{"_id":"6927319062e8091dfa02fd9b","slug":"five-policemen-acquitted-after-37-years-in-truck-owner-kidnapping-case-2025-11-26","type":"story","status":"publish","title_hn":"UP: ट्रक मालिक का अपहरण...मुख्यमंत्री से शिकायत के बाद हुई थी सीबीसीआईडी जांच, 37 साल बाद पांच पुलिसकर्मी बरी","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
UP: ट्रक मालिक का अपहरण...मुख्यमंत्री से शिकायत के बाद हुई थी सीबीसीआईडी जांच, 37 साल बाद पांच पुलिसकर्मी बरी
Wed, 26 Nov 2025 10:28 PM IST
अरुन पाराशर
संवाद न्यूज एजेंसी, मैनपुरी
संवाद न्यूज एजेंसी, मैनपुरी
Published by: अरुन पाराशर
Updated Wed, 26 Nov 2025 10:28 PM IST
सार
ट्रक मालिक की पत्नी ने प्रदेश के तत्कालीन मुख्यमंत्री को टेलीग्राम कर सहदेव को अवैध हिरासत में रखने व फर्जी मुकदमे में फंसाकर जेल भेजने की शिकायत की थी। इसके बाद मामले की सीबीसीआईडी से जांच कराई गई। छह पुलिसकर्मियों के खिलाफ चार्जशीट लगी थी।
विज्ञापन
कोर्ट
- फोटो : ANI
विस्तार
ट्रक मालिक के अपहरण व फर्जी साक्ष्य बनाने के 37 साल पुराने मामले में सीजेएम न्यायालय ने पांच पुलिसकर्मियों को बरी कर दिया। मामले में सीबीसीआईडी की आगरा इकाई ने जांच के बाद छह पुलिसकर्मियों के खिलाफ चार्जशीट दाखिल की थी। एक पुलिसकर्मी की मुकदमे की सुनवाई के दौरान मौत हो गई।
छह मई 1989 की रात को थाना भोगांव क्षेत्र में जीटी रोड पर बदमाशों ने कानपुर से गाजियाबाद जा रहे एक लोडर वाहन को माल सहित लूट लिया था। आरोप के मुताबिक, मैनपुरी में संचालित ट्रांसपोर्ट से ट्रक मालिक सहदेव सिंह यादव निवासी नगला जयलाल, थाना भरथना, जिला इटावा को 7 मई को भोगांव थाने के तत्कालीन दरोगा राजपाल सिंह व शशीकांत दीक्षित थाने ले गए और अवैध हिरासत में रखा। 12 मई की रात को भोगांव थाना पुलिस ने मुठभेड़ में सहदेव के पास से बंदूक और कारतूस बरामद होने का दावा कर उसे अदालत में पेश किया, जहां से उसे जेल भेज दिया गया।
सहदेव की पत्नी कंचनलता ने 9 मई, 11 मई तथा 12 मई को प्रदेश के मुख्यमंत्री को टेलीग्राम कर सहदेव को अवैध हिरासत में रखने व फर्जी मुकदमे में फंसाकर जेल भेजने की शिकायत की। सहदेव की जमानत के बाद सहदेव और कंचनलता ने लखनऊ पहुंचकर मुख्यमंत्री से पुलिसकर्मियों की शिकायत कर सीबीसीआईडी से जांच की मांग की।
विज्ञापन
मुख्यमंत्री के आदेश पर वर्ष 1991 में सीबीसीआईडी आगरा इकाई ने मामले की जांच शुरू की। जांच में छह पुलिसकर्मियों को दोषी पाकर वर्ष 1992 में उनके खिलाफ थाना कोतवाली में ट्रक मालिक का अपहरण कर गलत साक्ष्य बनाने के आरोप में रिपोर्ट लिखाने के बाद न्यायालय में चार्जशीट दाखिल कर दी।
मुकदमे की सुनवाई सीजेएम न्यायालय में की गई। वर्ष 1992 से शुरू हुई मुकदमे की सुनवाई में अभियोजन पक्ष ने आठ गवाहों की गवाही कराई। इसमें घटना साबित नहीं हो पाई। पुलिसकर्मियों पर ट्रक मालिक का अपहरण कर गलत साक्ष्य बनाने का आरोप साबित नहीं होने पर सीजेएम विमलेश सरोज ने पांच आरोपी पुलिसकर्मियों को बरी कर दिया। एक आरोपी पुलिसकर्मी की मुकदमे की सुनवाई के दौरान मौत हो गई।
