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टीबी को हराकर 13 बच्चे बनें चैंपियन
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महोबा। टीबी रोग से ग्रस्त बच्चों का मनोबल बढ़ाने और पोषकता का ध्यान रखने के लिए गोद लेने की मुहिम कारगर साबित हो रही है। यह मुहिम राज्यपाल आनंदीबेन पटेल ने पूरे प्रदेश में चला रखी है। जिले में 13 बच्चों को गोद लिया गया था। इसमें सभी बच्चे टीबी की बीमारी से जंग जीतकर चैंपियन बन चुके हैं। जिले में 146 बच्चे टीबी की चपेट में हैं।
समद नगर निवासी 11 वर्षीय टीबी के मरीज बच्चे की मां नूरजहां का कहना है कि योजना के जिला कार्यक्रम समन्वयक (डीपीसी) नरेंद्र कुमार सिंह ने घर आकर उनके बच्चे को गोद लेने की इच्छा जताई। इस पर उसने इनकार कर दिया। लेकिन डीपीसी ने समझाया कि बच्चों को सही पोषण व इलाज के लिए उसे गोद लेने की योजना चल रही है। इस पर नूरजहां ने सहमति दे दी। नियमिति दवा, पोषण किट व फालोअप से बच्चे ने टीबी को मात दे दी।
वहीं, सहयोगी सेवा संस्थान की अध्यक्ष नेहा चंसौरिया दो टीबी रोगी बच्चों को गोद ले चुकी हैं। उनका कहना है कि अब दोनों बच्चे स्वस्थ हो चुके हैं। इस पुनीत कार्य से आत्म संतुष्टि मिलती है। इसके अलावा जिला क्षय रोग अधिकारी, टीबी अस्पताल में स्वास्थ्य कर्मी अनुपम, चरखारी में सहायक अध्यापक मुबारक हुसैन ने भी बच्चों को गोद लिया।
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सीएमओ डॉ. एमके सिन्हा ने कहा कि आशा और एएनएम के माध्यम से मरीजों को ढूंढने का अभियान चलाया जा रहा है। उनका नि:शुल्क इलाज किया जाएगा। जिला क्षय रोग अधिकारी ने टीबी के शुरुआती लक्षणों के बारे में बताते हुए कहा कि खांसी व बलगम आना, सांस फूलना, लगातार कमजोर होते जाना, टीबी के लक्षण हैं। ऐसे लक्षण दिखने पर तत्काल स्वास्थ्य केंद्रों से संपर्क करना चाहिए। वहीं, जिला क्षय रोग अधिकारी डॉ. जीआर रत्मेले ने बताया कि टीबी ग्रसित जिन बच्चों को गोद लिया जाता है, उन्हें पोषक सामग्री देनी होती है और नियमित तौर पर उनका हालचाल लेना होता है। उन्हें पोषक तत्वों की आवश्यकता भी सबसे ज्यादा होती है।
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समद नगर निवासी 11 वर्षीय टीबी के मरीज बच्चे की मां नूरजहां का कहना है कि योजना के जिला कार्यक्रम समन्वयक (डीपीसी) नरेंद्र कुमार सिंह ने घर आकर उनके बच्चे को गोद लेने की इच्छा जताई। इस पर उसने इनकार कर दिया। लेकिन डीपीसी ने समझाया कि बच्चों को सही पोषण व इलाज के लिए उसे गोद लेने की योजना चल रही है। इस पर नूरजहां ने सहमति दे दी। नियमिति दवा, पोषण किट व फालोअप से बच्चे ने टीबी को मात दे दी।
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वहीं, सहयोगी सेवा संस्थान की अध्यक्ष नेहा चंसौरिया दो टीबी रोगी बच्चों को गोद ले चुकी हैं। उनका कहना है कि अब दोनों बच्चे स्वस्थ हो चुके हैं। इस पुनीत कार्य से आत्म संतुष्टि मिलती है। इसके अलावा जिला क्षय रोग अधिकारी, टीबी अस्पताल में स्वास्थ्य कर्मी अनुपम, चरखारी में सहायक अध्यापक मुबारक हुसैन ने भी बच्चों को गोद लिया।
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सीएमओ डॉ. एमके सिन्हा ने कहा कि आशा और एएनएम के माध्यम से मरीजों को ढूंढने का अभियान चलाया जा रहा है। उनका नि:शुल्क इलाज किया जाएगा। जिला क्षय रोग अधिकारी ने टीबी के शुरुआती लक्षणों के बारे में बताते हुए कहा कि खांसी व बलगम आना, सांस फूलना, लगातार कमजोर होते जाना, टीबी के लक्षण हैं। ऐसे लक्षण दिखने पर तत्काल स्वास्थ्य केंद्रों से संपर्क करना चाहिए। वहीं, जिला क्षय रोग अधिकारी डॉ. जीआर रत्मेले ने बताया कि टीबी ग्रसित जिन बच्चों को गोद लिया जाता है, उन्हें पोषक सामग्री देनी होती है और नियमित तौर पर उनका हालचाल लेना होता है। उन्हें पोषक तत्वों की आवश्यकता भी सबसे ज्यादा होती है।