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भगोड़ा सिपाही 12 साल बाद गिरफ्तार
अमर उजाला ब्यूरो मैनपुरी।
Updated Sun, 09 Apr 2017 11:38 PM IST
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भगोड़ा सिपाही 12 साल बाद गिरफ्तार
- फोटो : अमर उजाला
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थाना क्षेत्र में हत्या के मामले में भगोड़ा घोषित किए गए सिपाही को थाना पुलिस ने 12 साल बाद गिरफ्तार कर लिया है। सिपाही पर फर्जी अभिलेखों से नौकरी करने का भी आरोप है। रविवार को पुलिस ने उसे घर पर दबिश देकर दबोच लिया। बाद में उसे जेल भेजा है।
विदित है कि नौ मई 2005 को थाना क्षेत्र के गांव नगला अहिर में सर्वेंद्र यादव की गोली मारकर हत्या कर दी गई थी। रिपोर्ट मृतक के पिता जगन्नाथ यादव ने दर्ज कराई थी। हत्याकांड में गांव के ही सतीश उर्फ नितीश को नामजद किया गया था। मगर तत्कालीन थानाध्यक्ष ने सतीश को घटना में शामिल होना नहीं माना। जिसके बाद हत्याकांड के गवाहों ने न्यायालय में सतीश के शामिल होने की गवाही दी। न्यायालय ने सतीश को तलब किया तो सतीश ने हाईकोर्ट की शरण ली। हाईकोर्ट ने इस मामले को पुन: सुनवाई के लिए जिला कोर्ट में वापस कर दिया। हाजिर ना होने पर कोर्ट ने सतीश के विरुद्ध गैर जमानती वारंट जारी कर दिए।
कुसमरा पुलिस ने अपनी जांच में कोर्ट को आख्या भेजी कि गांव में सतीश नाम का कोई व्यक्ति नहीं रहता है जिस पर कोर्ट ने पुलिस महानिदेशक को पत्र लिखकर जवाब तलब किया था। जगन्नाथ पक्ष द्वारा कोर्ट में तमाम ठोस सबूत पेश किए गए जिस पर कोर्ट ने पाया कि सतीश ने अपना नाम नितीश रखकर वर्ष 2007 में एटा जिले में पुलिस भर्ती में फर्जी दस्तावेजों पर नौकरी पा ली और उसने झूठा वेरीफिकेशन करवा लिया है। अदालत में जो वोटर लिस्ट पेश की गई थी उसमें सोबरन सिंह का नितीश नाम का कोई पुत्र दर्ज नहीं था। नितीश ने शिक्षा विभाग से साठगांठ करके फर्जी जन्मतिथि अंकित कराकर अपना नाम बदलकर शासन को धोखा देकर पुलिस में सिपाही की नौकरी प्राप्त कर ली थी। जिसके बाद नितीश के विरुद्ध न्यायालय से स्थायी वारंट जारी कर भगोड़ा घोषित कर दिया था। इस बीच पुलिस को चकमा देकर आरोपी अलीगढ़ में सरकारी काबाइन पुलिस लाइन में जमा करके फरार हो गया था। उस समय वह अतरौली विधायक वीरेश यादव का गनर था।
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पीड़ित जगन्नाथ यादव ने सतीश के गिरफ्तार ना होने पर मुख्यमंत्री कार्यालय सहित कई जगह इसकी शिकायत की थी। रविवार को पुलिस ने मुखबिर की सूचना पर अभियुक्त सतीश को उसके घर से दबोच लिया।
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विदित है कि नौ मई 2005 को थाना क्षेत्र के गांव नगला अहिर में सर्वेंद्र यादव की गोली मारकर हत्या कर दी गई थी। रिपोर्ट मृतक के पिता जगन्नाथ यादव ने दर्ज कराई थी। हत्याकांड में गांव के ही सतीश उर्फ नितीश को नामजद किया गया था। मगर तत्कालीन थानाध्यक्ष ने सतीश को घटना में शामिल होना नहीं माना। जिसके बाद हत्याकांड के गवाहों ने न्यायालय में सतीश के शामिल होने की गवाही दी। न्यायालय ने सतीश को तलब किया तो सतीश ने हाईकोर्ट की शरण ली। हाईकोर्ट ने इस मामले को पुन: सुनवाई के लिए जिला कोर्ट में वापस कर दिया। हाजिर ना होने पर कोर्ट ने सतीश के विरुद्ध गैर जमानती वारंट जारी कर दिए।
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कुसमरा पुलिस ने अपनी जांच में कोर्ट को आख्या भेजी कि गांव में सतीश नाम का कोई व्यक्ति नहीं रहता है जिस पर कोर्ट ने पुलिस महानिदेशक को पत्र लिखकर जवाब तलब किया था। जगन्नाथ पक्ष द्वारा कोर्ट में तमाम ठोस सबूत पेश किए गए जिस पर कोर्ट ने पाया कि सतीश ने अपना नाम नितीश रखकर वर्ष 2007 में एटा जिले में पुलिस भर्ती में फर्जी दस्तावेजों पर नौकरी पा ली और उसने झूठा वेरीफिकेशन करवा लिया है। अदालत में जो वोटर लिस्ट पेश की गई थी उसमें सोबरन सिंह का नितीश नाम का कोई पुत्र दर्ज नहीं था। नितीश ने शिक्षा विभाग से साठगांठ करके फर्जी जन्मतिथि अंकित कराकर अपना नाम बदलकर शासन को धोखा देकर पुलिस में सिपाही की नौकरी प्राप्त कर ली थी। जिसके बाद नितीश के विरुद्ध न्यायालय से स्थायी वारंट जारी कर भगोड़ा घोषित कर दिया था। इस बीच पुलिस को चकमा देकर आरोपी अलीगढ़ में सरकारी काबाइन पुलिस लाइन में जमा करके फरार हो गया था। उस समय वह अतरौली विधायक वीरेश यादव का गनर था।
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पीड़ित जगन्नाथ यादव ने सतीश के गिरफ्तार ना होने पर मुख्यमंत्री कार्यालय सहित कई जगह इसकी शिकायत की थी। रविवार को पुलिस ने मुखबिर की सूचना पर अभियुक्त सतीश को उसके घर से दबोच लिया।