फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Uttar Pradesh ›   Mahoba News ›   Bansasur losing existence door

अस्तित्व खोता जा रहा भैंसासुर दरवाजा

Fri, 19 Dec 2014 01:00 AM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, महोबा
ब्यूरो/अमर उजाला, महोबा Updated Fri, 19 Dec 2014 01:00 AM IST
विज्ञापन
Bansasur losing existence door

पुरातत्व विभाग की उदासीनता के चलते चंदेल कालीन ऐतिहासिक भैंसासुर दरवाजा खंडहर होता जा रहा है। देखरेख के अभाव में दरवाजे के ऊपर घास व झाड़ फानूस उगता जा रहा है। इस ऐतिहासिक दरवाजे का वजूद भी खत्म हो रहा है।

विज्ञापन


प्रथम चंदेल नरेश नन्नुक ने मदन सागर के किनारे भव्य किले का निर्माण कराया था। यह दुर्ग एक पहाड़ी पर 1625 वर्ग मीटर क्षेत्रफल में फैला था। प्रथम नरेश से लेकर राजा परमाल तक इस किले को सजाने संवारने का कार्य चलता रहा। किले के चाराें तरफ ऊंची-ऊंची दीवारें बनी थीं।

विज्ञापन

इसके अलावा शहर में अनेक बारादरी, गुप्त मार्ग भी बनाए गए थे। तेरहवें चंदेल नरेश कीर्तिवर्मन ने किले के प्रांगण में 310 खंभाें पर एक मनमोहक शिव मंदिर का निर्माण कराया। कुतुबउद्दीन एबक द्वारा किए गए हमले में किले का एक हिस्सा बुरी तरह क्षतिग्रस्त हो गया।

विज्ञापन
विज्ञापन


किले में आबाद विशिष्ट वर्ग और सैन्य तबके को भरण पोषण और आवश्यक जरूरतें मुहैया कराने के लिए किले के आसपास बस्तियां विकसित हो गई थीं। ऐसी ही एक बस्ती धलैतनपुरा आज भी आबाद है।

किले को जलापूर्ति नदी से की जाती थी, जिसे कलांतर में मदन वर्मन ने बंधान बनाकर मदन सागर का रूप दे दिया था। इतिहासकार शिवकुमार गोस्वामी ने बताया कि किले के सात द्वार इसकी भव्यता का आभास कराते थे जिसमें से अब सिर्फ एक भैंसासुर द्वार बचा है, जबकि अन्य द्वार जमींदोज हो गए हैं।


किले से 400 मीटर दूरी पर रायकोट विद्यमान है, जहां चंदेलाें का राजकोष सुरक्षित था और यही परमाल के पुत्र ब्रह्मा का महल भी था। धीरे-धीरे महल और चंदेल राजाओं का किला भी जमींदोज हो गया। रायकोट तक का संपर्क गुप्त मार्गों द्वारा था।


 किले के ऊपर राजा परमाल के भव्य महल की एक स्पष्ट झलक खंडहरनुमा दिखाई पड़ती थी, जिसे पृथ्वीराज चौहान ने क्षतिग्रस्त किया था। भैंसासुर द्वार के पास ही शाही मस्जिद को वीर वर्मन द्वितीय के कार्यकाल में दिल्ली सुल्तान मोहम्मद तुगलक के सेनापति मलिक ताजउद्दीन अहमद ने निर्मित कराया था।


मस्जिद में एक फारसी लेख है, जो यह प्रमाण देता है कि मस्जिद तामीर की गई है। पुरातत्व विभाग की अनदेखी के चलते ऐतिहासिक धरोहरें खत्म होती जा रही हैं।

विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed