महोबा। समृद्धि परियोजना के तहत चयनित उरवारा, बीजानगर, सालट, स्वासामाफ समेत 15 गांवों में महिला किसानों को जैविक खाद बनाना सिखाया जा रहा है। बुधवार को सालट में प्रशिक्षकों ने महिला किसानों को जैविक खाद बनाने का प्रशिक्षण दिया। साथ ही यूरिया के स्थान पर जीवामृत खाद का उपयोग करने की जानकारी दी।
प्रशिक्षण में समृद्धि परियोजना के देवेंद्र कुमार चौरसिया ने बताया कि मचान विधि से सब्जी की खेती करने वाली महिलाओं को पांच-पांच प्लास्टिक ड्रम वितरित किए गए। इस दौरान जीवामृत खाद तैयार करने के तरीके बताए। एक एकड़ भूमि के लिए दस किलो गाय का गोबर, पांच लीटर गोमूत्र, दो किलो गुड़, दो किलो बेसन, 200 पानी व 50 ग्राम मिट्टी सीमेंट या प्लास्टिक के बर्तन में डाले और अच्छी तरह से मिलाएं। 48 घंटे बाद जीवामृत खाद बनकर तैयार हो जाएगी। एक लीटर खाद को 14 लीटर पानी में मिलाकर छिड़काव करें। जीवामृत का उपयोग करने से खेत में यूरिया खाद का प्रयोग नहीं करना पड़ेगा। बताया कि परियोजना का उद्देश्य किसानों की लागत को कम करना और उनकी आय को बढ़ाना है। प्रशिक्षण में महेशचंद्र, दीपक कुमार, जीतेंद्र, अरुण आदि मौजूद रहे।