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डिलेवरी के नाम पर लूट रहे नर्सिंग होम

Wed, 21 Jan 2015 11:02 PM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, महोबा
ब्यूरो/अमर उजाला, महोबा Updated Wed, 21 Jan 2015 11:02 PM IST
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Delivery robbed in the name of the nursing home
स्वास्थ्य विभाग के आंकड़ों पर नजर डाली जाए तो सारा खेल उजागर हो जाता है। जिले के चारों विकासखंडाें के अस्पतालों में माह अप्रैल 2014 से दिसंबर 2014 के बीच कुल 10,446 प्रसव हुए हैं। जिसमें सरकारी अस्पताल में 179 डिलेवरी ऑपरेशन से हुईं। जबकि प्राइवेट नर्सिंग होम में माह अप्रैल 2014 से दिसंबर 2014 तक 1,276 डिलेवरी हुईं। जिसमें 645 बच्चे ऑपरेशन से पैदा किए गए। प्राइवेट नर्सिंग होम में चल रहे गोरखधंधे का अंदाजा सीजर ऑपरेशन से पैदा हुए बच्चों की संख्या से लगाया जा सकता है। यहां गर्भवती से परिजनाें को जच्चा और बच्चे को खतरा बताकर उन्हें आपरेशन से डिलेवरी कराने के लिए मजबूर कर दिया जाता है और इसके एवज में मोटी रकम भी वसूली जाती है।
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डरे सहमे परिजन आनन फानन में पैसे के इंतजाम में लग जाते हैं। वहीं गरीब वर्ग के लोगों को कर्ज लेकर प्राइवेट नर्सिंग होम की भारी भरकम फीस की अदायगी करनी पड़ती है। डिलेवरी के लिए जिला अस्पताल आने वाली महिलाओं को नर्सिंग होम पहुंचाने में एजेंटों की भी भागीदारी है। ये एजेंट जिला अस्पताल की तमाम कमियां और डिलेवरी में तमाम परेशानियों का भय दिखाकर उनका रुख प्राइवेट नर्सिंग होम की ओर मोड़ देते हैं। जहां ब्लड टेस्ट, अल्ट्रासाउंड, हीमोग्लोबिन और यूरिन सहित तमाम जांचों के जाल में फांसकर गर्भवती के परिजनों को कंगाल करने का सिस्टम शुरू कर दिया जाता है।
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अल्ट्रासाउंड से शुरू होता लूट ऑपरेशन
प्राइवेट नर्सिंग होम में अल्ट्रासाउंड कराने के बाद से ही लूट ऑपरेशन शुरू हो जाता है। दरअसल जिला अस्पताल में अल्ट्रासाउंड की मशीन पिछले चार महीने तक खराब रहने के बाद एक महीने पहले सही कराई गई। इसके बाद ट्रेनिंग देकर अल्ट्रासाउंड मशीन चलाने के लिए लगाए गए कर्मचारी के अवकाश पर चले जाने के कारण तब से अल्ट्रासाउंड कक्ष में ताला लटक रहा है। जिससे जिला अस्पताल में अल्ट्रासाउंड की सुविधा न होने के कारण गर्भवती महिलाओं को अल्ट्रासाउंड के लिए लिखकर पर्ची थमा दी जाती है और मौखिक रूप से नर्सिंग होम का नाम भी बता दिया जाता है। नर्सिंग होम में पहुंचकर अल्ट्रासाउंड कराने के बाद ही महिला की हालत गंभीर बताकर उसे जाल में फांस लिया जाता है। इसके बाद लूट की प्रक्रिया शुरू कर दी जाती है।
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सरकारी अस्पतालाें में सीजर और नार्मल
अप्रैल से दिसंबर तक नार्मल    10,267
अप्रैल से दिसंबर तक सीजर     179

नर्सिंग होम में सीजर और नार्मल
अप्रैल से दिसंबर तक नर्सिंग होम में डिलेवरी   1,276
अप्रैल से दिसंबर तक नार्मल                    631
अप्रैल से दिसंबर तक सीजर                    645
 

सरकारी अस्पतालों में गर्भवती और प्रसूताआें को बेहतर सुविधाएं दी जा रही हैं। स्थिति गंभीर होने पर विशेषज्ञों की मदद से ऑपरेशन द्वारा डिलेवरी कराई जाती है। इसके अलावा जननी सुरक्षा योजना का लाभ भी दिलाया जाता है। जिला अस्पताल में किसी एजेंट के घूमते पाए जाने या किसी प्रकार की शिकायत मिलने पर संबंधित के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जाएगी  
- डॉ. एसके वार्ष्णेय, मुख्य चिकित्सा अधिकारी।
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