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टीबी को मात देकर बनें चैंपियन, अब निभा रहे दूसरों का साथ

Wed, 23 Mar 2022 11:21 PM IST
Kanpur	 Bureau कानपुर ब्यूरो
Updated Wed, 23 Mar 2022 11:21 PM IST
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Become a champion by defeating TB, now supporting others
महोबा। सांस लेने में काफी दिक्कत और अक्सर बुखार भी रहता था। झांसी मेडिकल कालेज में जांच कराई। जहां टीबी होने का पता चला। वहां से डॉक्टर ने महोबा रेफर कर दिया, जहां पर पूरा इलाज कराया और एक भी दिन दवा लेना नहीं छोड़ा। आज वह पूरी तरह स्वस्थ हैं। स्वास्थ्य विभाग ने अब उसे टीबी चैंपियन बना दिया है। वह गांव में लोगों को जानकारी दे रहे हैं। अब तक 23 लोगों को टीबी के इलाज में सहयोग कर चुके हैं।
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कुलपहाड़ निवासी 25 वर्षीय मोहित (परिवर्तित नाम) बताते हैं कि वर्ष 2019 में उन्हें टीबी हो गया था। लॉकडाउन की वजह से घर से निकलने की हिम्मत नहीं पड़ती थी, लेकिन गांव की आशा दीदी के साथ वह सीएचसी तक गए। वहां डाक्टर ने उन्हें गोलियां देते हुए खाने-पीने का परहेज भी बताया। डाक्टर की सलाह पर उन्होंने दवा का सेवन शुरू कर दिया। नियमित इलाज कराकर रोग को मात दी।
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मोहित का कहना है कि सक्रिय क्षय रोगी खोज अभियान (एसीएफ) में विभाग का सहयोग करते हैं। वह अब लोगों को बता रहे हैं कि रोग को छिपाएं नहीं, जांच कराकर दवा का कोर्स पूरा करें। टीबी का इलाज बीच में नहीं छोड़ना चाहिए। ऐसा करने से बीमारी की जटिलताएं बढ़ जाती हैं।
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एमडीआर बच्चे का कराया सफल इलाज
टीबी चौम्पियन मोहित का कहना है कि उनके गांव के 10 वर्ष के बच्चे में टीबी के लक्षण थे। वह दिल्ली से आया था। जांच कराने पर मालूम हुआ कि वह मल्टी ड्रग रेजिस्टेंट टीबी (एमडीआर) ग्रसित है। इसके बाद उन्होंने बच्चे का नियमित कोर्स पूरा कराया। अब वह पूरी तरह स्वस्थ है तथा पढ़ाई कर रहा है। उसका पूरा परिवार सुरक्षित है। उनका कहना है कि समय रहते अगर टीबी की पहचान हो जाए तो रोग पर आसानी से काबू पाया जा सकता है।

निशुल्क है जांच व इलाज
क्षय उन्मूलन कार्यक्रम के जिला समन्वयक नरेंद्र कुमार सिंह का कहना है कि टीबी क्लीनिक सहित 14 सीएचसी -पीएचसी पर टीबी की जांच निशुल्क है। टीबी क्लीनिक व सभी ब्लॉक स्तरीय अस्पताल में दवा उपलब्ध है।
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