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Mainpuri: 20 साल पहले हुई विवाहिता की हत्या, सास, ननद तथा देवर की अग्रिम जमानत खारिज; लगाई गई फाइनल रिपोर्ट

Mon, 06 Nov 2023 11:02 PM IST
भूपेन्द्र सिंह संवाद न्यूज एजेंसी, मैनपुरी
संवाद न्यूज एजेंसी, मैनपुरी Published by: भूपेन्द्र सिंह Updated Mon, 06 Nov 2023 11:02 PM IST
सार

मैनपुरी में 20 साल पहले हुई विवाहिता की हत्या के मामले में कोर्ट में सुनवाई हुई। सुनवाई के बाद आरोपी सास, ननद तथा देवर की अग्रिम जमानत खारिज कर दी गई। 

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Anticipatory bail of accused was rejected in case of murder of married woman twenty years ago in Mainpuri
कोर्ट - फोटो : अमर उजाला।

विस्तार

उत्तर प्रदेश के मैनपुरी में सोमवार को अदालत ने 20 साल पहले हुई विवाहिता की हत्या के मामले की सुनवाई की गई। सुनवाई के बाद कोर्ट ने दहेज हत्या की आरोपी सास, ननद तथा देवर की अग्रिम जमानत खारिज कर दी। सुनवाई अपर जिला जज प्रथम मुनव्वर जहां की अदालत में हुई। जेठ की दो सप्ताह पहले अग्रिम जमानत खारिज हो चुकी है। घटना घिरोर थाना क्षेत्र के नगला बाग की है।

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शहर कोतवाली क्षेत्र के देवपुरा निवासी पातीराम की पुत्री सुनीता की शादी पुष्पेंद्र निवासी नगला बाग थाना घिरोर के साथ 21 फरवरी 2002 को हुई थी। एक नवंबर 2003 को सुनीता की ससुराल में जलने से मौत हो गई। पातीराम ने पति, सास, देवर, जेठ, ननद के खिलाफ दहेज हत्या की रिपोर्ट दर्ज करा दी। पुलिस ने जांच में मामला झूठा पाकर फाइनल रिपोर्ट न्यायालय में भेज दी। पातीराम की शिकायत पर सीजेएम भूलेराम ने आरोपियों के खिलाफ आदेश किया।
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पुलिस का दबाव पड़ने पर सास शांतीदेवी, ननद ममता उर्फ श्वेता, देवर वीरेंद्र ने अग्रिम जमानत पाने के लिए जिला जज के न्यायालय में आवेदन किया। अग्रिम जमानत की सुनवाई अपर जिला जज प्रथम मुनव्वर जहां के न्यायालय में हुई। एडीजीसी विपिन कुमार चतुर्वेदी ने अपराध की गंभीरता को देखते हुए जमानत नहीं देने की दलील दी। दहेज हत्या की आरोपी सास, ननद तथा देवर की अग्रिम जमानत अपर जिला जज प्रथम ने खारिज कर दी है। जेठ मनोज की दो सप्ताह पहले अग्रिम जमानत खारिज हो चुकी है।

सीबीसीआईडी ने लगाई फाइनल रिपोर्ट

सुनीता की मौत के बाद उच्चाधिकारियों के आदेश पर पुलिस ने रिपोर्ट तो लिखी, लेकिन मामले को झूठा बताकर फाइनल रिपोर्ट लगा दी। सुनीता के पिता की शिकायत पर सीजेएम ने दोबारा जांच के आदेश दिए तो दोबारा भी पुलिस ने जांच के नाम पर फाइनल रिपोर्ट लगा दी। पातीराम की शिकायत पर तीसरी बार जांच के आदेश हुए तो आरोपियों ने लाखनऊ जाकर सीबीसीआईडी जांच के आदेश कराए। सीबीसीआईडी ने भी मामले को झूठा बताकर फाइनल रिपोर्ट लगा दी।

सजा दिलाने को पीड़ित कर रहा पैरवी

पुत्री की दहेज की खातिर हत्या करने वालों को सजा दिलाने के लिए पातीराम ने हार नहीं मानी है। सीबीसीआईडी की फाइनल रिपोर्ट के बाद पातीराम ने सीजेएम न्यायालय में अभिलेखों के आधार पर आरोपियों के खिलाफ कार्रवाई की मांग की। सीजेएम के आदेश के बाद न्यायालय में हाजिर हुए सास, देवर, ननद, जेठ की अग्रिम जमानत खारिज हो चुकी है।

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