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मियाद गंवा चुकी बसें भर रहीं फर्राटा
अमर उजाला ब्यूरो महोबा
Updated Mon, 27 Apr 2015 11:30 PM IST
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जिले की रोडवेज बसों का बुरा हाल है। हालत यह है कि मियाद गंवा चुकीं बसाें को भी महकमा सड़काें पर दौड़ा रहा है। जिससे बसों के हीट होने से कभी वापस बुलाना पड़ता है तो कभी बसे रास्ते में ही खड़ी हो जाती है। इसका खामियाजा यात्रियाें को भुगतना पड़ रहा है।
मालूम हो कि रोडवेज में 90 बसाें का बेड़ा है। जिसमें से 80 बसाें से ज्यादा नियमित विभिन्न मार्गों पर चलती हैं। इनमें से कई बसें गंतव्य स्थान तक पहुंचने से पहले ही अक्सर रास्ते में ही खड़ी हो जाती हैं। भीषण गर्मी में बसाें के खराब होने पर यात्रियाें को खासी मशक्कत करनी पड़ती है। तमाम बसाें में शीशे और हार्न तक नहीं हैं। जिससे गर्मी के दिनाें में लू के थपेडे़ और सर्दी के दिनाें में ठंडी हवाआें के बीच यात्रियाें को मजबूरन यात्रा करनी पड़ती है। कुछ बसाें में तो सीटाें में कील, पत्तियां निकली होने से यात्रियाें के कपड़े तक फट जाते हैं। सुबह 4:30 बजे महोबा से लखनऊ जाने वाली बस का सबसे बुरा हाल है। लोग तड़के सुबह नींद पूरी न करके समय से लखनऊ पहुंचने के लिए चार बजे रोडवेज पहुंचकर साढ़े चार बजे वाली बस से सफर करते हैं। सोमवार को भी यात्री साढ़े चार बजे वाली बस में जल्दी लखनऊ पहुंचने के चक्कर में बस में बैठ गए। लेकिन बस जिला मुख्यालय से करीब 28 किलोमीटर का सफर तय करने के बाद ग्राम खन्ना के पास तेजी से हीट होने लगी। बस की हीटिंग बढ़ती देख कोई भी घटना न घट सके, इससे चालक बस को वापस महोबा ले आया। यही बस शनिवार को लखनऊ पहुंचने से पहले कानपुर में हीट होने लगी थी। जिससे यात्रियों को कानपुर में उतारकर बस को वापस महोबा लाना पड़ा था।
सीटाें की नहीं होती सफाई
रोडवेज डिपो से सुबह चार बजे से लेकर छह बजे तक निकलने वाली बसाें की सफाई नहीं कराई जाती। जिससे सीटाें में धूल जमी होने से साफ सुथरे कपड़े पहनकर जाने वाले यात्रियाें के कपड़े सीट में बैठते ही खराब हो जाते हैं। महोबा से बैठने वाले यात्रियाें के कपड़े तो बैठने और सीटाें में टिकने से खराब हो जाते हैं लेकिन सीटें साफ हो जाती हैं। जिससे अगले स्टेशन पर बस में बैठने वाले लोगाें को साफ सुथरी सीटें मिलती हैं।
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सीएम का आदेश भी दरकिनार
सूबे के मुख्यमंत्री अखिलेश यादव ने पांच लाख किलोमीटर की यात्रा पूरी कर चुकीं बसाें को मार्गों पर दौड़ाने पर रोक लगा दी है। जबकि रोडवेज महोबा में कई बसें मियाद पूरी होने के बाद भी धड़ल्ले से चल रही हैं। यहां के अधिकारियाें पर सीएम के आदेश का कोई असर नहीं हो रहा है। एक सप्ताह पहले अमेठी के संसारीपुर गांव के पास रोडवेज बस में आग लगने के बाद भी महकमे ने कोई सबक नहीं लिया।
