमालय जा रहे हैं। किसी ने तलाश करने या वापस बुलाने की कोशिश भी की तो वह खुदकुशी कर लेंगी। तीन माह बाद 13 अगस्त को तीनों खुद वापस आ जाएंगी। फिलहाल पुलिस ने पुख्ता शिनाख्त के लिए तीनों शवों का डीएनए सैंपल संरक्षित किया है।
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घटना हाईवे थाना क्षेत्र में आगरा-दिल्ली रेलवे ट्रैक पर बाजना पुल के पास बीते शुक्रवार  को हुई थी। इंस्पेक्टर उमेश चंद त्रिपाठी ने बताया कि बिहार पुलिस के साथ एक किशोरी की मां, दूसरी का पिता और तीसरी का भाई मथुरा आया। कपड़े और बैग के आधार पर तीनों की शिनाख्त की। हालांकि शुरुआत में एक किशोरी की शिनाख्त में उसकी मां ने संदिग्धता जाहिर की, लेकिन बाद में कपड़े आदि की तस्दीक कर ली।
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मथुरा में रेल ट्रैक पर मिले थे तीन शव - फोटो : अमर उजाला
तीनों की पहचान मुजफ्फरपुर जिले के कंपनी बाग योगियामठ निवासी 14 वर्षीय गौरी कुमारी पुत्री अमित रजक, 13 वर्षीय माया कुमारी पुत्री राजेश रजक और बालू घाट, ब्रह्म स्थान सिकंदरपुर, मुजफ्फरपुर निवासी 14 वर्षीय माही उर्फ मोहिनी कुमारी पुत्री मनोज कुमार के रूप में हुई है। माया और गौरी का घर पास-पास है।

पुलिस ने किशोरियों के फोटो परिजनों को दिखाए तो माही और गौरी के परिजनों ने कहा ये उनके बच्चे हैं। इनमें से एक कक्षा आठ और दूसरी कक्षा नौ की छात्रा थी। एक का चेहरा और दूसरी के कपड़े मेल खा रहे थे। वहीं माही के शव को देखने के बाद परिजनों ने एकबारगी अपनी बेटी का शव होने से इनकार कर दिया। उन्होंने कहा कि शव उम्रदराज महिला का लग रहा है। हालांकि कपड़े मेल खा रहे थे। बाद में काफी तस्दीक के बाद उसकी भी शिनाख्त कर ली।
 

13 मई को घर से निकली थीं

माही के पिता मनोज कुमार, गौरी की मां आशा देवी और माया के भाई रिषु ने पुलिस को बताया कि तीनों 13 मई को अपने-अपने घर से मंदिर जाने के बहाने निकली थीं। इनमें से दो के पास मोबाइल था। एक का फोन मुजफ्फरपुर में ही बंद हो गया। दूसरी का फोन कानपुर में बंद हुआ था। तीनों छात्राओं ने घर में पत्र छोड़ा था। पत्र में लिखा था कि बाबा ने बुलाया है। भक्ति के लिए हिमालय जा रहे हैं। इसके बाद परिजनों ने 14 मई को पुलिस को तहरीर दी, जिस पर नौ दिन बाद एफआईआर दर्ज की गई।
 
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...तो क्या पुलिस को गुमराह करने के लिए आत्महत्या से पहले लिखा था पत्र

शवों की शिनाख्त के बावजूद यह प्रकरण पुलिस के लिए उलझन भरा हो गया है। पुलिस इस बात को लेकर परेशान है कि जो पत्र शव के पास आत्महत्या वाले दिन मिला था, उसमें पारिवारिक कलह, बच्चों का ख्याल रखने जैसी बातें थीं। इससे लग रहा था कि मां-बेटियों ने सुसाइड की है। पुलिस का मानना है कि किशोरियों ने पुलिस को गुमराह करने के लिए खुद ही वो पत्र लिखा होगा।

आत्महत्या का राज, मौत के साथ दफन

परिजनों से बातचीत के आधार पर पुलिस अब तक यह तय नहीं कर पाई है कि आखिर किशोरियों ने आत्महत्या क्यों की। परिजन भी इस पर खुलकर बोलने को तैयार नहीं हो रहे हैं। फिलहाल पुलिस हर पहलू पर जांच कर रही है। बिहार पुलिस यह जानने में जुटी है कि कहीं किशोरियों को कोई परेशान तो नहीं कर रहा था। किसी ने आत्महत्या के लिए दुष्प्रेरित तो नहीं किया था। किशोरियों के साथ कोई पुरुष तो मुजफ्फरपुर से साथ नहीं आया था।

पोस्टमार्टम हाउस के फ्रीजर में रखे होने के बाद गले शव

पुलिस ने तीनों शव शिनाख्त/पोस्टमार्टम होने तक पोस्टमार्टम हाउस के फ्रीजर में रखवाए थे, लेकिन भीषण गर्मी में फ्रीजर ठप हो गए। इस कारण शुक्रवार से लेकर मंगलवार यानी चार दिन में शव बुरी तरह गल गए। यह भी बड़ी वजह रही कि परिजन कपड़े व बैग तो पहचान रहे थे। मगर, शवों को देखने के बाद वह पहचान के संबंध में कभी हां तो कभी ना के बीच में फंसे रहे।
 

परिजनों की बातों ने पुलिस को उलझाया

माही के पिता मनोज कुमार ने घटनास्थल पर मिले बैग को पहचान लिया। मगर, पोस्टमार्टम हाउस पर जब उन्हें माही का शव दिखाया तो उन्होंने पहचानने से मना कर दिया। पुलिस ने शव की फोटो दिखाई तो उन्होंने माही का शव होने की संभावना जताई। माया के भाई रिषु ने अपनी बहन के शव को पहचान लिया। शव देखकर वह फूट-फूटकर रोने लगा।
 

आशा देवी ने तीसरे शव का फोटो देख उसकी पहचान अपनी बेटी गौरी के तौर पर की, लेकिन जब पोस्टमार्टम हाउस पहुंचकर फ्रीजर में रखे शव को देखा तो उसे पहचानने से मना कर दिया। पुलिस ने फिर उन्हें गौरी के हाथों पर लगी मेहंदी के फोटो दिखाए तो आशा देवी की आंखों में आंसू आ गए। कुछ देर बाद पुलिस ने शव की पहचान करने और उसे अपनी सुपुर्दगी में लेने की बात कही तो आशा देवी ने साफ मना कर दिया। हालांकि बाद में शव लेने को तैयार हो गई।
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