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Mahoba News: एम्स के लिए पहले त्यागे जूते चप्पल, अब अन्न

Sun, 25 Jun 2023 11:44 PM IST
कानपुर ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, महोबा
संवाद न्यूज एजेंसी, महोबा Updated Sun, 25 Jun 2023 11:44 PM IST
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First left shoes and slippers for AIIMS, now food
महोबा। बुंदेलखंड में एम्स खोलने की मांग को लेकर पिछले आठ वर्षों से जूते चप्पल त्यागकर नंगे पैर चल रहे बुंदेली समाज के संयोजक तारा पाटकर ने अब एम्स के लिए अन्न भी त्याग दिया है। उनका कहना है कि जब तक बुंदेलखंड में एम्स नहीं बनेगा, वह न तो जूते चप्पल पहनेंगे और न ही अन्न ग्रहण करेंगे।
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बुंदेली समाज के संयोजक महोबा समेत पूरे बुंदेलखंड की बदहाल स्वास्थ्य सेवाओं के खिलाफ पिछले आठ वर्षों से लगातार संघर्ष कर रहे हैं। आठ मार्च 2015 से प्रधानमंत्री के नाम पोस्टकार्ड भेजो अभियान शुरू किया और एक लाख से अधिक खत प्रधानमंत्री कार्यालय भिजवाए। एक सितंबर 2015 से जूते चप्पल त्याग कर उन्होंने नंगे पैर चलने का संकल्प लिया। इस दौरान आल्हा चौक पर 259 दिन तक अनशन किया। सांसद पुष्पेंद्र सिंह चंदेल ने लोकसभा में एम्स का मुद्दा भी उठाया लेकिन हर जिले में मेडिकल कालेज खोलने का झुनझुना पकड़ा कर मामला ठंडे बस्ते में डाल दिया गया। महोबा, हमीरपुर व चित्रकूट के मेडिकल कालेज अधर में लटक गए।
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सबसे पहले तत्कालीन मुख्यमंत्री मायावती ने इस मुद्दे को उठाया। उस दौरान सांसद विजय बहादुर सिंह ने महोबा में एम्स के लिए मुफ्त जमीन देने की घोषणा की। फिर अखिलेश सरकार ने भी इसका समर्थन किया। विधानसभा चुनाव 2017 के दौरान भाजपा ने अपने संकल्प पत्र में यूपी में छह एम्स व 25 मेडिकल कालेज खोलने का वादा किया लेकिन अभी तक पूरा नहीं हो सका।
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