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500 बीघा गन्ने की फसल जलकर राख
अमर उजाला ब्यूरो, महोबा
Updated Sat, 23 Apr 2016 11:20 PM IST
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आग से राख हुई गन्ने की फसल।
- फोटो : अमर उजाला
विकास खंड जैतपुर के ग्राम मगरौलकलां के मोटाहार में 50 किसानाें के गन्ने के खेताें में आग लग जाने से एक करोड़ रुपये की फसल जलकर राख हो गई। भीषण अग्निकांड के चलते किसानों के सामने रोजी रोटी का संकट पैदा हो गया है। किसानाें की मशक्कत के बाद भी आग पर काबू न होने से फायर ब्रिगेड की दो गाड़ियों ने छह घंटे में आग बुझाई, लेकिन तब तक फसल जल चुकी थी।
ग्राम मगरौल कलां निवासी गनेश और करन के गन्ने के खेताें में शनिवार आग लग गई। आग लगते ही किसान खेतों की तरफ दौड़ पड़े। सभी किसान एकजुट होकर हैंडपंपों, कुआें से पानी लाकर आग बुझाने में जुटे, लेकिन हवा के झोंकों ने आग में घी डालने का काम किया। हवा के चलते आग की लपटाें ने आसपास के आधा सैकड़ा किसानाें के खेताें को अपनी चपेट में लिया। जिससे आग ने उग्र रूप धारण कर लिया।
चारों तरफ से निकल रही आग की लपटों के सामने किसान साहस नहीं जुटा सके। ग्रामीणों की सूचना पर मौके पर पहुंची फायर ब्रिगेड की गाड़ी भी आग पर काबू नहीं कर सकी। जिससे दूसरी दमकल गाड़ी बुलानी पड़ी। दो दमकल गाड़ियाें ने छह घंटे की मशक्कत के बाद आग पर काबू पाया। जिससे गांव की तरफ बढ़ रही आग को दमकल जवानाें ने रोक दिया, लेकिन किसानाें की फसल नहीं बचा सके।
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पुष्पेंद्र, मनोहर, आत्माराम, मलखान, गनेश, करन, लल्लू, सुरेंद्र सिंह, देवी सिंह, विजय बहादुर, फूलसिंह, चुन्नू, श्रीपत, भानुप्रताप, रामफल सहित आधा सैकड़ा किसानाें की फसल तैयार खड़ी थी जो आग की भेंट चढ़ गई।
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ग्राम मगरौल कलां निवासी गनेश और करन के गन्ने के खेताें में शनिवार आग लग गई। आग लगते ही किसान खेतों की तरफ दौड़ पड़े। सभी किसान एकजुट होकर हैंडपंपों, कुआें से पानी लाकर आग बुझाने में जुटे, लेकिन हवा के झोंकों ने आग में घी डालने का काम किया। हवा के चलते आग की लपटाें ने आसपास के आधा सैकड़ा किसानाें के खेताें को अपनी चपेट में लिया। जिससे आग ने उग्र रूप धारण कर लिया।
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चारों तरफ से निकल रही आग की लपटों के सामने किसान साहस नहीं जुटा सके। ग्रामीणों की सूचना पर मौके पर पहुंची फायर ब्रिगेड की गाड़ी भी आग पर काबू नहीं कर सकी। जिससे दूसरी दमकल गाड़ी बुलानी पड़ी। दो दमकल गाड़ियाें ने छह घंटे की मशक्कत के बाद आग पर काबू पाया। जिससे गांव की तरफ बढ़ रही आग को दमकल जवानाें ने रोक दिया, लेकिन किसानाें की फसल नहीं बचा सके।
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पुष्पेंद्र, मनोहर, आत्माराम, मलखान, गनेश, करन, लल्लू, सुरेंद्र सिंह, देवी सिंह, विजय बहादुर, फूलसिंह, चुन्नू, श्रीपत, भानुप्रताप, रामफल सहित आधा सैकड़ा किसानाें की फसल तैयार खड़ी थी जो आग की भेंट चढ़ गई।