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सूखा नहीं बल्कि अकाल पड़ा: पूर्व सांसद
ब्यूरो अमर उजाला, महोबा
Updated Sun, 14 Feb 2016 11:12 PM IST
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पूर्व सांसद गंगाचरण राजपूत ने कहा कि बुंदेलखंउ में सूखा नहीं बल्कि अकाल पड़ा है। किसानों के खेत खाली पड़े हैं। बुंदेलखंड के सैकड़ों किसानों ने आत्महत्या कर ली है, लेकिन प्रदेश सरकार ध्यान नहीं दे रही है। इसके चलते किसान पलायन कर रहा है।
पूर्व सांसद रविवार को तहसील प्रांगण में पत्रकारों से बातचीत कर रहे थे। उन्होंने कहा कि मेरे द्वारा गांव- गांव में भ्रमण किया गया, जहां पर किसानों की स्थिति बेहद खराब पाई गई। अन्नदाता खुद अन्य के लिए मोहताज हो गया है।
सरकार का खाद्य सुरक्षा कानून ऊंट के मुंह में जीरा साबित हो रहा है। हजारों गरीब परिवारों को खाद्य सुरक्षा में शामिल नहीं किया गया है, जो कोटेदार के यहां राशन पानी को चक्कर लगा रहे है।
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कहा कि बुंदेलखंड में किसान भुखमरी की कगार पर पहुंच गया है। भूसा चारा न मिलने से गाय कचरा खा रही है। बावजूद इसके जन प्रतिनिधि चिंता नहीं कर रहे। कहा कि मनरेगा के तहत मजदूरों को 160 रुपये के स्थान पर 250 रुपये मजदूरी देनी चाहिए।
बुंदेलखंड हर साल प्रदेश सरकार को 20 हजार करोड़ रुपये का राजस्व देता है, लेकिन बुुंदेलखंड पर सरकार सिर्फ 200 करोड़ रुपये खर्च कर रही है। इस मौके पर दशरथ राजपूत, योगेंद्र मिश्रा, संजय पस्तौर मौजूद रहे।
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पूर्व सांसद रविवार को तहसील प्रांगण में पत्रकारों से बातचीत कर रहे थे। उन्होंने कहा कि मेरे द्वारा गांव- गांव में भ्रमण किया गया, जहां पर किसानों की स्थिति बेहद खराब पाई गई। अन्नदाता खुद अन्य के लिए मोहताज हो गया है।
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सरकार का खाद्य सुरक्षा कानून ऊंट के मुंह में जीरा साबित हो रहा है। हजारों गरीब परिवारों को खाद्य सुरक्षा में शामिल नहीं किया गया है, जो कोटेदार के यहां राशन पानी को चक्कर लगा रहे है।
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कहा कि बुंदेलखंड में किसान भुखमरी की कगार पर पहुंच गया है। भूसा चारा न मिलने से गाय कचरा खा रही है। बावजूद इसके जन प्रतिनिधि चिंता नहीं कर रहे। कहा कि मनरेगा के तहत मजदूरों को 160 रुपये के स्थान पर 250 रुपये मजदूरी देनी चाहिए।
बुंदेलखंड हर साल प्रदेश सरकार को 20 हजार करोड़ रुपये का राजस्व देता है, लेकिन बुुंदेलखंड पर सरकार सिर्फ 200 करोड़ रुपये खर्च कर रही है। इस मौके पर दशरथ राजपूत, योगेंद्र मिश्रा, संजय पस्तौर मौजूद रहे।