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Mathura: यमुना में बजी खतरे की घंटी, ताजेवाला से छोड़ा गया 3.09 लाख क्यूसेक पानी; बाढ़ से निपटने की तैयारी
Tue, 11 Jul 2023 09:58 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, मथुरा
संवाद न्यूज एजेंसी, मथुरा
Updated Tue, 11 Jul 2023 09:58 AM IST
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यमुना का जलस्तर
- फोटो : अमर उजाला
यमुना में खतरे की घंटी बजती नजर आ रही है। ताजेवाला से पिछले 24 घंटे के दौरान बड़ी मात्रा में पानी छोड़ा जा रहा है। यह मात्रा सोमवार सुबह छह बजे 3 लाख क्यूसेक के आंकड़े को पार कर गई है। मथुरा प्रयाग घाट पर यमुना का जल स्तर 164.06 मीटर के निशान को छू गया है। इसे देखते हुए गोकुल बैराज से भी आगरा के लिए अतिरिक्त पानी छोड़ना शुरू कर दिया गया है।
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रविवार शाम पांच बजे यमुना में ताजेवाला से 1.90 लाख क्यूसेक पानी छोड़ने का दौर शुरू हुआ था। रात 12 बजे यह मात्रा 2.51 लाख क्यूसेक पर पहुंच गई, जबकि सोमवार प्रात: 6 बजे तक तीन लाख क्यूसेक का आंकड़ा भी पार कर दिया। दोपहर दो बजे से एक बार फिर यह मात्रा 1.9 लाख क्यूसेक पर आ गई है। लगातार 24 घंटेे तक दो लाख से अधिक पानी ताजेवाला से छोड़ा जाना खतरे की घंटी माना जा रहा है।
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हालांकि जनपद में इस पानी को पहुंचने में अभी चार से पांच दिन का वक्त लगेगा। फिर भी गोकुल बैराज से आगरा के लिए अतिरिक्त पानी छोड़ना शुरू कर दिया है। सुबह छह बजे 10752 क्यूसेक पानी छोड़ा जा रहा था, जो दोपहर दो बजे 16 हजार से अधिक हुआ और शाम पांच बजे यह मात्रा 31466 क्यूसेक हो गई। फिर भी प्रशासन फिलहाल किसी प्रकार की चिंताजनक स्थिति नहीं मान रहा है।
बाढ़ आपदा प्रभारी अधिकारी/एडीएम वित्त योगानंद पांडेय ने बताया कि अभी कोई चिंता की बात नहीं है। ऊपरी इलाकों में बारिश का जलस्तर बढ़ रहा है। ताजेवाला से अतिरिक्त पानी छोड़ा जा रहा है। प्रशासन इस पर पूरी नजर बनाए है।
बाढ़ से निपटने की कार्य योजना तैयार
जिला प्रशासन ने संभावित बाढ़ को देखते हुए बाढ़ नियंत्रण कार्य योजना तैयार कर ली है। इसके तहत यमुना को केंद्र मानते हुए संबंधित क्षेत्रों में बाढ़ चौकियां, प्रभावित लोगों को ठहराए जाने के लिए शिविर के स्थान और बाढ़ प्रभावित गांवों का चयन किया गया है। बाढ़ से संबंधित संपूर्ण व्यवस्था तहसील स्तर पर विभाजित की गई है।
जनपद में यमुना का प्रवाह छाता, सदर, मांट, महावन तहसील से जुड़ा हुआ है। इसी के किनारे बाढ़ की संभावना बनती है। यमुना में पानी की मात्रा बढ़ने पर इसके निचले किनारे के गांव बाढ़ प्रभावित हो जाते हैं। इसे देखते हुए जिला प्रशासन ने संभावित तैयारी शुरू कर दी हैं। प्रत्येक तहसील में बाढ़ से प्रभावित होने वाले गांवों को तीन श्रेणी में बांटा गया है। इसमें लो फ्लड, मीडियम फ्लड और हाई फ्लड में तहसील स्तर पर गांव चयनित किए गए हैं।
इन गांवों की आबादी के तहत ही शिविर के लिए स्थान तय किए गए हैं, जिससे बाढ़ आने पर संबंधित गांवों के लोगों को शिविरों में ठहराया जा सके। इसके अलावा यमुना से सटे क्षेत्र में 40 बाढ़ चौकियां बनाई गई है। इसके अलावा संकट कालीन पशु सहायता शिविरों का भी प्रावधान किया है। आपूर्ति विभाग और स्वास्थ्य विभाग की भी जिम्मेदारी तय की गई है। बाढ़ नियंत्रण कार्य योजना में यमुना के अलावा जनपद के विभिन्न क्षेत्र से गुजरते रजबहा, नाले और नहरों के आसपास भी व्यवस्था की योजना बाई है।