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जिले के तालाबों में उड़ रही है धूल
अमर उजाला ब्यूरो महोबा
Updated Sat, 27 Jun 2015 10:59 PM IST
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जिले में सूूखे के चलते तालाबों में धूल उड़ रही है। जलस्तर दिन प्रतिदिन नीचे खिसकते जाने और तालाबों, पोखरों, कुओं, तलैया सूख जाने से बीस फीसदी से ज्यादा हैंडपंप ड्राई हो गए हैं, जिससे जिले में पानी की दिन प्रतिदिन किल्लत बढ़ती जा रही है। जल स्तर की लगातार गिरावट से कुओं ने जवाब दे दिया है वहीं तालाबों और नदियों में धूल उड़ रही है। लोगों द्वारा तालाबों को खेत बना लेने से जिले में पानी संकट बढ़ गया है।
मालूम हो कि पिछले साल बारिश न होने के कारण जिले में पानी का संकट बढ़ता जा रहा है। चंदेल कालीन सरोवर कीरत सागर, मदन सागर, कल्याण सागर, बेला सागर, रेहलिया तालाब ने जवाब दे दिया है। तालाबों में पानी न होने के कारण पशु पक्षी बेेेेहाल हो गए हैं। तालाबों में पानी न होने से कस्बों व ग्रामीण अंचलों में पानी का संकट बढ़ गया है। हालत यह है कि पानी के लिए लोगों को दूर दराज लगे हैंडपंपों से पानी लाना पड़ रहा है। जलस्तर का असर कुंओं पर भी पड़ रहा है, तमाम कुओं के जलस्रोत बंद हो गए हैं, जिससे कुओं में भी पानी नहीं आ रहा है। लोग पानी के लिए रात को जागकर पानी भर रहे है। जिससे हैंडपंपों में लगने वाली भीड़ से राहत मिल सके। तालाबों के साथ इस बार बांधों ने भी जवाब दे दिया है। यदि जल्द बारिश शुरू नहीं हुई तो जिले में पानी की समस्या विकराल हो सकती है। जिसका कारण बांधों में नाममात्र का पानी रह गया है। जिससे पूरे जिले में पानी की समस्या बनी हुई है। जलस्तर दस से बारह फिट नीचे चले जाने से बीस फीसदी से ज्यादा हैंडपंप ठूंठ बन गए हैं। पानी की बढ़ती समस्या को लेकर अधिकारी भी खासे चिंतित हैं। हालांकि प्रशासन ने अभी तक पेयजल समस्या से निपटने के लिए कोई पुख्ता इंतजाम नहीं किए हैं।
पशुओं के पेयजल के नहीं कोई इंतजाम
इस दफा तालाबों, नदियों में पानी न होने से पशु पक्षी पानी के लिए भटक रहे हैं। पानी न मिलने से जानवर सूूखे पड़े खेतों में पानी के अभाव में दम तोड़ रहे है।
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नहरों से नहीं भरे गए तालाब
हर वर्ष जिलाधिकारी के आदेश पर नहरों के जरिए तालाबों को भरा जाता था, जिससे गर्मी के दिनों में जलस्तर समान्य बना रहता था। इसके साथ ही पशुओं को भी भरपूर पानी मिल जाता था। इस वर्ष पहले से ही सूखे पड़े बांधों के पानी को पीने के लिए सुरक्षित रख लिया गया था। यही वजह है कि सिंचाई के लिए बांधों से पानी नहीं छोड़ा गया था, जिससे नहरों के जरिए भरे जाने वाले तालाबों में पानी न आने से धूल उड़ रही है।
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मालूम हो कि पिछले साल बारिश न होने के कारण जिले में पानी का संकट बढ़ता जा रहा है। चंदेल कालीन सरोवर कीरत सागर, मदन सागर, कल्याण सागर, बेला सागर, रेहलिया तालाब ने जवाब दे दिया है। तालाबों में पानी न होने के कारण पशु पक्षी बेेेेहाल हो गए हैं। तालाबों में पानी न होने से कस्बों व ग्रामीण अंचलों में पानी का संकट बढ़ गया है। हालत यह है कि पानी के लिए लोगों को दूर दराज लगे हैंडपंपों से पानी लाना पड़ रहा है। जलस्तर का असर कुंओं पर भी पड़ रहा है, तमाम कुओं के जलस्रोत बंद हो गए हैं, जिससे कुओं में भी पानी नहीं आ रहा है। लोग पानी के लिए रात को जागकर पानी भर रहे है। जिससे हैंडपंपों में लगने वाली भीड़ से राहत मिल सके। तालाबों के साथ इस बार बांधों ने भी जवाब दे दिया है। यदि जल्द बारिश शुरू नहीं हुई तो जिले में पानी की समस्या विकराल हो सकती है। जिसका कारण बांधों में नाममात्र का पानी रह गया है। जिससे पूरे जिले में पानी की समस्या बनी हुई है। जलस्तर दस से बारह फिट नीचे चले जाने से बीस फीसदी से ज्यादा हैंडपंप ठूंठ बन गए हैं। पानी की बढ़ती समस्या को लेकर अधिकारी भी खासे चिंतित हैं। हालांकि प्रशासन ने अभी तक पेयजल समस्या से निपटने के लिए कोई पुख्ता इंतजाम नहीं किए हैं।
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पशुओं के पेयजल के नहीं कोई इंतजाम
इस दफा तालाबों, नदियों में पानी न होने से पशु पक्षी पानी के लिए भटक रहे हैं। पानी न मिलने से जानवर सूूखे पड़े खेतों में पानी के अभाव में दम तोड़ रहे है।
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नहरों से नहीं भरे गए तालाब
हर वर्ष जिलाधिकारी के आदेश पर नहरों के जरिए तालाबों को भरा जाता था, जिससे गर्मी के दिनों में जलस्तर समान्य बना रहता था। इसके साथ ही पशुओं को भी भरपूर पानी मिल जाता था। इस वर्ष पहले से ही सूखे पड़े बांधों के पानी को पीने के लिए सुरक्षित रख लिया गया था। यही वजह है कि सिंचाई के लिए बांधों से पानी नहीं छोड़ा गया था, जिससे नहरों के जरिए भरे जाने वाले तालाबों में पानी न आने से धूल उड़ रही है।