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प्राइमरी स्कूलों को भी मिलेगा ए, बी, सी ग्रेड
अमर उजाला ब्यूरो, मैनपुरी
Updated Mon, 29 Aug 2016 11:36 PM IST
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School Shimla
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प्राइमरी स्कूलों में शिक्षा की गुणवत्ता सुधारने को शासन ने नई पहल शुरू की है। राजकीय इंटर कालेजों के बाद अब प्राइमरी स्कूलों को भी पढ़ाई के आधार ए, बी और सी ग्रेड में बांटा जाएगा।
उल्लेखनीय है कि जिले में वर्तमान में 2213 परिषदीय विद्यालय हैं। इनमें करीब 1.40 लाख विद्यार्थी शिक्षा ले रहे हैं। हालांकि प्राइमरी स्कूलों में विभिन्न स्तरों पर स्कूलों के निरीक्षण का नियम है। खंड शिक्षा अधिकारी से लेकर निदेशालय तक के अधिकारियों के लिए लक्ष्य तय हैं, लेकिन निरीक्षण की हकीकत कुछ और है। ग्रेडिंग के लिए मानक भी तय किए गए हैं। स्कूलों के निरीक्षण के लिए चार-पांच पन्नों का प्रपत्र है। इस पर अधिकारियों को परीक्षण करना होगा। उन्हीं बिंदुओं के लिए नंबर तय किए जाएंगे। इनके आधार पर स्कूलों की ए, बी या सी ग्रेडिंग की जाएगी। ग्रेडिंग करने के बाद स्कूलों के ग्रेड सुधारने की कवायद की जाएगी। ग्रेडिंग का जिम्मा बीएसए को दिया जाएगा।
ग्रेडिंग देने के मानक यह होंगे
-विद्यालय में कम से कम 150 छात्र-छात्राएं नामांकित हों। तीन साल में छात्र नामांकन में कोई गिरावट न हुई हो।
- संबंधित क्षेत्र के छह से 11 वर्ष के सभी बच्चे विद्यालय में नामांकित हों और इस आयु वर्ग में कोई बच्चा आउट ऑफ स्कूल न हो।
- बच्चों की विद्यालय में मासिक औसतन उपस्थिति 60 प्रतिशत हो।
- अवकाश एवं अधिकृत अनुपस्थिति को छोड़ शेष दिनों में शिक्षकों की उपस्थिति शत-प्रतिशत हो।
- शिक्षकों द्वारा पाठ्यक्रम व शिक्षण कार्य समय से पूरा किया गया हो और छात्र-छात्राओं को गृह कार्य दिया गया हो।
- विद्यालय के छात्र-छात्राओं का स्तर उत्कृष्ट कोटि का हो।
- विद्यालय भवन की रंगाई-पुताई एवं रखरखाव संतोषजनक हो। परिसर साथ सुथरा हो।
- विद्यालय में बच्चों के बैठने के लिए फर्नीचर या प्लास्टिक की चटाई की सुविधा हो।
- स्वच्छ पेयजल की व्यवस्था हो शौचालय अलग-अलग हों और क्रियाशील हों।
- सभी बच्चों के पास फ्री किताबें, यूनिफार्म के दो सेट उपलब्ध हों।
- शिक्षकों ने शैक्षणिक प्रशिक्षण एवं अन्य गतिविधियों में प्रतिभाग किया गया हो।
अगले सत्र से इस व्यवस्था को लागू किया जाएगा। ए, बी और सी ग्रेड वाले स्कूलों को प्रोत्साहन के लिए पुरस्कृत भी किया जाएगा। विभाग इसके लिए सॉफ्टवेयर तैयार करा रहा है। योजना का उद्देश्य शिक्षा व्यवस्था में सुधार लाना है।
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रामकरन यादव, बीएसए
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उल्लेखनीय है कि जिले में वर्तमान में 2213 परिषदीय विद्यालय हैं। इनमें करीब 1.40 लाख विद्यार्थी शिक्षा ले रहे हैं। हालांकि प्राइमरी स्कूलों में विभिन्न स्तरों पर स्कूलों के निरीक्षण का नियम है। खंड शिक्षा अधिकारी से लेकर निदेशालय तक के अधिकारियों के लिए लक्ष्य तय हैं, लेकिन निरीक्षण की हकीकत कुछ और है। ग्रेडिंग के लिए मानक भी तय किए गए हैं। स्कूलों के निरीक्षण के लिए चार-पांच पन्नों का प्रपत्र है। इस पर अधिकारियों को परीक्षण करना होगा। उन्हीं बिंदुओं के लिए नंबर तय किए जाएंगे। इनके आधार पर स्कूलों की ए, बी या सी ग्रेडिंग की जाएगी। ग्रेडिंग करने के बाद स्कूलों के ग्रेड सुधारने की कवायद की जाएगी। ग्रेडिंग का जिम्मा बीएसए को दिया जाएगा।
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ग्रेडिंग देने के मानक यह होंगे
-विद्यालय में कम से कम 150 छात्र-छात्राएं नामांकित हों। तीन साल में छात्र नामांकन में कोई गिरावट न हुई हो।
- संबंधित क्षेत्र के छह से 11 वर्ष के सभी बच्चे विद्यालय में नामांकित हों और इस आयु वर्ग में कोई बच्चा आउट ऑफ स्कूल न हो।
- बच्चों की विद्यालय में मासिक औसतन उपस्थिति 60 प्रतिशत हो।
- अवकाश एवं अधिकृत अनुपस्थिति को छोड़ शेष दिनों में शिक्षकों की उपस्थिति शत-प्रतिशत हो।
- शिक्षकों द्वारा पाठ्यक्रम व शिक्षण कार्य समय से पूरा किया गया हो और छात्र-छात्राओं को गृह कार्य दिया गया हो।
- विद्यालय के छात्र-छात्राओं का स्तर उत्कृष्ट कोटि का हो।
- विद्यालय भवन की रंगाई-पुताई एवं रखरखाव संतोषजनक हो। परिसर साथ सुथरा हो।
- विद्यालय में बच्चों के बैठने के लिए फर्नीचर या प्लास्टिक की चटाई की सुविधा हो।
- स्वच्छ पेयजल की व्यवस्था हो शौचालय अलग-अलग हों और क्रियाशील हों।
- सभी बच्चों के पास फ्री किताबें, यूनिफार्म के दो सेट उपलब्ध हों।
- शिक्षकों ने शैक्षणिक प्रशिक्षण एवं अन्य गतिविधियों में प्रतिभाग किया गया हो।
अगले सत्र से इस व्यवस्था को लागू किया जाएगा। ए, बी और सी ग्रेड वाले स्कूलों को प्रोत्साहन के लिए पुरस्कृत भी किया जाएगा। विभाग इसके लिए सॉफ्टवेयर तैयार करा रहा है। योजना का उद्देश्य शिक्षा व्यवस्था में सुधार लाना है।
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रामकरन यादव, बीएसए