फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Uttar Pradesh ›   Mathura News ›   338 accidents and 75 deaths on the Yamuna Expressway in 10 years due to dense fog

Mathura News: यमुना एक्सप्रेस वे पर घने कोहरे में 10 साल में 338 हादसे, 75 मौतें

Amar Ujala Bureau अमर उजाला ब्यूरो
Updated Wed, 17 Dec 2025 12:52 AM IST
विज्ञापन
338 accidents and 75 deaths on the Yamuna Expressway in 10 years due to dense fog
मथुरा। सड़क हादसों की रोकथाम के लिए तमाम उपायों के दावों के बाद भी यमुना एक्सप्रेस वे पर हर साल कोहरे में दुर्घटनाओं में लोग जान गंवाते हैं और घायल होते हैं। आंकड़ों के मुताबिक वर्ष 2012 से 2023 के बीच एक्सप्रेस वे कोहरे में 338 दुर्घटनाएं हुईं, जिनमें 75 लोगों की मौत हुई, जबकि 665 से अधिक लोग घायल हुए। सड़क सुरक्षा विशेषज्ञ केसी जैन का कहना है कि दृश्य शून्यता की स्थिति में वाहनों के आवागमन पर नियंत्रण होना जरूरी है। जब एक्सप्रेसवे पर घने कोहरे के कारण दृश्यता शून्य या अत्यंत सीमित हो जाती है, लेकिन भारी वाहन, ट्रक एवं बसें तेज गति से चलती रहती हैं। इससे दुर्घटनाएं स्वाभाविक रूप से बढ़ जाती हैं। सुप्रीम कोर्ट के अधिवक्ता व सड़क सुरक्षा विशेषज्ञ केसी जैन का कहना है कि एक्सप्रेस वे पर हुई दुर्घटनाएं अत्यंत दुःखद एवं हृदयविदारक हैं, जिन्होंने सड़क सुरक्षा व्यवस्था की प्रभावशीलता पर गंभीर प्रश्नचिह्न खड़े कर दिए हैं।
विज्ञापन

आंकड़ों के अनुसार, वर्ष 2012 से 2023 के मध्य केवल घने कोहरे के कारण यमुना एक्सप्रेसवे पर 338 सड़क दुर्घटनाएं हुईं, जिनमें 75 लोगों की मृत्यु हुई तथा 665 से अधिक व्यक्ति गंभीर रूप से घायल हुए। शीतकाल में कोहरे के कारण एक्सप्रेसवे पर दुर्घटनाएं होना अब एक नियमित और चिंताजनक प्रवृत्ति बन चुकी है।
विज्ञापन

जैन बताते हैं कि मोटर वाहन अधिनियम, 1988 की धारा 115 राज्य सरकार को यह वैधानिक अधिकार प्रदान करती है कि वह सार्वजनिक सुरक्षा, सुविधा एवं जनहित को दृष्टिगत रखते हुए किसी भी सड़क या सड़क के किसी भाग पर मोटर वाहनों के आवागमन को नियंत्रित, विनियमित अथवा अस्थायी रूप से प्रतिबंधित कर सके। मंगलवार तड़के अत्यधिक घने कोहरे के कारण शून्य के निकट दृश्यता की स्थिति में एक्सप्रेसवे पर कई वाहनों की आपसी टक्कर की दुर्भाग्यपूर्ण घटना घटित हुई, यह घटना न केवल अत्यंत पीड़ादायक है, बल्कि त्वरित एवं प्रभावी निवारक उपायों की आवश्यकता को भी रेखांकित करती है। एक्सप्रेसवे पर होने वाले हादसों के पैटर्न को समझना सड़क सुरक्षा के लिए जरूरी है। सर्दियों में यमुना एक्सप्रेसवे एवं आगरा-लखनऊ एक्सप्रेसवे जैसे उच्च-गति मार्गों पर अचानक और गंभीर रूप से दृश्यता घट जाती है, विशेषकर रात्रि एवं प्रातःकाल के समय, जिससे दुर्घटनाओं का जोखिम कई गुना बढ़ जाता है।
विज्ञापन
विज्ञापन

ऐसी परिस्थितियों में, धारा 115 के अंतर्गत राज्य सरकार द्वारा प्रदत्त विवेकाधीन शक्ति का प्रयोग करते हुए, यह अत्यंत उपयोगी एवं जीवन-रक्षक होगा कि शून्य या अत्यंत कम दृश्यता की स्थिति में एक्सप्रेसवे पर वाहनों के आवागमन को अस्थायी रूप से नियंत्रित अथवा प्रतिबंधित किया जाए तथा दृश्यता सुरक्षित स्तर पर पहुंचने के पश्चात ही यातायात को पुनः सामान्य किया जाए। इस संदर्भ में वरिष्ठ अधिवक्ता जैन शीघ्र ही सर्वोच्च न्यायालय में याचिका दायर करेंगे, जिससे शून्य दृश्यता की स्थिति में वाहनों के आवागमन के संबंध में एक समान एवं वैज्ञानिक मानक व्यवस्था देशव्यापी स्तर पर विकसित की जा सके। यह कदम वर्तमान समय में इसलिए भी अत्यंत आवश्यक हो गया है क्योंकि देश में एक्सप्रेसवे नेटवर्क तथा वाहनों की संख्या निरंतर बढ़ रही है।
विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed