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आधी रात को मदरसे से भागे बिहार के तीन बच्चे
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महोबा। शहर के प्रेमनगर स्थित मदरसा जामिया इस्लामिया दारुल उलूम में पढ़ रहे बिहार के तीन बच्चे सोमवार की रात भाग निकले। मदरसे के मौलवी ने रोडवेज के अधिकारियों से सपंर्क किया तो पता चला कि तीन छोटे बच्चे लखनऊ की बस में गए हैं।
चालक-परिचालक से संपर्क कर तीनों बच्चों को कानपुर से दूसरी बस से वापस लाया गया। पूछताछ में बच्चों ने बताया कि मदरसे में उनसे मारपीट की जाती थी और अम्मी-अब्बू की याद आती थी। जिससे वह घर जाने के लिए रात में निकल गए।
बिहार के जुराबगंज निवासी गुफरान (11), तौहीद आलम (10) व नवाब (12) प्रेमनगर स्थित मदरसा में रहकर कक्षा दो की शिक्षा ग्रहण कर रहे थे। मंगलवार की रात में जब स्टाफ व अन्य बच्चे सो गए। तभी देर रात करीब दो बजे तीनों बच्चे मदरसा से घर जाने के लिए निकल आए। सुबह जब मौलवी नौशेरवा ने बच्चों को गायब देखा तो खलबली मच गई। जानकारी होने पर मौलवी ने रोडवेज बस स्टैंड पहुंच परिवहन विभाग के अधिकारियों को पूरा मामला बताया। तब डिपो के बस चालक-परिचालक से संपर्क किया गया। एआरएम के निर्देश पर तीनों बच्चों को कानपुर में ही रोक लिया और महोबा आ रही दूसरी बस में बैठाकर चालक के सुपुर्द किया गया।
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मंगलवार की दोपहर महोबा पहुंचे बच्चों ने बताया कि मदरसा में उनकी पिटाई होती है और अम्मी-अब्बू की याद आती है इसलिए वह घर जाना चाहते हैं। मामले की सूचना कोतवाली पुलिस को दी गई। बाद में तीनों बच्चों को मौलबी से लिखापढ़ी कराने के बाद सौंपा गया। मौलवी ने बच्चों को किसी तरह की कोई परेशानी न होने और न ही मारपीट किए जाने का लिखित आश्वासन दिया।
एआरएम हेमंत मिश्रा ने बताया कि बिहार के तीन बच्चे रात को तीन बजे वाली बस से अपने घर जा रहे थे। सूचना पर उन्हें कानपुर से वापस कराया गया। परिजनों से बात कर बच्चों को मौलवी को सौंप दिया गया।
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चालक-परिचालक से संपर्क कर तीनों बच्चों को कानपुर से दूसरी बस से वापस लाया गया। पूछताछ में बच्चों ने बताया कि मदरसे में उनसे मारपीट की जाती थी और अम्मी-अब्बू की याद आती थी। जिससे वह घर जाने के लिए रात में निकल गए।
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बिहार के जुराबगंज निवासी गुफरान (11), तौहीद आलम (10) व नवाब (12) प्रेमनगर स्थित मदरसा में रहकर कक्षा दो की शिक्षा ग्रहण कर रहे थे। मंगलवार की रात में जब स्टाफ व अन्य बच्चे सो गए। तभी देर रात करीब दो बजे तीनों बच्चे मदरसा से घर जाने के लिए निकल आए। सुबह जब मौलवी नौशेरवा ने बच्चों को गायब देखा तो खलबली मच गई। जानकारी होने पर मौलवी ने रोडवेज बस स्टैंड पहुंच परिवहन विभाग के अधिकारियों को पूरा मामला बताया। तब डिपो के बस चालक-परिचालक से संपर्क किया गया। एआरएम के निर्देश पर तीनों बच्चों को कानपुर में ही रोक लिया और महोबा आ रही दूसरी बस में बैठाकर चालक के सुपुर्द किया गया।
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मंगलवार की दोपहर महोबा पहुंचे बच्चों ने बताया कि मदरसा में उनकी पिटाई होती है और अम्मी-अब्बू की याद आती है इसलिए वह घर जाना चाहते हैं। मामले की सूचना कोतवाली पुलिस को दी गई। बाद में तीनों बच्चों को मौलबी से लिखापढ़ी कराने के बाद सौंपा गया। मौलवी ने बच्चों को किसी तरह की कोई परेशानी न होने और न ही मारपीट किए जाने का लिखित आश्वासन दिया।
एआरएम हेमंत मिश्रा ने बताया कि बिहार के तीन बच्चे रात को तीन बजे वाली बस से अपने घर जा रहे थे। सूचना पर उन्हें कानपुर से वापस कराया गया। परिजनों से बात कर बच्चों को मौलवी को सौंप दिया गया।