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दाना पानी न मिलने से चार गायों की मौत
Tue, 19 Mar 2019 12:04 AM IST
संतोष भदौरिया
mahoba
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Published by: संतोष भदौरिया
Updated Tue, 19 Mar 2019 12:04 AM IST
सार
कबरई गोशाला में गाय मरने से प्रशासन के हाथ पांव फूले
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कबरई के जोगिन तालाब गौशाला में मौजूद गाय।
- फोटो : amar ujala
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विस्तार
कबरई (महोबा)। एक माह में दूसरी बार गोशाला में गाय मरने से प्रशासन के हाथ पांव फूल गए हैं। गोशाला में उचित प्रबंध न होने पर ग्रामीणों ने पालिका प्रशासन पर नाराजगी जताई है।
रविवार की रात को दाना पानी न मिलने से भूख के चलते चार गायों की मौत हो गई। एक माह के अंदर गोशाला में दूसरी बार गाय मरने से डॉक्टर ने आनन फानन में गायों का पोस्टमार्टम किया।
कबरई नगर पंचायत द्वारा जोगिन तालाब की बगिया में अस्थाई गौशाला का निर्माण किया गया है। जहां 700 से अधिक गाय हैं। इसकी जिम्मेदारी पालिका प्रशासन को सौंपी गई है। रविवार की रात करीब चार गाय मर जाने से ग्रामीणों की भारी भीड़ जमा हो गई। ग्रामीणों ने वहां पहुंचकर हंगामा काटा। गाय मरने की खबर फैलते ही आनन फानन में पशु चिकित्सक को बुलाकर उनका पोस्टमार्टम कराकर दफना दिया गया।
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उपजिलाधिकारी सदर राजेश यादव का कहना है कि वहां गायों की सुरक्षा और खान-पान की पर्याप्त व्यवस्था है। नगर पंचायत को गायों के खान-पान और व्यवस्था के लिए तीन लाख रुपये दिया जा चुका है। उधर अधिशासी अधिकारी उमाकांत सिंह का कहना है कि खान पान की कोई कमी नहीं है। गायों की मौत बीमारी से हुई है। प्रतिदिन दो टैंकर पानी गोशाला में भेजा जाता है और वहां पर्याप्त भूसा है।
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रविवार की रात को दाना पानी न मिलने से भूख के चलते चार गायों की मौत हो गई। एक माह के अंदर गोशाला में दूसरी बार गाय मरने से डॉक्टर ने आनन फानन में गायों का पोस्टमार्टम किया।
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कबरई नगर पंचायत द्वारा जोगिन तालाब की बगिया में अस्थाई गौशाला का निर्माण किया गया है। जहां 700 से अधिक गाय हैं। इसकी जिम्मेदारी पालिका प्रशासन को सौंपी गई है। रविवार की रात करीब चार गाय मर जाने से ग्रामीणों की भारी भीड़ जमा हो गई। ग्रामीणों ने वहां पहुंचकर हंगामा काटा। गाय मरने की खबर फैलते ही आनन फानन में पशु चिकित्सक को बुलाकर उनका पोस्टमार्टम कराकर दफना दिया गया।
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उपजिलाधिकारी सदर राजेश यादव का कहना है कि वहां गायों की सुरक्षा और खान-पान की पर्याप्त व्यवस्था है। नगर पंचायत को गायों के खान-पान और व्यवस्था के लिए तीन लाख रुपये दिया जा चुका है। उधर अधिशासी अधिकारी उमाकांत सिंह का कहना है कि खान पान की कोई कमी नहीं है। गायों की मौत बीमारी से हुई है। प्रतिदिन दो टैंकर पानी गोशाला में भेजा जाता है और वहां पर्याप्त भूसा है।
कबरई गोशाला में गाय मरने से प्रशासन के हाथ पांव फूले