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रामचरित मानस प्रयोग का विषय: प्रज्ञा
Thu, 09 Nov 2023 07:05 PM IST
Anonymous User
ब्यूरो अमर उजाला मैनपुरी
ब्यूरो अमर उजाला मैनपुरी
Published by: Anonymous User
Updated Thu, 09 Nov 2023 07:05 PM IST
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मंदिर श्री भीमसेन महाराज में महाशिवरात्रि महोत्सव का शुभारंभ गुरुवार से हो गया। इस अवसर पर आयोजित संत सम्मेलन में भक्ति के महत्व के बारे में बताया। पांच दिवसीय संत सम्मेलन का समापन सात मार्च को होगा। इसमें देश के प्रसिद्ध संत भाग लेंगे।
गुरुवार को मंदिर परिसर में आयोजित संत सम्मेलन में कानपुर से आईं प्रज्ञा मिश्रा ने कहा भागवत योग, गीता वियोग व रामचरित मानस प्रयोग का विषय है। राम चरित मानस में संत तुलसीदास ने जीवन के ज्ञान व क्रिया पक्ष का सहज सरल प्रस्तुतीकरण किया है। उन्होंने कहा कि ‘ज्वारों वाले श्रम में तुम तुलसी दिनमान वन गए। कविता के नीरव उपवन में तुम गुंजित मुस्कान बन गए।’ प्रवचन कार राम अनुग्रह पांडेय ने कहा कि मानस में वर्णित पांच मंगल में सेे एक मंगल को भी पकड़े रहोगे तो जीवन में अंमगल नहीं होगा। राम जी मंगल के भवन हैं, सीता जी मंगल मूल हैं, राम कथा मंगलकरनी है, संत समाज खुद मंगलमय है। इलाहाबाद से आए ओंकार नाथ मिश्रा ने कहा कि रामचरित मानस भगवान राम के चरित्र का अवतार है। इसके माध्यम से न जाने कितने लोगों के जीवन में आश्चर्यजनक परिवर्तन हुए। पूर्व प्राचार्य डा. रामबाबू पाठक ने सती महिमा पर प्रकाश डाला। संचालक डा. पंकज मिश्र ने भगवान की कृपा होने पर संकल्प की प्रक्रिया के जुड़कर जीवन में चमत्कारी परिवर्तन आने के प्रसगों पर प्रकाश डाला। इस दौरान वीर सिंह भदौरिया, ओमप्रकाश चांदना, नरेंद्र राठौर, सियाराम पुजारी आदि मौजूद रहे।
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गुरुवार को मंदिर परिसर में आयोजित संत सम्मेलन में कानपुर से आईं प्रज्ञा मिश्रा ने कहा भागवत योग, गीता वियोग व रामचरित मानस प्रयोग का विषय है। राम चरित मानस में संत तुलसीदास ने जीवन के ज्ञान व क्रिया पक्ष का सहज सरल प्रस्तुतीकरण किया है। उन्होंने कहा कि ‘ज्वारों वाले श्रम में तुम तुलसी दिनमान वन गए। कविता के नीरव उपवन में तुम गुंजित मुस्कान बन गए।’ प्रवचन कार राम अनुग्रह पांडेय ने कहा कि मानस में वर्णित पांच मंगल में सेे एक मंगल को भी पकड़े रहोगे तो जीवन में अंमगल नहीं होगा। राम जी मंगल के भवन हैं, सीता जी मंगल मूल हैं, राम कथा मंगलकरनी है, संत समाज खुद मंगलमय है। इलाहाबाद से आए ओंकार नाथ मिश्रा ने कहा कि रामचरित मानस भगवान राम के चरित्र का अवतार है। इसके माध्यम से न जाने कितने लोगों के जीवन में आश्चर्यजनक परिवर्तन हुए। पूर्व प्राचार्य डा. रामबाबू पाठक ने सती महिमा पर प्रकाश डाला। संचालक डा. पंकज मिश्र ने भगवान की कृपा होने पर संकल्प की प्रक्रिया के जुड़कर जीवन में चमत्कारी परिवर्तन आने के प्रसगों पर प्रकाश डाला। इस दौरान वीर सिंह भदौरिया, ओमप्रकाश चांदना, नरेंद्र राठौर, सियाराम पुजारी आदि मौजूद रहे।
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