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सत्ता नहीं व्यवस्था परिवर्तन होनी चाहिए...
अमर उजाला ब्यूरो मैनपुरी
Updated Sat, 04 Feb 2017 11:40 PM IST
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सत्ता नहीं व्यवस्था परिवर्तन होनी चाहिए...
- फोटो : अमर उजाला
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बीते 30 वर्षों से गली मोहल्ले में फेरी लगाकर परिवार का भरण पोषण कर रहा चंदू लोगों को उनके मताधिकार के प्रति जागरूक कर रहा है। सरकारी योजना हो या चुनाव वह लोगों को कविताओं और छंदों के माध्यम से अलख जगाने में लगा हुआ है।
चंदू के ऊपर परिवार की जिम्मेदारी है। मजबूरी है फेरी लगाकर जीविका चलाना मगर इन सबके बीच बीते तीन दशक से मोहल्ला छपट्टी निवासी चंद्रप्रकाश उर्फ चंदू लोगों को उनके मतदान की शक्ति के बारे में जागरूक करने की मुहिम में नि:स्वार्थ जुटा हुआ है। चंदू बिक्री के साथ ही कविताएं सुनाकर मतदाताओं को उनके अधिकार के बारे मेें भी बताते हैं। शनिवार को स्टेशन रोड की एक गली में लोगों को सुना रहे थे। ‘देश के हितों की बात अब सोचता ही कौन है जुटे कर्णधार कुर्सी की खींचातानी में, सारी सुविधाएं आप ही डकार जाते, भले जर जाए गरीबन की झोपड़ी।’ वह लोगों से कहते है इस बार मतदान करो मगर मत का दान नहीं करना। क्योंकि सत्ता परिवर्तन नहीं व्यवस्था परिवर्तन होनी चाहिए, रोज रोज सरकारें बदलने से कुछ नहीं होगा, बदलना है तो सड़ी गली व्यवस्था को बदलो, तभी परिवर्तन आएगा। चंद्रप्रकाश से उनके इस जुनून के बारे में पूछा गया तो उनका कहना था कि जीवन में परिवार के साथ-साथ देश और समाज के प्रति भी जिम्मेदारी होती है। वह लोगों को इतना बताना चाहते हैं कि चुनाव में बिक कर, डरकर या झुककर कभी भी परिवर्तन नहीं हो सकता।
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चंदू के ऊपर परिवार की जिम्मेदारी है। मजबूरी है फेरी लगाकर जीविका चलाना मगर इन सबके बीच बीते तीन दशक से मोहल्ला छपट्टी निवासी चंद्रप्रकाश उर्फ चंदू लोगों को उनके मतदान की शक्ति के बारे में जागरूक करने की मुहिम में नि:स्वार्थ जुटा हुआ है। चंदू बिक्री के साथ ही कविताएं सुनाकर मतदाताओं को उनके अधिकार के बारे मेें भी बताते हैं। शनिवार को स्टेशन रोड की एक गली में लोगों को सुना रहे थे। ‘देश के हितों की बात अब सोचता ही कौन है जुटे कर्णधार कुर्सी की खींचातानी में, सारी सुविधाएं आप ही डकार जाते, भले जर जाए गरीबन की झोपड़ी।’ वह लोगों से कहते है इस बार मतदान करो मगर मत का दान नहीं करना। क्योंकि सत्ता परिवर्तन नहीं व्यवस्था परिवर्तन होनी चाहिए, रोज रोज सरकारें बदलने से कुछ नहीं होगा, बदलना है तो सड़ी गली व्यवस्था को बदलो, तभी परिवर्तन आएगा। चंद्रप्रकाश से उनके इस जुनून के बारे में पूछा गया तो उनका कहना था कि जीवन में परिवार के साथ-साथ देश और समाज के प्रति भी जिम्मेदारी होती है। वह लोगों को इतना बताना चाहते हैं कि चुनाव में बिक कर, डरकर या झुककर कभी भी परिवर्तन नहीं हो सकता।
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