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Mainpuri News: करोड़ों के भवन और वेंटिलेटर बेकार, अस्पतालों में मरीजों की मौत
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फोटो 6 जिला अस्पताल में स्थापित क्रिटिकल केयर यूनिट। संवाद
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मैनपुरी। स्वास्थ्य सेवाओं की बात करें तो जिले में भवन की कोई कमी नहीं है। यहां करोड़ो की लागत से भवन बने हुए हैं लेकिन इसके बाद भी जरूरतमंद मरीजों को उपचार नहीं मिल पा रहा है। अस्पताल में गंभीर हालत में पहुंचने वाले मरीजों की दम घुट रही है लेकिन उन्हें सांसें देने के लिए वेंटिलेटर की सुविधा भी नहीं मिल पा रही है।
जिले में प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र की बात करें तो 50 अस्पतालों में से 45 पर कोई डॉक्टर नहीं है। सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र केवल प्रसव केंद्र बनकर रह गए हैं। सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्रों पर गर्भवती महिलाओं को भर्ती कर प्रसव तो कराया जा रहा है लेकिन अन्य किसी प्रकार के मरीजों के लिए उचित उपचार की व्यवस्था नहीं है। जरा भी गंभीर मरीज यहां उपचार के लिए पहुंचे तो जिला अस्पताल के लिए रेफर कर दिया जाता है। जिला अस्पताल की स्वास्थ्य सेवाओं की स्थिति भी चिंताजनक है। यहां सामान्य मरीजों को तो भर्ती कर उपचार दिया जाता है लेकिन गंभीर मरीज जिन्हें तुरंत वेंटिलेटर की जरूरत है उन्हें रेफर कर दिया जाता है। ऐसे में या तो वे रेफर होने से पहले ही दम तोड़ देते हैं या फिर हायर सेंटर पहुंचने से पहले उनकी रास्ते में ही सांसें थम जाती हैं।
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पांच साल से ताले में बंद वेंटिलेटर
कोरोना महामारी के दौरान वर्ष 2021 में जिले में 30 वेंटिलेटर की व्यवस्था की गई थी। ये वेंंटिलेटर पिछले पांच साल से कोविड लेवल टू अस्पताल के ताले में बंद हैं। पांच साल में एक भी दिन इन वेंटिलेटर का लाभ मरीजों को नहीं मिल सका है। जबकि औसतन हर पांचवें दिन जिला अस्पताल में गंभीर अवस्था में पहुंचने वाले मरीज की वेंटिलेटर के अभाव में मौत हो रही है। यदि वेंटिलेटर सुविधा का लाभ मिले तो शायद उसकी जान बचाई जा सके।
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दृश्य नंबर-1
क्रिटिकल केयर यूनिट
महाराजा तेज सिंह जिला अस्पताल में 19 करोड़ की लागत से 50 बेड के क्रिटिकल केयर यूनिट की स्थापना कराई गई है। छह महीने से भवन बनकर तैयार है लेकिन इसके लिए न तो अभी तक डॉक्टर मिल सके हैं और न ही कर्मचारी। इतना ही नहीं इसमें किसी प्रकार की मशीनें भी नहीं आई हैं। इसके चलते 50 बेड के इस अस्पताल का मरीजों के लिए कोई लाभ नहीं है।
दृश्य नंबर-2
ट्राॅमा सेंटर
महाराजा तेज सिंह जिला अस्पताल में 5 करोड़ की लागत से छह बेड के ट्राॅमा सेंटर की स्थापना वर्ष 2023-2024 में कराई गई थी। दो साल से भवन तैयार खड़ा है लेकिन यहां न तो एक भी बेड की व्यवस्था हो सकी और न ही डॉक्टर व कर्मचारी की। इसलिए इस भवन का मरीजों को कोई लाभ नहीं मिल पा रहा है।
दृश्य नंबर-3
बर्न यूनिट
वर्ष 2018 में महाराजा तेज सिंह जिला अस्पताल में 237.88 लाख की लागत से बर्न यूनिट एवं प्लास्टिक सर्जरी केंद्र की स्थापना की गई थी। आठ साल बाद भी इस यूनिट के लिए न तो डॉक्टर मिल सके और न ही जरूरी सुविधाएं। इसके चलते बर्न विभाग में आने वाले मरीजों को प्राथमिक उपचार के साथ ही रेफर किया जा रहा है।
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पिछले पांच महीने में 33 मरीजों की सरकारी अस्पतालों में हुई मौत
माह- मरने वाले मरीजों की संख्या
जनवरी- 09
फरवरी- 08
मार्च- 06
अप्रैल- 05
मई- 05
