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लोहिया गांवः 2.47 करोड़ खर्च, नही मिला पानी

Thu, 11 Feb 2016 11:25 PM IST
ब्यूरो अमर उजाला, महोबा
ब्यूरो अमर उजाला, महोबा Updated Thu, 11 Feb 2016 11:25 PM IST
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Lohiya villege- spend 24.7 million , and did not find water
लोहिया ग्राम बसौठ की ग्रामीण पेयजल योजना गांव के संतृप्तीकरण की पोल खोल रही है। करीब  ढाई करोड़ खर्च होने के बाद भी ग्रामीणों को बूंद भर पानी नसीब नही हुआ। तीन वर्ष बीत जाने के बाद भी जिम्मेदार महकमा पानी में नाइट्रोजन की मात्रा अधिक होने की जांच रिपोर्ट आने के पचड़े का हवाला देकर पल्ला झाड़ लेता है।
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विकासखंड चरखारी के ग्राम बसौठ को वर्ष 2012-13 में लोहिया गांव का दर्जा मिला था। गांव को संपूर्ण संतृप्त होने की उम्मीद के साथ ग्रामीणों को वर्षों से चली आ रही पेयजल संकट की समस्या दूर होने की आश जागी।
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पेयजल समस्या को देखते हुए शासन ने भी 2.47 करोड़ आवंटित कर जल निगम को पानी की समस्या दूर करने की जिम्मेदारी सौंपी। जल निगम ने टंकी निर्माण के साथ गांव में पाइप लाइन भी डलवा दी। इसके लिए तीन ट्यूबवैलों का भी निर्माण करवा दिया गया। योजना का संपूर्ण कार्य होने के बावजूद तीन वर्ष में ग्रामीणों को बूंदभर पानी नहीं मिला।
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महकमे के जिम्मेदार अधिकारी ट्यूबवैल के पानी में नाइट्रोजन की मात्रा अधिक होने की बात कहकर जांच रिपोर्ट आने पर पानी आपूर्ति की जाएगी कहकर बात टाल देते हैं। ग्राम प्रधान कपिल तिवारी, सरमन कुशवाहा ने बताया कि पेयजल आपूर्ति तीन वर्ष से अटकी है।


महकमा पानी की जांच रिपोर्ट का बहाना कर टरका रहा है। गुणवत्ताहीन निर्माण कार्य के चलते पानी की आपूर्ति टेस्ट तक नही की गई। अन्यथा इस योजना की हकीकत खुल जाती। महकमा अपनी साख बचा रहा है।


पूर्व प्रधान रामदास गुप्ता और समाजसेवी पूर्व प्रधान स्कंद तिवारी, ब्रजनंदन तिवारी आदि ने बताया कि ट्यूबवैल बोर  के बाद पानी की जांच करानी चाहिए। लेकिन विभाग ने पंप हाउस तक निर्माण करा धन खर्च कर दिया। अब पानी में नाइट्रोजन  होने की जांच में समय बर्बाद करना समझ से परे है।



जलनिगम के जेई दीपक चौहान ने बताया कि नाइट्रोजन पानी में अधिक था। दोबारा जांच के लिए लखनऊ और बबीना सैंपल भेजा है। मुख्य अभियंता के संज्ञान में भी मामला लाया गया है। जल्द ही पानी आपूर्ति का प्रयास किया जाएगा।
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