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रामलीला में जनक विलाप सुन दर्शकों की आंखों से छलके आंसू

Wed, 13 Nov 2019 10:39 PM IST
Kanpur	 Bureau कानपुर ब्यूरो
Updated Wed, 13 Nov 2019 10:39 PM IST
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Hearing Janak's moan in Ramlila, tears trickled from the eyes of the audience
कुलपहाड़ (महोबा)। तहसील के ग्राम सुगिरा में चल रहे रामलीला के चौथे दिन जनक विलाप व धनुषयज्ञ की लीला दिखाई गई। देश-विदेश से आए राजाओं के धनुष न हिला पाने पर जनक का विलाप सुना तो दर्शकों की आंखें छलक पड़ीं। रामलीला देखने के लिए दर्शकों की भारी भीड़ जुटी रही।
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रामलीला में मंगलवार की रात जनक विलाप, रावण बाणासुर संवाद, धनुषयज्ञ व परशुराम लक्ष्मण संवाद की लीला दिखाई गईं। बाद में सीता स्वयंवर की लीला हुई।
सीता स्वयंवर में पहुंचे लंकापति रावण और पाताल नरेश बाणासुर के बीच संवाद हुआ। इसे सुनकर दर्शक मंत्रमुग्ध हो गए। वहीं शिवजी का धनुष टूटने से नाराज परशुराम ने अपना रौद्र रूप दिखाया। इससे नाराज लक्ष्मण और परशुराम का संवाद हुआ। लक्ष्मण ने कहा कि ‘छुअत टूट रघुपतहि न दोषू’ सुनकर परशुराम क्रोधित हो गए। बाद में भगवान राम ने परशुराम को शांत किया। रामलीला में राम का अभिनय शिवा पाठक, लक्ष्मण का शैलेंद्र तिवारी, जनक का मधु पटैरिया, परशुराम का सुधांशु मोहन अरजरिया, बाणासुर का सुबोध कुमार व रावण का अभिनय चूरामणि तिवारी ने किया। व्यास के रूप में विशाल भारती मिश्रा व मंच का संचालन कृष्णचंद्र पाठक ने किया।
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