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न्याय के लिए भूख हड़ताल पर बैठे वृद्ध ने त्यागा जल
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अनशनकारी के स्वास्थ्य की जांच करते स्वास्थ्यकर्मी।
- फोटो : MAHOBA
महोबा। शहर के ऐतिहासिक कीरतसागर तालाब में मूर्ति विसर्जन के दौरान वर्ष 2017 में दो युवकों की संदिग्ध हालात में हुई मौत का मामला तूल पकड़ता जा रहा है। बेटे व उसके साथी की मौत के मामले में अभी तक दोषियों के खिलाफ कोई कार्रवाई न होने पर वृद्ध पिता 16 दिन से श्मशान घाट परिसर में भूख हड़ताल पर बैठा है। गुरुवार से वृद्ध ने जल भी त्याग दिया। स्वास्थ्य विभाग की टीम ने अनशनकारी की मौके पर पहुंचकर जांच की।
राठ रोड स्थित कांशीराम कॉलोनी निवासी राहुल सोनी व जितेंद्र अहिरवार के शव कीरत सागर तालाब में मिले थे। राहुल सोनी के पिता भगवतीप्रसाद सोनी ने आठ लोगों पर पुत्र व उसके साथी को पानी में डुबाकर मार डालने का आरोप लगाते हुए कार्रवाई की मांग की थी लेकिन कोई सुनवाई नहीं हुई। इसके लिए पीड़ित ने पांच बार आमरण अनशन किया, लिखित आश्वासन मिले लेकिन फिर भी कार्रवाई नहीं।
न्याय के लिए भगवती प्रसाद ने राठ रोड स्थित श्मशान घाट परिसर में 26 जनवरी से आमरण अनशन शुरू किया था। अफसरों ने अनशन स्थल पहुंच समझाने का प्रयास किया लेकिन वह न्याय न मिलने तक अनशन पर बैठने की मांग पर अड़े रहे। गुरुवार से अनशनकारी ने अन्न के साथ जल भी त्याग दिया। स्वास्थ्य विभाग की टीम ने उनके स्वास्थ्य की जांच की। पीड़ित का कहना है कि वह न्याय न मिलने तक अनशन जारी रखेगा। इसके लिए चाहे उसे अनशन स्थल पर ही दम तोड़ना पड़े।
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राठ रोड स्थित कांशीराम कॉलोनी निवासी राहुल सोनी व जितेंद्र अहिरवार के शव कीरत सागर तालाब में मिले थे। राहुल सोनी के पिता भगवतीप्रसाद सोनी ने आठ लोगों पर पुत्र व उसके साथी को पानी में डुबाकर मार डालने का आरोप लगाते हुए कार्रवाई की मांग की थी लेकिन कोई सुनवाई नहीं हुई। इसके लिए पीड़ित ने पांच बार आमरण अनशन किया, लिखित आश्वासन मिले लेकिन फिर भी कार्रवाई नहीं।
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न्याय के लिए भगवती प्रसाद ने राठ रोड स्थित श्मशान घाट परिसर में 26 जनवरी से आमरण अनशन शुरू किया था। अफसरों ने अनशन स्थल पहुंच समझाने का प्रयास किया लेकिन वह न्याय न मिलने तक अनशन पर बैठने की मांग पर अड़े रहे। गुरुवार से अनशनकारी ने अन्न के साथ जल भी त्याग दिया। स्वास्थ्य विभाग की टीम ने उनके स्वास्थ्य की जांच की। पीड़ित का कहना है कि वह न्याय न मिलने तक अनशन जारी रखेगा। इसके लिए चाहे उसे अनशन स्थल पर ही दम तोड़ना पड़े।
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