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गरमी में गहराएगा पेयजल संकट
अमर उजाला ब्यूरो महोबा।
Updated Sat, 31 Jan 2015 12:04 AM IST
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बता दें कि 32 करोड़ रुपये लागत से महोबा पुनर्गठन पेयजल योजना के तहत उर्मिल बांध से 35 किलोमीटर पाइप लाइन बिछाकर पेयजल की आपूर्ति की जाती है। यही नहीं बांध से ही क्षेत्र के आधा सैकड़ा से अधिक गांवाें के किसानों को खेतों की सिंचाई के लिए नहर से पानी भी मुहैया कराया जाता है। दिसंबर 2014 के रोस्टर के मुताबिक नहरों में पानी छोड़ने के बाद नहरों को बंद कर दिया गया था। वहीं इस वर्ष कम बारिश होने से बांध भी पूरी तरह से नहीं भरा है। सीमित जलस्तर के चलते सिंचाई के बाद शेष बचे उर्मिल बांध के पानी को पेयजल के लिए संरक्षित कर दिया गया है। लेकिन उर्मिल मुख्य नहर का गेट सही तरीके से बंद न होने के कारण पानी का रिसाव हो रहा है। उधर नहर में महकमे द्वारा निर्माण कार्य शुरू करा दिए जाने के कारण पानी को नहर में पहुंचने से रोकने के लिए फाटकों को सही तरीके से बंद कराने के बजाए पानी को नदी की ओर मोड़ दिया गया है। जिससे पेयजल के लिए संरक्षित किया गया उर्मिल बांध का पानी बहकर बर्बाद हो रहा है। विभाग की लापरवाही के चलते बांध का पानी बर्बाद हो रहा है। जिससे गर्मियों में पेय जल संकट गहरा सकता है।
करार का हो रहा उल्लंघन
यूपी-एमपी की सीमा पर स्थित उर्मिल बांध उत्तर प्रदेश और मध्य प्रदेश की भूमि पर फैला हुआ है। जिससे दोनों प्रदेशों के बीच लंबे समय से चले आ रहे करार के तहत उर्मिल बांध के 60 फीसदी पानी पर एमपी और 40 फीसदी पानी पर यूपी का अधिकार है। रोस्टर के मुताबिक नहरें चलाने के बाद बंद कर दिए जाने के बाद करार के तहत सिंचाई के लिए पानी छोड़े जाने पर पाबंदी लग गई है। यही नहीं पेयजल की दृष्टि से बांध के पानी को संरक्षित कर दिया गया है। लेकिन सिंचाई विभाग की उदासीनता के चलते पानी बहकर बर्बाद होने से करार का भी उल्लंघन हो रहा है।
फाटक की मरम्मत कराए जाने के लिए स्टीमेट तैयार किया जा रहा है। बांध में पानी भरा होने के कारण उसकी मरम्मत अभी हो पाना संभव नहीं है। माह जून में बांध का जलस्तर कम होने पर बांध को निकलवाकर उसकी मरम्मत कराई जाएगी। जिससे पानी की बर्बादी को रोका जा सके।
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- विशंभर सिंह, अधिशाषी अभियंता सिंचाई विभाग।
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करार का हो रहा उल्लंघन
यूपी-एमपी की सीमा पर स्थित उर्मिल बांध उत्तर प्रदेश और मध्य प्रदेश की भूमि पर फैला हुआ है। जिससे दोनों प्रदेशों के बीच लंबे समय से चले आ रहे करार के तहत उर्मिल बांध के 60 फीसदी पानी पर एमपी और 40 फीसदी पानी पर यूपी का अधिकार है। रोस्टर के मुताबिक नहरें चलाने के बाद बंद कर दिए जाने के बाद करार के तहत सिंचाई के लिए पानी छोड़े जाने पर पाबंदी लग गई है। यही नहीं पेयजल की दृष्टि से बांध के पानी को संरक्षित कर दिया गया है। लेकिन सिंचाई विभाग की उदासीनता के चलते पानी बहकर बर्बाद होने से करार का भी उल्लंघन हो रहा है।
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फाटक की मरम्मत कराए जाने के लिए स्टीमेट तैयार किया जा रहा है। बांध में पानी भरा होने के कारण उसकी मरम्मत अभी हो पाना संभव नहीं है। माह जून में बांध का जलस्तर कम होने पर बांध को निकलवाकर उसकी मरम्मत कराई जाएगी। जिससे पानी की बर्बादी को रोका जा सके।
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- विशंभर सिंह, अधिशाषी अभियंता सिंचाई विभाग।