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परिक्रमा के बाद कठोर तप पर आज बैठेगा पंडा मोनू
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कोसीकलां (मथुरा)। प्रहलाद और होलिका दहन की पौराणिक गाथा को जीवंतता देती परंपरा एक बार फिर साकार होने को उत्सुक है। होलिका दहकते अंगारों के बीच गुजरने के लिए आस्था की अग्निपरीक्षा देने को मोनू पंडा बुधवार से एक माह के कठोर तप पर बैठ जाएगा। होलिका दहन के दिन जब दीपक की लौ उसकी हथेली को शीतलता का एहसास कराएगी, पंडा के कदम होलिका की लपटों को चीरते हुए आगे बढ़ जाएंगे।
गांव फालैन को प्रहलादनगरी के नाम से जाना जाता है। इस बार भी मोनू पंडा बुधवार को पूर्णिमा के दिन सुबह गांव की परिक्रमा लगाकर प्रहलाद मंदिर पर तप पर बैठ जाएगा। होलिका की लग्न निर्धारित होने के बाद आसपास के सात गांव मिलकर प्रहलाद मंदिर के पास विशाल होलिका तैयार करेंगे।
होलिका दहन के दिन मोनू पंडा को मंदिर की ज्योति पर हाथ रख शुभ लग्न के संकेत मिलने का इंतजार करेगा। जैसे ही ज्योति की लौ से शीतलता का आभास होगा पंडा के इशारे पर होलिका में अग्नि प्रवेश करा दी जाएगी। इसके बाद प्रहलाद कुंड में स्नान कर पंडा होलिका के दहकते अंगारों के बीच से गुजरेगा।
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पंडा को ये करना होगा पालन
- पूर्णिमा के दिन घर परिवार को त्याग देगा।
- पूरे महीने ब्रह्मचर्य का पालन करना होगा।
- मंदिर पर उपलब्ध खाद्य सामग्री का सेवन करेगा।
- जमीन पर ही सोना होगा, प्रहलाद कुंड में स्नान के बाद ध्यान लगाएगा।
- तप के दौरान गांव की सीमा से बाहर नहीं जा सकेगा।
- किसी भी महिला या पुरुष श्रद्धालु को अपने पैर नही छूने देगा।
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गांव फालैन को प्रहलादनगरी के नाम से जाना जाता है। इस बार भी मोनू पंडा बुधवार को पूर्णिमा के दिन सुबह गांव की परिक्रमा लगाकर प्रहलाद मंदिर पर तप पर बैठ जाएगा। होलिका की लग्न निर्धारित होने के बाद आसपास के सात गांव मिलकर प्रहलाद मंदिर के पास विशाल होलिका तैयार करेंगे।
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होलिका दहन के दिन मोनू पंडा को मंदिर की ज्योति पर हाथ रख शुभ लग्न के संकेत मिलने का इंतजार करेगा। जैसे ही ज्योति की लौ से शीतलता का आभास होगा पंडा के इशारे पर होलिका में अग्नि प्रवेश करा दी जाएगी। इसके बाद प्रहलाद कुंड में स्नान कर पंडा होलिका के दहकते अंगारों के बीच से गुजरेगा।
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पंडा को ये करना होगा पालन
- पूर्णिमा के दिन घर परिवार को त्याग देगा।
- पूरे महीने ब्रह्मचर्य का पालन करना होगा।
- मंदिर पर उपलब्ध खाद्य सामग्री का सेवन करेगा।
- जमीन पर ही सोना होगा, प्रहलाद कुंड में स्नान के बाद ध्यान लगाएगा।
- तप के दौरान गांव की सीमा से बाहर नहीं जा सकेगा।
- किसी भी महिला या पुरुष श्रद्धालु को अपने पैर नही छूने देगा।