{"_id":"b0d2c8c76a200f5eb7c70d4156923cce","slug":"prabhu-run-this-time-expectations-rail-hindi-news","type":"story","status":"publish","title_hn":"‘प्रभु’ इस बार दौड़ा दो उम्मीदों की रेल","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
‘प्रभु’ इस बार दौड़ा दो उम्मीदों की रेल
Thu, 09 Nov 2023 07:05 PM IST
Anonymous User
ब्यूरो, अमर उजाला मैनपुरी
ब्यूरो, अमर उजाला मैनपुरी
Published by: Anonymous User
Updated Thu, 09 Nov 2023 07:05 PM IST
विज्ञापन
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
मैनपुरी। गुरुवार को संसद में पेश हो रहे रेल बजट पर एक बार फिर से लोगों की नजर होगी। पिछले रेल बजट में मैनपुरी को कुछ खास नहीं मिला था। शिकोहाबाद-फर्रुखाबाद रूट पर जहां यात्री ट्रेनों का अभाव है। वहीं मैनपुरी-इटावा रेल लाइन स्वीकृत हुए 18 साल बीत जाने के बाद भी पर्याप्त बजट के अभाव में काम अधर में है। शिकोहाबाद-फर्रुखाबाद रेल लाइन पर ट्रेन की स्पीड बढ़ाने का काम तो पूरा हो गया लेकिन कोई ट्रेन नहीं बढ़ाई गई।
वर्ष 1901 में जिले से होकर रेल लाइन निकाली गई थी। पिछले तीन दशक पर यदि नजर डालें तो ट्रेन सुविधाओं के नाम पर कोई इजाफा नहीं हुआ है। आगरा पैसेंजर बंद करने के बाद कालिंदी एक्सप्रेस चलाई गई। इस बीच जिले को अन्य महानगरों से जोड़ने के लिए सर्वे भी हुए और योजनाएं भी बनी लेकिन परियोजनाएं मूर्त रूप नहीं ले सकीं। मैनपुरी-इटावा रेल परियोजना पर्याप्त बजट के अभाव में लटकी हुई है। वर्ष 2011 में मैनपुरी से बदायूं-गजरौला के लिए रेल परियोजना के लिए घोषणा की गई। सर्वे का काम भी हुआ लेकिन परियोजना के लिए बजट की व्यवस्था नहीं किए जाने से परियोजना के सर्वे का कार्य भी रोक दिया गया। एटा से जालौन के लिए रेलवे लाइन बिछाने के प्रस्ताव के तहत सर्वे की कार्रवाई शुरू की गई लेकिन अब तक सर्वे भी पूरा नहीं हो सका है। जिले में रेल सुविधाओं को बढ़ाने के लिए सांसद, जनप्रतिनिधि या किसी संगठन द्वारा कोई पहल या जन आंदोलन भी नहीं छेड़ा गया।
यात्रियों की सुविधाआें पर भी नहीं ध्यान
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की पहल पर पूरे देश में स्वच्छता अभियान चलाया गया। रेलवे के अधिकारियों और कर्मचारियों ने भी दो-तीन दिन झाड़ू लगाकर रेलवे स्टेशन को साफ किया लेकिन फिर वही हाल हो गया है। स्टेशन और आसपास गंदगी ही गंदगी नजर आती है। प्रतिदिन सफाई न किए जाने से बदबू के कारण शौचालय जाना मुश्किल होता है। यात्री सुविधाओं के नाम पर भी स्टेशन पर कुछ खास नहीं है। पीने की पानी की किल्लत के साथ यात्रियों के बैठने के लिए पर्याप्त बैंच तक नहीं हैं।
विज्ञापन
रेल बजट से लोगों की बड़ी उम्मीदें