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क्रिटिकल केयर यूनिट संचालन के लिए प्रस्ताव शासन को भेजा गया है। डॉक्टरों और प्रशिक्षित स्टाफ की कमी के कारण वेंटिलेटर सुविधा मरीजों को नहीं मिल पा रही है। प्रशिक्षित डॉक्टर और स्टाफ के लिए उच्चाधिकारियों को पत्र लिखा गया है। -डॉ. आरसी गुप्ता, सीएमओ
जिले में प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र की बात करें तो 50 अस्पतालों में से 45 पर कोई डॉक्टर नहीं है। सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र केवल प्रसव केंद्र बनकर रह गए हैं। सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्रों पर गर्भवती महिलाओं को भर्ती कर प्रसव तो कराया जा रहा है लेकिन अन्य किसी प्रकार के मरीजों के लिए उचित उपचार की व्यवस्था नहीं है। जरा भी गंभीर मरीज यहां उपचार के लिए पहुंचे तो जिला अस्पताल के लिए रेफर कर दिया जाता है। जिला अस्पताल की स्वास्थ्य सेवाओं की स्थिति भी चिंताजनक है। यहां सामान्य मरीजों को तो भर्ती कर उपचार दिया जाता है लेकिन गंभीर मरीज जिन्हें तुरंत वेंटिलेटर की जरूरत है उन्हें रेफर कर दिया जाता है। ऐसे में या तो वे रेफर होने से पहले ही दम तोड़ देते हैं या फिर हायर सेंटर पहुंचने से पहले उनकी रास्ते में ही सांसें थम जाती हैं।
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पांच साल से ताले में बंद वेंटिलेटर
कोरोना महामारी के दौरान वर्ष 2021 में जिले में 30 वेंटिलेटर की व्यवस्था की गई थी। ये वेंंटिलेटर पिछले पांच साल से कोविड लेवल टू अस्पताल के ताले में बंद हैं। पांच साल में एक भी दिन इन वेंटिलेटर का लाभ मरीजों को नहीं मिल सका है। जबकि औसतन हर पांचवें दिन जिला अस्पताल में गंभीर अवस्था में पहुंचने वाले मरीज की वेंटिलेटर के अभाव में मौत हो रही है। यदि वेंटिलेटर सुविधा का लाभ मिले तो शायद उसकी जान बचाई जा सके।
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दृश्य नंबर-1
क्रिटिकल केयर यूनिट
महाराजा तेज सिंह जिला अस्पताल में 19 करोड़ की लागत से 50 बेड के क्रिटिकल केयर यूनिट की स्थापना कराई गई है। छह महीने से भवन बनकर तैयार है लेकिन इसके लिए न तो अभी तक डॉक्टर मिल सके हैं और न ही कर्मचारी। इतना ही नहीं इसमें किसी प्रकार की मशीनें भी नहीं आई हैं। इसके चलते 50 बेड के इस अस्पताल का मरीजों के लिए कोई लाभ नहीं है।
दृश्य नंबर-2
ट्राॅमा सेंटर
महाराजा तेज सिंह जिला अस्पताल में 5 करोड़ की लागत से छह बेड के ट्राॅमा सेंटर की स्थापना वर्ष 2023-2024 में कराई गई थी। दो साल से भवन तैयार खड़ा है लेकिन यहां न तो एक भी बेड की व्यवस्था हो सकी और न ही डॉक्टर व कर्मचारी की। इसलिए इस भवन का मरीजों को कोई लाभ नहीं मिल पा रहा है।
दृश्य नंबर-3
बर्न यूनिट
वर्ष 2018 में महाराजा तेज सिंह जिला अस्पताल में 237.88 लाख की लागत से बर्न यूनिट एवं प्लास्टिक सर्जरी केंद्र की स्थापना की गई थी। आठ साल बाद भी इस यूनिट के लिए न तो डॉक्टर मिल सके और न ही जरूरी सुविधाएं। इसके चलते बर्न विभाग में आने वाले मरीजों को प्राथमिक उपचार के साथ ही रेफर किया जा रहा है।
पिछले पांच महीने में 33 मरीजों की सरकारी अस्पतालों में हुई मौत
माह- मरने वाले मरीजों की संख्या
जनवरी- 09
फरवरी- 08
मार्च- 06
अप्रैल- 05
मई- 05
क्रिटिकल केयर यूनिट संचालन के लिए प्रस्ताव शासन को भेजा गया है। डॉक्टरों और प्रशिक्षित स्टाफ की कमी के कारण वेंटिलेटर सुविधा मरीजों को नहीं मिल पा रही है। प्रशिक्षित डॉक्टर और स्टाफ के लिए उच्चाधिकारियों को पत्र लिखा गया है। -डॉ. आरसी गुप्ता, सीएमओ

फोटो 6 जिला अस्पताल में स्थापित क्रिटिकल केयर यूनिट। संवाद

फोटो 6 जिला अस्पताल में स्थापित क्रिटिकल केयर यूनिट। संवाद

फोटो 6 जिला अस्पताल में स्थापित क्रिटिकल केयर यूनिट। संवाद