वर्कशाप से बसें चेक कराकर सही हालत में निकाली जाती हैं। बस हीट होने की समस्या अभी तक नहीं आई है। लेकिन फिर भी बस को चेक करा लिया जाएगा। मियाद के अंदर वाली बसें ही गंतव्य स्थानाें पर भेजी जाती हैं। कभी कभार तकनीकी खराबी के चलते बस खराब हो जाती है।
- एसएन शर्मा, एआरएम महोबा डिपो।
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मालूम हो कि रोडवेज में 90 बसाें का बेड़ा है। जिसमें से 80 बसाें से ज्यादा नियमित विभिन्न मार्गों पर चलती हैं। इनमें से कई बसें गंतव्य स्थान तक पहुंचने से पहले ही अक्सर रास्ते में ही खड़ी हो जाती हैं। भीषण गर्मी में बसाें के खराब होने पर यात्रियाें को खासी मशक्कत करनी पड़ती है। तमाम बसाें में शीशे और हार्न तक नहीं हैं। जिससे गर्मी के दिनाें में लू के थपेडे़ और सर्दी के दिनाें में ठंडी हवाआें के बीच यात्रियाें को मजबूरन यात्रा करनी पड़ती है। कुछ बसाें में तो सीटाें में कील, पत्तियां निकली होने से यात्रियाें के कपड़े तक फट जाते हैं। सुबह 4:30 बजे महोबा से लखनऊ जाने वाली बस का सबसे बुरा हाल है। लोग तड़के सुबह नींद पूरी न करके समय से लखनऊ पहुंचने के लिए चार बजे रोडवेज पहुंचकर साढ़े चार बजे वाली बस से सफर करते हैं। सोमवार को भी यात्री साढ़े चार बजे वाली बस में जल्दी लखनऊ पहुंचने के चक्कर में बस में बैठ गए। लेकिन बस जिला मुख्यालय से करीब 28 किलोमीटर का सफर तय करने के बाद ग्राम खन्ना के पास तेजी से हीट होने लगी। बस की हीटिंग बढ़ती देख कोई भी घटना न घट सके, इससे चालक बस को वापस महोबा ले आया। यही बस शनिवार को लखनऊ पहुंचने से पहले कानपुर में हीट होने लगी थी। जिससे यात्रियों को कानपुर में उतारकर बस को वापस महोबा लाना पड़ा था।
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सीटाें की नहीं होती सफाई
रोडवेज डिपो से सुबह चार बजे से लेकर छह बजे तक निकलने वाली बसाें की सफाई नहीं कराई जाती। जिससे सीटाें में धूल जमी होने से साफ सुथरे कपड़े पहनकर जाने वाले यात्रियाें के कपड़े सीट में बैठते ही खराब हो जाते हैं। महोबा से बैठने वाले यात्रियाें के कपड़े तो बैठने और सीटाें में टिकने से खराब हो जाते हैं लेकिन सीटें साफ हो जाती हैं। जिससे अगले स्टेशन पर बस में बैठने वाले लोगाें को साफ सुथरी सीटें मिलती हैं।
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सीएम का आदेश भी दरकिनार
सूबे के मुख्यमंत्री अखिलेश यादव ने पांच लाख किलोमीटर की यात्रा पूरी कर चुकीं बसाें को मार्गों पर दौड़ाने पर रोक लगा दी है। जबकि रोडवेज महोबा में कई बसें मियाद पूरी होने के बाद भी धड़ल्ले से चल रही हैं। यहां के अधिकारियाें पर सीएम के आदेश का कोई असर नहीं हो रहा है। एक सप्ताह पहले अमेठी के संसारीपुर गांव के पास रोडवेज बस में आग लगने के बाद भी महकमे ने कोई सबक नहीं लिया।
वर्कशाप से बसें चेक कराकर सही हालत में निकाली जाती हैं। बस हीट होने की समस्या अभी तक नहीं आई है। लेकिन फिर भी बस को चेक करा लिया जाएगा। मियाद के अंदर वाली बसें ही गंतव्य स्थानाें पर भेजी जाती हैं। कभी कभार तकनीकी खराबी के चलते बस खराब हो जाती है।
- एसएन शर्मा, एआरएम महोबा डिपो।