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इस बार चैत्र नवरात्र आठ दिन के
अमर उजाला ब्यूरो, मैनपुरी
Updated Wed, 06 Apr 2016 11:16 PM IST
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नवरात्र
- फोटो : अमर उजाला ब्यूरो
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इस बार चैत्र नवरात्र आठ दिन के हैं। शनिवार को द्वितीया और तृतीया एक साथ होने के कारण नवरात्र नौ दिनों के स्थान पर आठ दिन के होंगे। नवें दिन मां भगवती की पूजा-अर्चना की जाएगी। आठ मार्च से शुरू होने वाले नवरात्र का समापन 15 मार्च को रामनवमी पर होगा। इसके चलते देवी मंदिरों और घरों में तैयारियां शुरू हो गई हैं।
पंडित ग्याप्रसाद दुबे ने बताया कि हिंदू नव संवत्सर का शुभारंभ चैत्र नवरात्र से शुरू होता है। इसे वासंतिक नवरात्र के नाम से जाना जाता है। इस बार द्वितीया और तृतीया एक ही दिन पड़ेंगी। शनिवार को सुबह 9:27 बजे तक द्वितीया होगी। इसके बाद पूरे दिन तृतीया रहेगी। इसके कारण नवरात्र आठ दिन के ही होंगे। उन्होंने बताया कि आठ मार्च को नवरात्र आरंभ होने के दिन शुक्रवार को सुबह नौ बजे के बाद घट स्थापना श्रेष्ठ रहेगी। कारण नौ बजे के बाद सर्वार्थ सिद्ध योग लग जाएगा। वहीं अष्टमी को अमृत योग, सर्वार्थ सिद्ध योग और गुरु पुष्य योग एक साथ पड़ रहे हैं। उन्होंने बताया कि घर में कलश की स्थापना कर मां भगवती की विधि-विधान से पूजा-अर्चना करने से सुख शांति और मनोवांछित फल की प्राप्ति होती है। वहीं नवरात्र के लिए देवी मंदिरों को आकर्षक ढंग से सजाने का काम शुरू हो गया है। शक्तिपीठ मां शीतला मंदिर परिसर में प्रदर्शनी शुरू होने से मंदिर में पहले से ही आकर्षक सजावट की गई है। शहर और कस्बों के देवी मंदिरों को नवरात्र के लिए आकर्षक ढंग से सजाने की तैयारी शुरू कर दी गई है। वहीं घरों में भी नवरात्र के व्रत और कलश स्थापना की तैयारियां शुरू कर दी गई हैं।
पंडित ग्याप्रसाद दुबे ने बताया कि आठ तारीख से संवत्सर 2073 शुरू होगा। यह श्रीसाधारण संवत्सर होगा। इसे सप्तम वैवश्वद मनुवंतर भी कहा जाता है। इसके अधिपति गुरु एवं मंत्री
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बुध हैं। उन्होंने बताया कि श्रीसाधारण संवत्सर होने के कारण इस बार हर मौसम सामान्य रहेगा।
मां को चढ़ाई जाने वाली भेंट
पहले दिन- मां शैल पुत्री का पूजन करने से मन स्थिर होता है। इन्हें सफेद फूल चढ़ाने चाहिए।
दूसरे दिन- शनिवार को ही द्वितीया और तृतीया होने के कारण मां ब्रह्मचारिणी और चंद्रघंटा का पूजन एक साथ होगा। मां ब्रह्मचारिणी को कमल, गुड़हल के पुष्प अर्पित करने से शारीरिक, मानसिक शुद्धता प्राप्त होती है। वहीं मां चंद्रघंटा को कमल का पुष्प चढ़ाकर कलह से मुक्ति मिलती है।
तीसरे दिन- मां कूष्मांडा को पेठा या कुमढ़ा अर्पित करें। इनके पूजन से बीमारियों से मुक्ति मिलती है।
चौथे दिन- स्कंदमाता को कमल का पुष्प चढ़ाकर पूजन करने से संतान की प्राप्ति होती है।
पांचवें दिन- कात्यायनी माता को कमल या गुलाब का पुष्प चढ़ाएं। इससे मोक्ष, अर्थ, काम, धर्म की प्राप्ति होती है।
