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फसल बर्बाद: प्रकृति की मार से टूट गया किसान
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पनवाड़ी क्षेत्र में खेतों में बर्बाद पड़ी फसल
- फोटो : MAHOBA
महोबा। जिले में हुई ओलावृष्टि और बारिश ने किसानों की कमर तोड़ दी है। कर्ज लेकर खेतों की बुआई करने वाला किसान एक बार फिर प्रकृति की मार से टूट गया है। जिला प्रशासन भले ही पांच से दस फीसदी फसल के नुकसान का दावा कर रहा है लेकिन किसान 35 से 40 फीसदी नुकसान की बात कह रहा है।
दो दिन पहले हुई ओलावृष्टि के बाद अब धूप निकलने से फसल का दाना झड़कर खेतों में गिर रहा है। किसानों की चिंताएं बढ़ती जा रही हैं। ओलावृष्टि से जमीन में फसल गिरने से उत्पादन में कमी आएगी। खरीफ की फसल अतिवृष्टि के कारण बर्बाद हो गई थी। अब ओलावृष्टि ने किसानों की तबाही की इबारत लिख दी है। हर खेत में नुकसान दिखाई दे रहा है।
ओलावृष्टि और बारिश ने मचाई तबाही : ग्राम पिपरामाफ निवासी ठाकुरदास के पास पांच एकड़ जमीन है। उसने बैंक से केसीसी कार्ड बनवाया है। उसका कहना है कि रबी की फसल पककर तैयार हो चुकी थी। कुछ दिनों बाद कटाई शुरु होनी थी अचानक दो दिन पहले हुई ओलावृष्टि और बारिश ने फसल बर्बाद कर दी। जिला प्रशासन फसल का नुकसान दस फीसदी बता रहा है। शासन से मुआवजे की कोई उम्मीद नहीं है।
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बारिश से काली पड़ गई फसल : ग्राम उरवारा निवासी धरम सिंह के पास दस हेक्टेयर कृषि भूमि है। उसने गेहूं के अलावा चना, राई और मटर की फसल बोई थी, लेकिन ओला गिरने से दलहनी फसलों को ज्यादा नुकसान हुआ है। मटर और मसूर तो काली पड़ गई हैं। खेतों में कटी पड़ी मसूर की फसल पानी में बर्बाद हो गई है। किसान फिर कर्ज अदायगी को लेकर खासा चिंतित है।
कोहरे से फसल पर मंडराने लगा संकट : महोबा। पिछले तीन दिनों से बिगड़े मौसम से किसानों के चेहरों पर चिंता की लकीरें साफ दिखाई दे रही है। खेेतों में खड़ी फसल को पकने के लिए धूप की जरूरत है, लेकिन धूप के बजाय आसमान में बादल छाए रहने और कोहरा पड़ने से फसलों को नुकसान होने के आसार बढ़ गए हैं। रविवार को भी तड़के कोहरा छाया रहा और सारा दिन आसमान में बादल छाए रहे।
पनवाड़ी में ओलावृष्टि से फसल बर्बाद : पनवाड़ी। ओला और बारिश से फसल बर्बाद होने के बाद अधिकारियों द्वारा नुकसान का जायजा लिया जा रहा है। पनवाड़ी के बुड़ेरा, नगारा, नैपुरा, सिमरिया, बड़ेरा, उलदन, निसवारा, मसूदपुरा गांव में फसल का अधिक नुकसान हुआ है। किसान राजेश, मानसिंह, सुरेश हरी सिंह, सुबोध का कहना है कि ओलावृष्टि ने किसानों के लिए नई मुश्किलें पैदा कर दी है। किसान खासा परेशान हैं।
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दो दिन पहले हुई ओलावृष्टि के बाद अब धूप निकलने से फसल का दाना झड़कर खेतों में गिर रहा है। किसानों की चिंताएं बढ़ती जा रही हैं। ओलावृष्टि से जमीन में फसल गिरने से उत्पादन में कमी आएगी। खरीफ की फसल अतिवृष्टि के कारण बर्बाद हो गई थी। अब ओलावृष्टि ने किसानों की तबाही की इबारत लिख दी है। हर खेत में नुकसान दिखाई दे रहा है।
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ओलावृष्टि और बारिश ने मचाई तबाही : ग्राम पिपरामाफ निवासी ठाकुरदास के पास पांच एकड़ जमीन है। उसने बैंक से केसीसी कार्ड बनवाया है। उसका कहना है कि रबी की फसल पककर तैयार हो चुकी थी। कुछ दिनों बाद कटाई शुरु होनी थी अचानक दो दिन पहले हुई ओलावृष्टि और बारिश ने फसल बर्बाद कर दी। जिला प्रशासन फसल का नुकसान दस फीसदी बता रहा है। शासन से मुआवजे की कोई उम्मीद नहीं है।
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बारिश से काली पड़ गई फसल : ग्राम उरवारा निवासी धरम सिंह के पास दस हेक्टेयर कृषि भूमि है। उसने गेहूं के अलावा चना, राई और मटर की फसल बोई थी, लेकिन ओला गिरने से दलहनी फसलों को ज्यादा नुकसान हुआ है। मटर और मसूर तो काली पड़ गई हैं। खेतों में कटी पड़ी मसूर की फसल पानी में बर्बाद हो गई है। किसान फिर कर्ज अदायगी को लेकर खासा चिंतित है।
कोहरे से फसल पर मंडराने लगा संकट : महोबा। पिछले तीन दिनों से बिगड़े मौसम से किसानों के चेहरों पर चिंता की लकीरें साफ दिखाई दे रही है। खेेतों में खड़ी फसल को पकने के लिए धूप की जरूरत है, लेकिन धूप के बजाय आसमान में बादल छाए रहने और कोहरा पड़ने से फसलों को नुकसान होने के आसार बढ़ गए हैं। रविवार को भी तड़के कोहरा छाया रहा और सारा दिन आसमान में बादल छाए रहे।
पनवाड़ी में ओलावृष्टि से फसल बर्बाद : पनवाड़ी। ओला और बारिश से फसल बर्बाद होने के बाद अधिकारियों द्वारा नुकसान का जायजा लिया जा रहा है। पनवाड़ी के बुड़ेरा, नगारा, नैपुरा, सिमरिया, बड़ेरा, उलदन, निसवारा, मसूदपुरा गांव में फसल का अधिक नुकसान हुआ है। किसान राजेश, मानसिंह, सुरेश हरी सिंह, सुबोध का कहना है कि ओलावृष्टि ने किसानों के लिए नई मुश्किलें पैदा कर दी है। किसान खासा परेशान हैं।