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नवदंपति पर रहती है सदैव भगवती की कृपा
अमर उजाला ब्यूरो, मैनपुरी
Updated Wed, 13 Apr 2016 11:25 PM IST
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मंदिर
- फोटो : अमर उजाला ब्यूरो
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कस्बा का भगवती देवी माता का मंदिर लगभग सौ वर्ष पूर्व बाबूराम मिश्रा ने बनवाया था। यहां कुआं भी बना है। वहीं मंदिर प्रांगण में ही गमा देवी का थान भी है।
बताया जाता है कि माता ने स्वयं बाबूराम मिश्रा को स्वप्न दिया था। साथ ही मंदिर निर्माण की बात कही थी। उसके आधार पर ही इस मंदिर का निर्माण हुआ। मान्यता है कि मंदिर में मांगी गई मनौती अवश्य पूरी होती है। इसलिए वर्षभर यहां श्रद्धालुओं का आना लगा रहता है। नवरात्र में यहां पर विशेष आयोजन होते हैं। इसमें सुबह और शाम को विशेष आरती व भजन संध्या होती है, जिसमें सैकड़ों की संख्या में स्त्री और पुरुष भाग लेते हैं। मंदिर की देखरेख वर्तमान में बाबूराम मिश्रा के उत्तराधिकारी रामचंद्र दुबे कर रहे हैं। श्रद्धालु अपने समूह बनाकर मंदिर पर नेजा चढ़ाने आते हैं। साथ ही देवी जागरण और अन्य धार्मिक आयोजन होते रहते हैं।
मान्यता है कि उक्त मंदिर परिसर में शादी से पूर्व की जाने वाली रस्में जैसे तेल, हल्दी चढ़ाना आदि की जाएं तो नवदंपति जीवन भर सुखी रहते हैं और उन पर माता की अनुकंपा सदैव रहती है। यही कारण है कि गांव के हिंदू समाज के लोग अपने बच्चों की शादी करने से पूर्व की रस्में इसी मंदिर में पूरी करते हैं। कुछ वर्ष पूर्व माता की प्रतिमा खंडित होने पर रामचंद्र दुबे ने नई भगवती देवी की मूर्ति जयपुर से लाकर लगवाई है।
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बताया जाता है कि माता ने स्वयं बाबूराम मिश्रा को स्वप्न दिया था। साथ ही मंदिर निर्माण की बात कही थी। उसके आधार पर ही इस मंदिर का निर्माण हुआ। मान्यता है कि मंदिर में मांगी गई मनौती अवश्य पूरी होती है। इसलिए वर्षभर यहां श्रद्धालुओं का आना लगा रहता है। नवरात्र में यहां पर विशेष आयोजन होते हैं। इसमें सुबह और शाम को विशेष आरती व भजन संध्या होती है, जिसमें सैकड़ों की संख्या में स्त्री और पुरुष भाग लेते हैं। मंदिर की देखरेख वर्तमान में बाबूराम मिश्रा के उत्तराधिकारी रामचंद्र दुबे कर रहे हैं। श्रद्धालु अपने समूह बनाकर मंदिर पर नेजा चढ़ाने आते हैं। साथ ही देवी जागरण और अन्य धार्मिक आयोजन होते रहते हैं।
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मान्यता है कि उक्त मंदिर परिसर में शादी से पूर्व की जाने वाली रस्में जैसे तेल, हल्दी चढ़ाना आदि की जाएं तो नवदंपति जीवन भर सुखी रहते हैं और उन पर माता की अनुकंपा सदैव रहती है। यही कारण है कि गांव के हिंदू समाज के लोग अपने बच्चों की शादी करने से पूर्व की रस्में इसी मंदिर में पूरी करते हैं। कुछ वर्ष पूर्व माता की प्रतिमा खंडित होने पर रामचंद्र दुबे ने नई भगवती देवी की मूर्ति जयपुर से लाकर लगवाई है।
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