छठवें दिन- मां कालरात्रि को लाल पुष्प प्रिय हैं, घर में सुख शांति के लिए नारियल की बलि दें।
सातवें दिन- मां महागौरी को सफेद पुष्प चढ़ाएं।
आठवें दिन- मां सिद्धिदात्री को कमल का पुष्प चढ़ाने से मनोकामना पूर्ण होती है।
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पंडित ग्याप्रसाद दुबे ने बताया कि हिंदू नव संवत्सर का शुभारंभ चैत्र नवरात्र से शुरू होता है। इसे वासंतिक नवरात्र के नाम से जाना जाता है। इस बार द्वितीया और तृतीया एक ही दिन पड़ेंगी। शनिवार को सुबह 9:27 बजे तक द्वितीया होगी। इसके बाद पूरे दिन तृतीया रहेगी। इसके कारण नवरात्र आठ दिन के ही होंगे। उन्होंने बताया कि आठ मार्च को नवरात्र आरंभ होने के दिन शुक्रवार को सुबह नौ बजे के बाद घट स्थापना श्रेष्ठ रहेगी। कारण नौ बजे के बाद सर्वार्थ सिद्ध योग लग जाएगा। वहीं अष्टमी को अमृत योग, सर्वार्थ सिद्ध योग और गुरु पुष्य योग एक साथ पड़ रहे हैं। उन्होंने बताया कि घर में कलश की स्थापना कर मां भगवती की विधि-विधान से पूजा-अर्चना करने से सुख शांति और मनोवांछित फल की प्राप्ति होती है। वहीं नवरात्र के लिए देवी मंदिरों को आकर्षक ढंग से सजाने का काम शुरू हो गया है। शक्तिपीठ मां शीतला मंदिर परिसर में प्रदर्शनी शुरू होने से मंदिर में पहले से ही आकर्षक सजावट की गई है। शहर और कस्बों के देवी मंदिरों को नवरात्र के लिए आकर्षक ढंग से सजाने की तैयारी शुरू कर दी गई है। वहीं घरों में भी नवरात्र के व्रत और कलश स्थापना की तैयारियां शुरू कर दी गई हैं।
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पंडित ग्याप्रसाद दुबे ने बताया कि आठ तारीख से संवत्सर 2073 शुरू होगा। यह श्रीसाधारण संवत्सर होगा। इसे सप्तम वैवश्वद मनुवंतर भी कहा जाता है। इसके अधिपति गुरु एवं मंत्री
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बुध हैं। उन्होंने बताया कि श्रीसाधारण संवत्सर होने के कारण इस बार हर मौसम सामान्य रहेगा।
मां को चढ़ाई जाने वाली भेंट
पहले दिन- मां शैल पुत्री का पूजन करने से मन स्थिर होता है। इन्हें सफेद फूल चढ़ाने चाहिए।
दूसरे दिन- शनिवार को ही द्वितीया और तृतीया होने के कारण मां ब्रह्मचारिणी और चंद्रघंटा का पूजन एक साथ होगा। मां ब्रह्मचारिणी को कमल, गुड़हल के पुष्प अर्पित करने से शारीरिक, मानसिक शुद्धता प्राप्त होती है। वहीं मां चंद्रघंटा को कमल का पुष्प चढ़ाकर कलह से मुक्ति मिलती है।
तीसरे दिन- मां कूष्मांडा को पेठा या कुमढ़ा अर्पित करें। इनके पूजन से बीमारियों से मुक्ति मिलती है।
चौथे दिन- स्कंदमाता को कमल का पुष्प चढ़ाकर पूजन करने से संतान की प्राप्ति होती है।
पांचवें दिन- कात्यायनी माता को कमल या गुलाब का पुष्प चढ़ाएं। इससे मोक्ष, अर्थ, काम, धर्म की प्राप्ति होती है।
छठवें दिन- मां कालरात्रि को लाल पुष्प प्रिय हैं, घर में सुख शांति के लिए नारियल की बलि दें।
सातवें दिन- मां महागौरी को सफेद पुष्प चढ़ाएं।
आठवें दिन- मां सिद्धिदात्री को कमल का पुष्प चढ़ाने से मनोकामना पूर्ण होती है।