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चंदन का लेप लगा गिरिराजजी ने दिए दर्शन
ब्यूरो, अमर उजाला मथुरा
Updated Tue, 23 Jun 2015 12:04 AM IST
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अधिक मास मेला में सूर्य की तपिश और उमस से निजात दिलाने के लिए गिरिराजजी को चंदन का लेप लगा हरीभरी लताओं से ठंडक दी जा रही है। अधिक मास में उमड़ रही श्रद्धालुओं की भीड़ को दर्शन देने के लिए गिरिराजजी खुद को शीतल चित्त रखने के लिए सहर्ष ही प्राकृतिक इंतजामों का सहारा ले रहे हैं। इधर आराध्य के इस स्वरूप का दर्शन कर श्रद्धालु भी निहाल हो रहे हैं।
जून माह में शुरू हुए अधिकमास में रोजाना लाखों श्रद्धालु गिरिराज परिक्रमा को उमड़ रहे हैं। ऐसे में श्रद्धालुओं को दर्शन दे रहे गिरिराजजी को सेवायतों ने तरावट देने के लिए प्राकृतिक तरीके अपनाना शुरू कर दिया है। विश्वविख्यात दानघाटी मंदिर में गिरिराजजी की शिला पर चंदन का लेप लगाकर प्राकृतिक शृंगार किया गया।
सोमवार को प्रभु को पारंपरिक पोशाक के बजाय मीना लाल पुरोहित और सेवायत रामेश्वर पुरोहित ने ठंडा चंदन गिरिराज शिला पर लगाया। विशेष सजावट में लताओं से आच्छादित कंदरा बना कर प्राकृतिक वातावरण दिया। गिरिराजजी के अनुपम शृंगार को देख भक्त जयकारे लगाकर नयन और मन की शीतलता का आभास कर रहे थे। मंदिर प्रबंधक डालचंद ने बताया कि जेठ की गर्मी सबसे भीषण गर्मी होती है। ऐसे में गर्मी से राहत के लिए लेप और लताओं का शृंगार गिरिराजजी को भाता है।
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दंडवती परिक्रमा से बनी माला
गोवर्धन। अधिक मास मेला में गिरिराज महाराज की नगरी में परिक्रमार्थियों का सैलाब है। लाखों लोग प्रतिदिन गिरराज परिक्रमा के लिए गोवर्धन आ रहे हैं। दंडवती परिक्रमा से मार्ग में माला बन गई है। वहीं बिजली घर, सौंख अड्डा और दानघाटी मंदिर मार्ग पर डग्गेमार वाहन खड़ा कर देने से जाम के हालात बने रहते हैं। इधर श्रद्धालु भीषण गर्मी के बीच अंधेरे से परेशान हैं। बिजली रात में घंटों गायब रहती है।
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जून माह में शुरू हुए अधिकमास में रोजाना लाखों श्रद्धालु गिरिराज परिक्रमा को उमड़ रहे हैं। ऐसे में श्रद्धालुओं को दर्शन दे रहे गिरिराजजी को सेवायतों ने तरावट देने के लिए प्राकृतिक तरीके अपनाना शुरू कर दिया है। विश्वविख्यात दानघाटी मंदिर में गिरिराजजी की शिला पर चंदन का लेप लगाकर प्राकृतिक शृंगार किया गया।
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सोमवार को प्रभु को पारंपरिक पोशाक के बजाय मीना लाल पुरोहित और सेवायत रामेश्वर पुरोहित ने ठंडा चंदन गिरिराज शिला पर लगाया। विशेष सजावट में लताओं से आच्छादित कंदरा बना कर प्राकृतिक वातावरण दिया। गिरिराजजी के अनुपम शृंगार को देख भक्त जयकारे लगाकर नयन और मन की शीतलता का आभास कर रहे थे। मंदिर प्रबंधक डालचंद ने बताया कि जेठ की गर्मी सबसे भीषण गर्मी होती है। ऐसे में गर्मी से राहत के लिए लेप और लताओं का शृंगार गिरिराजजी को भाता है।
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दंडवती परिक्रमा से बनी माला
गोवर्धन। अधिक मास मेला में गिरिराज महाराज की नगरी में परिक्रमार्थियों का सैलाब है। लाखों लोग प्रतिदिन गिरराज परिक्रमा के लिए गोवर्धन आ रहे हैं। दंडवती परिक्रमा से मार्ग में माला बन गई है। वहीं बिजली घर, सौंख अड्डा और दानघाटी मंदिर मार्ग पर डग्गेमार वाहन खड़ा कर देने से जाम के हालात बने रहते हैं। इधर श्रद्धालु भीषण गर्मी के बीच अंधेरे से परेशान हैं। बिजली रात में घंटों गायब रहती है।