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कागजों तक सिमटी केंद्र की योजनाएं
अमर उजाला ब्यूरो, मैनपुरी
Updated Wed, 25 May 2016 11:30 PM IST
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गंदगी
- फोटो : अमर उजाला ब्यूरो
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मोदी सरकार को केंद्र में सरकार बनाए दो वर्ष हो चुके हैं, लेकिन जिले में केंद्र की चलाई जा रही योजनाओं का कोई विशेष असर नहीं दिख रहा है। न तो सांसद ही गोद लिए गांवों में पहुंचे और न ही अधिकारियों के गोद लिए गांवों में ही कोई विशेष हालात सुधरे। वहीं स्वच्छ भारत मिशन भी फोटो खिंचाने तक ही रहा। हालांकि कृषि दुर्घटना बीमा का लाभ जरूर पीड़ितों को मिला है। वहीं गांवों में शौचालय निर्माण की गति भी केंद्र सरकार की दिलचस्पी के कारण कुछ तेज हुई है।
दो वर्ष पूर्व केंद्र में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में सरकार बनी थी। इसके बाद उनकी अपील पर सांसद और अधिकारियों ने गांवों को गोद लिया था। इस पर ग्रामीणों को बदहाल गांवों की तस्वीर बदलने की आस जागी थी, लेकिन दो वर्ष बाद भी हालात जस के तस हैं। सांसद तेज प्रताप यादव ने जागीर ब्लाक का गांव सगामई को गोद लिया था। यह और बात है कि दो वर्ष में वह गांव में दो बार भी नहीं गए। यही नहीं गांव के निवासी अभी भी बदहाली में दिन गुजारने को मजबूर हैं। कुछ यही हाल अधिकारियों के गोद लिए गांवों का भी है। वहां भी विकास तो दूर कुपोषित बच्चों की संख्या भी कम नहीं हुई है।
वहीं केंद्र की बेटी बचाओ बेटी पढ़ाओ योजना भी कागजों और गोष्ठियों तक ही सीमित रह गई है। हालांकि किसान दुर्घटना बीमा योजना का लाभ जरूर पीड़ितों को मिला। इस योजना के तहत जिले के लगभग 16 किसानों को हादसे में मौत के बाद उनके परिवारीजनों को सहायता राशि का चेक दिया जा चुका है।
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वहीं केंद्र सरकार की सबसे बड़ी योजना स्वच्छ भारत मिशन भी फोटो खिंचाने तक ही सीमित रहा। अधिकारियों की लापरवाही और अनदेखी का परिणाम यह है कि आम रास्ते आदि तो दूर कार्यालयों तक में सफाई नहीं हुई है।
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दो वर्ष पूर्व केंद्र में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में सरकार बनी थी। इसके बाद उनकी अपील पर सांसद और अधिकारियों ने गांवों को गोद लिया था। इस पर ग्रामीणों को बदहाल गांवों की तस्वीर बदलने की आस जागी थी, लेकिन दो वर्ष बाद भी हालात जस के तस हैं। सांसद तेज प्रताप यादव ने जागीर ब्लाक का गांव सगामई को गोद लिया था। यह और बात है कि दो वर्ष में वह गांव में दो बार भी नहीं गए। यही नहीं गांव के निवासी अभी भी बदहाली में दिन गुजारने को मजबूर हैं। कुछ यही हाल अधिकारियों के गोद लिए गांवों का भी है। वहां भी विकास तो दूर कुपोषित बच्चों की संख्या भी कम नहीं हुई है।
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वहीं केंद्र की बेटी बचाओ बेटी पढ़ाओ योजना भी कागजों और गोष्ठियों तक ही सीमित रह गई है। हालांकि किसान दुर्घटना बीमा योजना का लाभ जरूर पीड़ितों को मिला। इस योजना के तहत जिले के लगभग 16 किसानों को हादसे में मौत के बाद उनके परिवारीजनों को सहायता राशि का चेक दिया जा चुका है।
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वहीं केंद्र सरकार की सबसे बड़ी योजना स्वच्छ भारत मिशन भी फोटो खिंचाने तक ही सीमित रहा। अधिकारियों की लापरवाही और अनदेखी का परिणाम यह है कि आम रास्ते आदि तो दूर कार्यालयों तक में सफाई नहीं हुई है।