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पितृपक्ष: आज से शुरू होंगे श्रद्धा के साथ श्राद्ध
Mathura
Updated Mon, 08 Sep 2014 05:30 AM IST
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मथुरा। श्रद्धा के साथ आठ सितंबर से श्राद्ध पक्ष शुरू हो रहा है। महर्षि जाबलि के अनुसार श्राद्ध करने से पितृ प्रसन्न होकर आयु, आरोग्य, समृद्धि का आशीर्वाद देते हैं। यह आठ सितंबर से शुरू होकर 23 सितंबर तक चलेंगे। ब्रह्म पुराण के अनुसार श्राद्ध केे तीन देवता वसु, रुद्र और आदित्य हैं। तीन पीढ़ियों के तीन पूर्वज अर्थात पिता, पितामह और प्रपितामह क्रमश: वसु, रुद्र और आदित्य तुल्य माने गए हैं। अटूट विश्वास है कि श्राद्ध के समय उच्चारित किए गए नाम, गोत्र और मंत्रों से श्राद्ध में अर्पित दृव्य वायु रूप में प्रविष्ट होकर पितृ को प्राप्त होता है।
ऐसे करें श्राद्ध
ज्योतिषाचार्य पंडित कामेश्वर चतुर्वेदी के अनुसार पितृेश्वरों के नाम पर पिंडदान, श्राद्ध, तर्पण आदि श्रद्धा के साथ देना श्राद्ध है। भोजन का पहला ग्रास गाय, कौआ और फिर ब्राह्मणों को भोजन कराना चाहिए। तिल, उड़द, जौ, चावल, जल कंदमूल-फल और घृत इसके दृव्य हैं। पितृ का आवास दक्षिण दिशा में होने के कारण श्राद्ध दक्षिणामुख होकर जनेऊ को कंधे पर रखा जाता है। श्राद्ध में जड़ सहित कुशा प्रयुक्त होती है। पितृ पक्ष में प्रतिदिन ठाकुर जी का भोग लगाकर गौ-ग्रास निकालना, श्राद्ध की तिथि को गौ ग्रास के अलावा कुत्ता, कौआ, मछली, कछुआ का भी ग्रास निकालना चाहिए।
पितृ पक्ष में ये न करें
श्राद्धों में दिन में सोना, असत्य बोलना, रतिक्रिया, सिर और शरीर पर तेल, साबुन, इत्र आदि का प्रयोग, मदिरा सेवन नहीं करना चाहिए। जुआ खेलना, झगड़ा किसी भी जीवधारी को कष्ट नहीं देना चाहिए।
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बाजारों में पसर जाएगा सन्नाटा
मथुरा। श्राद्ध पक्ष शुरू होते ही बाजारों में सन्नाटा पसर जाता है। रोजमर्रा के खानपान के सामान के अलावा इस अवधि में लोग नए सामान को खरीदने से परहेज करते हैं। ऐसे में व्यापारी भी इस समय का उपयोग दुकानों को व्यवस्थित करने, रंगरोगन, पुताई करने और नवदुर्गा, दीपावली की बिक्री के लिए अन्य इंतजामों को दुरुस्त करने में करते हैं।
स्वामी घाट पर सामूहिक तर्पण आज
मथुरा। मथुरस्थ सर्वकर्म पांडित्य समिति के अध्यक्ष पंडित अशोक पाठक, संगठन मंत्री अमित भारद्वाज के अनुसार विप्र समाज द्वारा सामूहिक पितृ तर्पण स्वामी घाट पर सोमवार को सुबह 11 बजे होगा। सर्व प्रथम देव तर्पण, ऋषि तर्पण के उपरांत स्वपितृ तर्पण का आयोजन होगा। इसके बाद अज्ञात कारणों से असमय काल के गाल में समाए लोगों के निमित्त तर्पण किया जाएगा। पितृपक्ष में पंडित चंद्रशेखर गोस्वामी के द्वारा असकुंडा घाट पर सुबह आठ बजे से तर्पण निशुल्क कराया जाएगा।
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ऐसे करें श्राद्ध
ज्योतिषाचार्य पंडित कामेश्वर चतुर्वेदी के अनुसार पितृेश्वरों के नाम पर पिंडदान, श्राद्ध, तर्पण आदि श्रद्धा के साथ देना श्राद्ध है। भोजन का पहला ग्रास गाय, कौआ और फिर ब्राह्मणों को भोजन कराना चाहिए। तिल, उड़द, जौ, चावल, जल कंदमूल-फल और घृत इसके दृव्य हैं। पितृ का आवास दक्षिण दिशा में होने के कारण श्राद्ध दक्षिणामुख होकर जनेऊ को कंधे पर रखा जाता है। श्राद्ध में जड़ सहित कुशा प्रयुक्त होती है। पितृ पक्ष में प्रतिदिन ठाकुर जी का भोग लगाकर गौ-ग्रास निकालना, श्राद्ध की तिथि को गौ ग्रास के अलावा कुत्ता, कौआ, मछली, कछुआ का भी ग्रास निकालना चाहिए।
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पितृ पक्ष में ये न करें
श्राद्धों में दिन में सोना, असत्य बोलना, रतिक्रिया, सिर और शरीर पर तेल, साबुन, इत्र आदि का प्रयोग, मदिरा सेवन नहीं करना चाहिए। जुआ खेलना, झगड़ा किसी भी जीवधारी को कष्ट नहीं देना चाहिए।
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बाजारों में पसर जाएगा सन्नाटा
मथुरा। श्राद्ध पक्ष शुरू होते ही बाजारों में सन्नाटा पसर जाता है। रोजमर्रा के खानपान के सामान के अलावा इस अवधि में लोग नए सामान को खरीदने से परहेज करते हैं। ऐसे में व्यापारी भी इस समय का उपयोग दुकानों को व्यवस्थित करने, रंगरोगन, पुताई करने और नवदुर्गा, दीपावली की बिक्री के लिए अन्य इंतजामों को दुरुस्त करने में करते हैं।
स्वामी घाट पर सामूहिक तर्पण आज
मथुरा। मथुरस्थ सर्वकर्म पांडित्य समिति के अध्यक्ष पंडित अशोक पाठक, संगठन मंत्री अमित भारद्वाज के अनुसार विप्र समाज द्वारा सामूहिक पितृ तर्पण स्वामी घाट पर सोमवार को सुबह 11 बजे होगा। सर्व प्रथम देव तर्पण, ऋषि तर्पण के उपरांत स्वपितृ तर्पण का आयोजन होगा। इसके बाद अज्ञात कारणों से असमय काल के गाल में समाए लोगों के निमित्त तर्पण किया जाएगा। पितृपक्ष में पंडित चंद्रशेखर गोस्वामी के द्वारा असकुंडा घाट पर सुबह आठ बजे से तर्पण निशुल्क कराया जाएगा।