ये पुलिसकर्मी थे आरेापी
- हरीसिंह शर्मा निवासी छपरावत, थाना गुलावटी, जिला बुलंदशहर
- शशीकांत दीक्षित निवासी मालीवाड़ा, थाना सिंहनीगेट, जिला गाजियाबाद
- राजवीर सिंह निवासी राजनगर, थाना सहपऊ, जिला मथुरा
- मदनलाल गौतम निवासी मढोरा, थाना वृंदावन, जिला मथुरा
- जगदीश प्रसाद निवासी अखंडनगर भोगीपुर, थाना शाहगंज, जिला आगरा
- राजपाल सिंह निवासी ग्राम बनत, थाना आदर्श मंडी श्यामली, जिला मुजफ्फरनगर (मृतक)
विज्ञापन
छह मई 1989 की रात को थाना भोगांव क्षेत्र में जीटी रोड पर बदमाशों ने कानपुर से गाजियाबाद जा रहे एक लोडर वाहन को माल सहित लूट लिया था। आरोप के मुताबिक, मैनपुरी में संचालित ट्रांसपोर्ट से ट्रक मालिक सहदेव सिंह यादव निवासी नगला जयलाल, थाना भरथना, जिला इटावा को 7 मई को भोगांव थाने के तत्कालीन दरोगा राजपाल सिंह व शशीकांत दीक्षित थाने ले गए और अवैध हिरासत में रखा। 12 मई की रात को भोगांव थाना पुलिस ने मुठभेड़ में सहदेव के पास से बंदूक और कारतूस बरामद होने का दावा कर उसे अदालत में पेश किया, जहां से उसे जेल भेज दिया गया।
विज्ञापन
सहदेव की पत्नी कंचनलता ने 9 मई, 11 मई तथा 12 मई को प्रदेश के मुख्यमंत्री को टेलीग्राम कर सहदेव को अवैध हिरासत में रखने व फर्जी मुकदमे में फंसाकर जेल भेजने की शिकायत की। सहदेव की जमानत के बाद सहदेव और कंचनलता ने लखनऊ पहुंचकर मुख्यमंत्री से पुलिसकर्मियों की शिकायत कर सीबीसीआईडी से जांच की मांग की।
विज्ञापन
मुख्यमंत्री के आदेश पर वर्ष 1991 में सीबीसीआईडी आगरा इकाई ने मामले की जांच शुरू की। जांच में छह पुलिसकर्मियों को दोषी पाकर वर्ष 1992 में उनके खिलाफ थाना कोतवाली में ट्रक मालिक का अपहरण कर गलत साक्ष्य बनाने के आरोप में रिपोर्ट लिखाने के बाद न्यायालय में चार्जशीट दाखिल कर दी।
मुकदमे की सुनवाई सीजेएम न्यायालय में की गई। वर्ष 1992 से शुरू हुई मुकदमे की सुनवाई में अभियोजन पक्ष ने आठ गवाहों की गवाही कराई। इसमें घटना साबित नहीं हो पाई। पुलिसकर्मियों पर ट्रक मालिक का अपहरण कर गलत साक्ष्य बनाने का आरोप साबित नहीं होने पर सीजेएम विमलेश सरोज ने पांच आरोपी पुलिसकर्मियों को बरी कर दिया। एक आरोपी पुलिसकर्मी की मुकदमे की सुनवाई के दौरान मौत हो गई।
ये पुलिसकर्मी थे आरेापी
- हरीसिंह शर्मा निवासी छपरावत, थाना गुलावटी, जिला बुलंदशहर
- शशीकांत दीक्षित निवासी मालीवाड़ा, थाना सिंहनीगेट, जिला गाजियाबाद
- राजवीर सिंह निवासी राजनगर, थाना सहपऊ, जिला मथुरा
- मदनलाल गौतम निवासी मढोरा, थाना वृंदावन, जिला मथुरा
- जगदीश प्रसाद निवासी अखंडनगर भोगीपुर, थाना शाहगंज, जिला आगरा
- राजपाल सिंह निवासी ग्राम बनत, थाना आदर्श मंडी श्यामली, जिला मुजफ्फरनगर (मृतक)