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महोबाः जीआईसी में प्रवक्ता न होने से पढ़ाई प्रभावित
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जीआईसी श्रीनगर का भवन।
- फोटो : MAHOBA
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श्रीनगर (महोबा)। कस्बे का एकमात्र राजकीय इंटर कॉलेज भगवान भरोसे चल रहा है। पांच साल से कॉलेज में प्रवक्ताओं के पद खाली हैं। इससे शिक्षण कार्य प्रभावित है। शिक्षक अभिभावक संघ की निधि से निजी शिक्षकों को लगाकर काम चलाया जा रहा है।
जीआईसी श्रीनगर में कस्बा और आसपास के 15 गांवों के छात्र-छात्राएं पढ़ते हैं। हर साल कॉलेज में ढाई हजार से अधिक छात्र-छात्राओं के प्रवेश लिए जाते हैं। कॉलेज में विज्ञान व कला वर्ग के सभी विषयों के प्रवक्ताओं के पद पांच वर्ष से खाली हैं। इससे मजबूरी में अभिभावक अपने बच्चों को जिला मुख्यालय या मध्यप्रदेश के छतरपुर में पढ़ाई के लिए भेजते हैं। प्रधानाचार्य रामदीन सोनी का कहना है कि शिक्षा निदेशक व डीआईओएस को प्रवक्ताओं की कमी पूरी कराने के लिए कई बार पत्राचार किया गया लेकिन नतीजा सिफर रहा। निजी शिक्षकों से काम चलाया जा रहा है। जिला विद्यालय निरीक्षक सुरेश प्रताप सिंह का कहना है कि प्रवक्ताओं की नियुक्ति के लिए शिक्षा निदेशक को पत्र भेजा है।
श्रीनगर के संजय गुप्ता ने कहा कि शासन शिक्षा के नाम पर करोड़ों रुपये खर्च कर रही है, लेकिन प्रवक्ताओं की कमी दूर नहीं की जा रही है। इसका सीधा असर बच्चों की पढ़ाई पर पड़ रहा है। मजबूरी में बच्चों को कोचिंग करानी पड़ती है।
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देवी सिंह ने कहा कि प्रवक्ताओं की कमी से शिक्षण व्यवस्था चरमरा गई है। मजबूूरी में बच्चों को कोचिंग भेजना पड़ता है। यदि कॉलेज में प्रवक्ताओं की कमी दूर हो जाए तो बच्चों को कोचिंग नहीं जाना पड़ेगा।
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जीआईसी श्रीनगर में कस्बा और आसपास के 15 गांवों के छात्र-छात्राएं पढ़ते हैं। हर साल कॉलेज में ढाई हजार से अधिक छात्र-छात्राओं के प्रवेश लिए जाते हैं। कॉलेज में विज्ञान व कला वर्ग के सभी विषयों के प्रवक्ताओं के पद पांच वर्ष से खाली हैं। इससे मजबूरी में अभिभावक अपने बच्चों को जिला मुख्यालय या मध्यप्रदेश के छतरपुर में पढ़ाई के लिए भेजते हैं। प्रधानाचार्य रामदीन सोनी का कहना है कि शिक्षा निदेशक व डीआईओएस को प्रवक्ताओं की कमी पूरी कराने के लिए कई बार पत्राचार किया गया लेकिन नतीजा सिफर रहा। निजी शिक्षकों से काम चलाया जा रहा है। जिला विद्यालय निरीक्षक सुरेश प्रताप सिंह का कहना है कि प्रवक्ताओं की नियुक्ति के लिए शिक्षा निदेशक को पत्र भेजा है।
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श्रीनगर के संजय गुप्ता ने कहा कि शासन शिक्षा के नाम पर करोड़ों रुपये खर्च कर रही है, लेकिन प्रवक्ताओं की कमी दूर नहीं की जा रही है। इसका सीधा असर बच्चों की पढ़ाई पर पड़ रहा है। मजबूरी में बच्चों को कोचिंग करानी पड़ती है।
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देवी सिंह ने कहा कि प्रवक्ताओं की कमी से शिक्षण व्यवस्था चरमरा गई है। मजबूूरी में बच्चों को कोचिंग भेजना पड़ता है। यदि कॉलेज में प्रवक्ताओं की कमी दूर हो जाए तो बच्चों को कोचिंग नहीं जाना पड़ेगा।