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मंदिर की भूमि बेचे जाने का मामला गरमाया, डीएम ने की जांच
Updated Tue, 04 Sep 2018 09:52 PM IST
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चरखारी (महोबा)। कस्बा चरखारी के ऐतिहासिक गोवर्धन नाथ मंदिर की भूमि बिक्री का मामला गरमाता जा रहा है। एक पक्ष द्वारा मंदिर की भूमि खरीदे जाने के बाद लोगों ने आक्रोश जताते हुए जिलाधिकारी से शिकायत की थी। डीएम सहदेव ने मंगलवार को कस्बा चरखारी पहुंच गोवर्धन नाथ मंदिर का निरीक्षण किया और अभिलेखों की जांच के निर्देश दिए।
कस्बा चरखारी के ऐतिहासिक गोवर्धन नाथ मंदिर की स्थापना 1882 में महाराज मलखान सिंह द्वारा कराई गई थी। इस मंदिर के नाम से एक माह तक चरखारी नगर में मेला लगता है। मंदिर के रखरखाव और जीर्णोद्वार के साथ रंगाई-पुताई का काम नगर पालिका देखती है। 28 अगस्त को मंदिर की रंगाई-पुताई का काम चल रहा था। तभी पूर्व सांसद गंगाचरण राजपूत के लोगों ने मंदिर की भूमि पर अपना कब्जा बताया। जिस पर एसडीएम अरुण कुमार श्रीवास्तव ने काम रोकने के आदेश दिए, जिसमें विवाद की स्थिति उत्पन्न होने पर नगर पालिका चेयरमैन मूलचंद खड़े होकर कार्य कराया और मामले की शिकायत जिलाधिकारी से की थी।
मंगलवार को जिलाधिकारी ने गोवर्धननाथ मंदिर पहुंच निरीक्षण किया। उन्होंने मंदिर की जमीन व रकबा से संबंधित प्रपत्र देखे। साथ ही मंदिर के संबंध में पालिका चेयरमैन, पूर्व चेयरमैन अरविंद सिंह चौहान व अन्य लोगों से जानकारी ली। डीएम ने पूर्व सांसद गंगा चरण राजपूत के आवास पर जाकर उनसे भी मंदिर से संबंधित कागजों के प्रपत्र देखें। डीएम ने एसडीएम अरूण कुमार श्रीवास्तव से बंदोबस्त व कागजों का अवलोकन कर नाप कराने के निर्देश दिए। कहा कि जांच के बाद आगे की कार्रवाई की जाएगी। पूर्व सांसद गंगाचरण राजपूत का कहना है कि हमने कोई मंदिर नहीं खरीदा। मंदिर क्षेत्र के भवनों में लगे लकड़ी के दरवाजे निकाल लिए गए और लोहे के लगवाए। जिस पर उन्होंने लकड़ी के ही दरवाजे लगाए जाने की बात कही। उनका कहना है कि हमने 13 बीघा एक बिस्वा जमीन महारानी चरखारी से खरीदी हैै। खंडहर इमारतों को वह संरक्षित कर रहें है। तो इसमें लोग राजनीति कर रहे हैं।
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मंदिर की भूमि बेचे जाने का मामला गरमाया, डीएम ने की जांच
- एसडीएम को प्रपत्रों की जांच कर नाप कराने के दिए निर्देश
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कस्बा चरखारी के ऐतिहासिक गोवर्धन नाथ मंदिर की स्थापना 1882 में महाराज मलखान सिंह द्वारा कराई गई थी। इस मंदिर के नाम से एक माह तक चरखारी नगर में मेला लगता है। मंदिर के रखरखाव और जीर्णोद्वार के साथ रंगाई-पुताई का काम नगर पालिका देखती है। 28 अगस्त को मंदिर की रंगाई-पुताई का काम चल रहा था। तभी पूर्व सांसद गंगाचरण राजपूत के लोगों ने मंदिर की भूमि पर अपना कब्जा बताया। जिस पर एसडीएम अरुण कुमार श्रीवास्तव ने काम रोकने के आदेश दिए, जिसमें विवाद की स्थिति उत्पन्न होने पर नगर पालिका चेयरमैन मूलचंद खड़े होकर कार्य कराया और मामले की शिकायत जिलाधिकारी से की थी।
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मंगलवार को जिलाधिकारी ने गोवर्धननाथ मंदिर पहुंच निरीक्षण किया। उन्होंने मंदिर की जमीन व रकबा से संबंधित प्रपत्र देखे। साथ ही मंदिर के संबंध में पालिका चेयरमैन, पूर्व चेयरमैन अरविंद सिंह चौहान व अन्य लोगों से जानकारी ली। डीएम ने पूर्व सांसद गंगा चरण राजपूत के आवास पर जाकर उनसे भी मंदिर से संबंधित कागजों के प्रपत्र देखें। डीएम ने एसडीएम अरूण कुमार श्रीवास्तव से बंदोबस्त व कागजों का अवलोकन कर नाप कराने के निर्देश दिए। कहा कि जांच के बाद आगे की कार्रवाई की जाएगी। पूर्व सांसद गंगाचरण राजपूत का कहना है कि हमने कोई मंदिर नहीं खरीदा। मंदिर क्षेत्र के भवनों में लगे लकड़ी के दरवाजे निकाल लिए गए और लोहे के लगवाए। जिस पर उन्होंने लकड़ी के ही दरवाजे लगाए जाने की बात कही। उनका कहना है कि हमने 13 बीघा एक बिस्वा जमीन महारानी चरखारी से खरीदी हैै। खंडहर इमारतों को वह संरक्षित कर रहें है। तो इसमें लोग राजनीति कर रहे हैं।
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मंदिर की भूमि बेचे जाने का मामला गरमाया, डीएम ने की जांच
- एसडीएम को प्रपत्रों की जांच कर नाप कराने के दिए निर्देश