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शिवलिंग ज्योति स्वरूप परम तत्व है : कमलाकांत
अमर उजाला महोबा
Updated Fri, 20 Nov 2015 12:17 AM IST
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महोबा। पंडित कमलाकांत अडजरिया ने कहा कि शिव लिंग ज्योति स्वरूप परम तत्व
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है। भगवान शिव शंकर का संपूर्ण परिवार सर्व पूज्य व सर्व उपास्य है। उनके
आभूषण सर्प, चंद्रमा, गंगा जी और नंदीश्वर संसार का हित करने के कारण पूज्य
और वंदनीय है। कथा वाचक छोटी चंडिका मंदिर प्रांगण में आयोजित शिव महापुराण के चौथे दिन बोल रहे थे। उन्होंने कहा कि माता पार्वती के पुत्र गणेश व कार्तिकेय पूज्यनीय एवं वंदनीय है। कहा कि जिस परिवार के सभी सदस्य तेजस्वी और मुखिया संसार के हित में विष पान कर नीलकंठ बन जाए यह महानता का सर्वोत्कृष्ट उदाहरण है। इसलिए और सभी देव है लेकिन शिवजी महादेव है। कथा दौरान भारी संख्या में भक्त मौजूद रहे।
मनुष्य को देना पड़ता है कर्मों का लेखा जोखा
कबरई/चरखारी। विवेक नगर में चल रही श्रीमद्भागवत कथा कार्यक्रम में कथा व्यास पंडित रवि महराज ने कहा कि मनुष्य को अपने कर्मों का लेखा जोखा आने वाले जन्म में देना पड़ता है। राक्षसी पूतना ने स्वयं नारायण विष्णु के स्वरूप श्रीकृष्ण भगवान को स्तनपान कराकर मां बनने का सौभाग्य पाया है। कलयुग में ईश्वर को प्राप्त करने का सबसे सरल मार्ग माता पिता की भक्ति है।
चरखारी प्रतिनिधि के अनुसार सहस्र श्री स्वामी गोवद्र्धन्नाथ जूी महराज मेला में चल रही श्रीमद्भागवत कथा के दूसरे दिन वरसाना की अंर्तराष्ट्रीय कथा वाचिका लाड़ली जी ने कहा कि भगवान की प्राप्ति के लिए भगवत कथा रसपान जरूरी है। भावना और भाव हृदय में प्रेम रसमय हो तो भगवान मिल जाते है।
मनुष्य को देना पड़ता है कर्मों का लेखा जोखा
कबरई/चरखारी। विवेक नगर में चल रही श्रीमद्भागवत कथा कार्यक्रम में कथा व्यास पंडित रवि महराज ने कहा कि मनुष्य को अपने कर्मों का लेखा जोखा आने वाले जन्म में देना पड़ता है। राक्षसी पूतना ने स्वयं नारायण विष्णु के स्वरूप श्रीकृष्ण भगवान को स्तनपान कराकर मां बनने का सौभाग्य पाया है। कलयुग में ईश्वर को प्राप्त करने का सबसे सरल मार्ग माता पिता की भक्ति है।
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चरखारी प्रतिनिधि के अनुसार सहस्र श्री स्वामी गोवद्र्धन्नाथ जूी महराज मेला में चल रही श्रीमद्भागवत कथा के दूसरे दिन वरसाना की अंर्तराष्ट्रीय कथा वाचिका लाड़ली जी ने कहा कि भगवान की प्राप्ति के लिए भगवत कथा रसपान जरूरी है। भावना और भाव हृदय में प्रेम रसमय हो तो भगवान मिल जाते है।
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