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पीएम के आगमन पर उद्योग को संवारने की बंधी है आस

Mon, 15 Nov 2021 11:55 PM IST
Kanpur	 Bureau कानपुर ब्यूरो
Updated Mon, 15 Nov 2021 11:55 PM IST
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On the arrival of PM, there is hope of grooming the industry.
पत्थर मंडी कबरई में बंद पड़े क्रशर प्लांट। - फोटो : MAHOBA
कबरई (महोबा)। पीएम के जनपद आगमन पर उद्यमियों को पत्थर मंडी उबारने की आस बंधी है। उद्यमी पीएम के आगमन पर मंडी को लेकर नई सौगात मिलने की आस लगाए हैं जिससे बंद उद्योग फिर से चालू हो सके।
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कबरई सहित पूरे जिले के विभिन्न क्षेत्रों में वर्ष 2017 तक 350 स्टोन क्रशर प्लांट व इतने ही पहाड़ खनन क्षेत्र संचालित थे जिनमें हजारों श्रमिक, लघु उद्यमी, मशीन आपरेटर, छोटे ठेकेदार आदि लोगों को रोजगार प्राप्त था। वर्ष 2018 के बाद से जिले के रोजगार परक उद्योग को ग्रहण लग गया जिससे समूचा खनन व क्रशर उद्योग समाप्त हो गया है।
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क्रशर व खनन उद्यमी रूपेन्द्र सिंह, महेश तिवारी ,उपेंद्र शुक्ल, कंधीलाल यादव ने बताया कि उत्तर प्रदेश के विकास कार्यों में अन्य प्रदेशों की ग्रिट का प्रयोग होना ही प्रदेश के खनन एवम क्रशर उद्योग की बदहाली का कारण है। वही उद्यमी विवेक वर्मा ने बताया कि ई-टेंडरिंग द्वारा नए आवंटित पहाड़ खनन क्षेत्रों की पर्यावरण क्लियरेंस में शासन स्तर पर 18 से 20 माह तक की की जा रही देरी से जिले सहित पूरे राज्य का खनन उद्योग बर्बाद होता जा रहा है।
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क्या कहते यूनियन के पदाधिकारी
क्रशर यूनियन अध्यक्ष बालकिशोर द्विवेदी ने बताया कि शासन स्तर से नदी तल की बालू, रेत खनन में भ्रष्टाचार को समाप्त करने के लिए बनाई गई नीतियों का प्रयोग पहाड़ खनन उद्योग व क्रशर उद्योग को समाप्त करने के लिए किया गया। पड़ोसी राज्य मध्यप्रदेश के खनन माफियाओं को लाभ पहुंचाने की नीयत से जिला प्रशासन द्वारा रणनीति बनाकर कार्य किया गया है। जिसका परिणाम है कि पड़ोसी राज्यों का खनन व क्रशर उद्योग खूब फल फूल रहा है जबकि जिले के उद्योग में ताले लटक रहे हैं।

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क्रशर यूनियन के महामंत्री देवेंद्र मिश्र की माने तो जनपद के उद्योग को फौरी राहत देने के उद्देश्य से शासन की मंशा से जिले के विभिन्न क्षेत्रों में भंडारित ग्रिट व डस्ट की ई-नीलामी की प्रक्रिया शुरू की गई थी जिसके टेंडर 26 अक्तूबर को खोले जाने थे जिन्हें 14 नवम्बर बीत जाने के बाद भी नही खोला गया है। जिससे उद्यमियों व जनपदवासियों में भारी निराशा व्याप्त है।उद्यमियों की माने तो ग्रिट व डस्ट के टेंडर खुल जाने से जिले के उद्योग को नई ऊर्जा मिल सकती है व उद्योग संचालित हो सकता है।
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