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शहीद राकेश चौरसिया को याद किया गया
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महोबा। छत्तीसगढ़ के दंतेवाड़ा में 12 साल पहले नक्सली हमले में शहीद राकेश चौरसिया की पुण्यतिथि मनाई गई। परिजनों व समाजसेवियों ने समाधि स्थल पर पुष्प अर्पित कर व दो मिनट का मौन रखकर श्रद्धांजलि दी। समाधि स्थल पर बरगद का पौधा भी रोपा गया।
इस मौके पर बुंदेली समाज के संयोजक तारा पाटकर ने कहा कि महोबा में शहीदों को जो सम्मान मिलना चाहिए था, वो नहीं मिला। बिलबई तिराहे का नाम शहीद चौक करने की मांग भी कई वर्षों से हो रही है। शहीद दिनेश बुधौलिया की समाधि तक जाने का सीधा रास्ता अब तक नहीं बन पाया। कारगिल शहीद बालेंद्र सिंह के गांव में सड़क तक नहीं बन सकी है।
हवेली दरवाजा शहीद स्थल पर 16 क्रांतिवीरों की स्मृति में अब तक स्मारक भी नहीं बन पाया।
श्रद्धांजलि सभा में शहीद राकेश चौरसिया के पिता ज्ञान दास, भाई सुरेश, बहन प्रिंसी, शहीद जगदीश यादव के भाई दयाशंकर, शहीद दिनेश बुधौलिया के भाई सतीश कुमार, कुंअर बहादुर, गनेशी चौरसिया, जुगल, संदीप व मुकेश आदि रहे।
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इस मौके पर बुंदेली समाज के संयोजक तारा पाटकर ने कहा कि महोबा में शहीदों को जो सम्मान मिलना चाहिए था, वो नहीं मिला। बिलबई तिराहे का नाम शहीद चौक करने की मांग भी कई वर्षों से हो रही है। शहीद दिनेश बुधौलिया की समाधि तक जाने का सीधा रास्ता अब तक नहीं बन पाया। कारगिल शहीद बालेंद्र सिंह के गांव में सड़क तक नहीं बन सकी है।
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हवेली दरवाजा शहीद स्थल पर 16 क्रांतिवीरों की स्मृति में अब तक स्मारक भी नहीं बन पाया।
श्रद्धांजलि सभा में शहीद राकेश चौरसिया के पिता ज्ञान दास, भाई सुरेश, बहन प्रिंसी, शहीद जगदीश यादव के भाई दयाशंकर, शहीद दिनेश बुधौलिया के भाई सतीश कुमार, कुंअर बहादुर, गनेशी चौरसिया, जुगल, संदीप व मुकेश आदि रहे।
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