रेल बजट से लोगों को कई उम्मीदें हैं। रेल किराए और माल भाड़े में बढ़ोत्तरी नहीं हो ऐसा लोग चाहते हैं। वहीं वर्षों से शिकोहाबाद-फर्रुखाबाद रेल लाइन पर कम से कम चार और ट्रेनें चलाने की मांग पूरी होने की भी लोग उम्मीद बांधे बैठे हैं। मैनपुरी-इटावा रेल परियोजना के लिए भी बजट में पर्याप्त व्यवस्था की जाए ऐसी लोगों की मांग है। जनता की मांग पर बजट में कितना अमल होता है यह तो रेल बजट आने पर ही पता चलेगा। अलबत्ता लोगों की निगाहें गुरुवार को पेश होने वाले रेल बजट पर लगी हुईं हैं। लोग उम्मीद कर रहे हैं कि इस बार रेल बजट में जिले को कुछ न कुछ जरूर मिलेगा।
विज्ञापन
वर्ष 1901 में जिले से होकर रेल लाइन निकाली गई थी। पिछले तीन दशक पर यदि नजर डालें तो ट्रेन सुविधाओं के नाम पर कोई इजाफा नहीं हुआ है। आगरा पैसेंजर बंद करने के बाद कालिंदी एक्सप्रेस चलाई गई। इस बीच जिले को अन्य महानगरों से जोड़ने के लिए सर्वे भी हुए और योजनाएं भी बनी लेकिन परियोजनाएं मूर्त रूप नहीं ले सकीं। मैनपुरी-इटावा रेल परियोजना पर्याप्त बजट के अभाव में लटकी हुई है। वर्ष 2011 में मैनपुरी से बदायूं-गजरौला के लिए रेल परियोजना के लिए घोषणा की गई। सर्वे का काम भी हुआ लेकिन परियोजना के लिए बजट की व्यवस्था नहीं किए जाने से परियोजना के सर्वे का कार्य भी रोक दिया गया। एटा से जालौन के लिए रेलवे लाइन बिछाने के प्रस्ताव के तहत सर्वे की कार्रवाई शुरू की गई लेकिन अब तक सर्वे भी पूरा नहीं हो सका है। जिले में रेल सुविधाओं को बढ़ाने के लिए सांसद, जनप्रतिनिधि या किसी संगठन द्वारा कोई पहल या जन आंदोलन भी नहीं छेड़ा गया।
विज्ञापन
यात्रियों की सुविधाआें पर भी नहीं ध्यान
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की पहल पर पूरे देश में स्वच्छता अभियान चलाया गया। रेलवे के अधिकारियों और कर्मचारियों ने भी दो-तीन दिन झाड़ू लगाकर रेलवे स्टेशन को साफ किया लेकिन फिर वही हाल हो गया है। स्टेशन और आसपास गंदगी ही गंदगी नजर आती है। प्रतिदिन सफाई न किए जाने से बदबू के कारण शौचालय जाना मुश्किल होता है। यात्री सुविधाओं के नाम पर भी स्टेशन पर कुछ खास नहीं है। पीने की पानी की किल्लत के साथ यात्रियों के बैठने के लिए पर्याप्त बैंच तक नहीं हैं।
विज्ञापन
रेल बजट से लोगों की बड़ी उम्मीदें
रेल बजट से लोगों को कई उम्मीदें हैं। रेल किराए और माल भाड़े में बढ़ोत्तरी नहीं हो ऐसा लोग चाहते हैं। वहीं वर्षों से शिकोहाबाद-फर्रुखाबाद रेल लाइन पर कम से कम चार और ट्रेनें चलाने की मांग पूरी होने की भी लोग उम्मीद बांधे बैठे हैं। मैनपुरी-इटावा रेल परियोजना के लिए भी बजट में पर्याप्त व्यवस्था की जाए ऐसी लोगों की मांग है। जनता की मांग पर बजट में कितना अमल होता है यह तो रेल बजट आने पर ही पता चलेगा। अलबत्ता लोगों की निगाहें गुरुवार को पेश होने वाले रेल बजट पर लगी हुईं हैं। लोग उम्मीद कर रहे हैं कि इस बार रेल बजट में जिले को कुछ न कुछ जरूर मिलेगा।