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38 श्रेष्ठ कलाकारों को किया गया सम्मानित
अमर उजाला ब्यूरो महोबा।
Updated Fri, 11 Dec 2015 11:45 PM IST
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प्रसिद्ध बुंदेली लोक विधा नौटंकी कला और साहित्यकार स्व. नाथूराम विश्वकर्मा की पुण्य स्मृति समारोह में स्वर और साज से शाम सजी। कानपुर, झांसी और हमीरपुर के कलाकारों साहित्यकारों और कीर्तन कलाकारों ने संगीतमय श्रद्धांजलि अर्पित की। मुख्य अतिथि ने 38 श्रेष्ठ कलाकारों को शाल और प्रमाण पत्र देकर सम्मानित किया।
नगर खरेला में बुंदेली लोक विधा नौटंकी, कीर्तन कला और साहित्य क्षेत्र में अग्रणी रहे स्व. नाथूराम विश्वकर्मा की पांचवीं पुण्य स्मृति समारोह मनाया गया। मुख्य अतिथि पूर्व श्रम मंत्री बादशाह सिंह, हमीरपुर सपा विश्वकर्मा महासभा के जिलाध्यक्ष श्यामदास विश्वकर्मा एवं कीर्तनकार लालचंद्र दीक्षित ने उनके चित्र पर फूल माला चढ़ाकर दीप जलाकर परंपरागत तरीके से कार्यक्रम की शुरुआत कराई।
विभिन्न विधा के निपुण कलाकारों ने दिवंगत कलाकार को संयुक्त रूप से वंदना और राष्ट्रगीत प्रस्तुत कर श्रद्धांजलि अर्पित की। कानपुर के भजन गायक विनय शर्मा ने सुंदर गीत सुनाकर दर्शकों को भाव विभोर कर दिया। गायक शिव सिंह, भारतेंदु सचान, बाबा रमाशंकर जख्मी ने गजल फिर छिड़ी रात बात फूलों की सुनाकर श्रोताओं को झूमने पर मजबूर कर दिया।
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नौटंकी कलाकारों ने एक फूल दो माली कथानक का शानदार तरीके से मंचन किया। समारोह में अलरा के द्वारका प्रसाद, गोरेलाल प्रजापति, घनश्याम वर्मा, हरगोविंद, जानकीप्रसाद नकरा, लाखन सिंह दिल्ली, संतराम इटायल, मोहन अलीपुरा, मानसिंह खरेला, सुखराम बबेड़ी, सराफत झांसी, बालकिशन, दुलारे चंडौत, रामाधार, उदयभान वर्मा, सुरेश भारती किल्हौवा सहित 38 कलाकारों को मुख्य अतिथि ने शाल उढ़ाकर प्रशस्ती पत्र से सम्मानित किया। कार्यक्रम आयोजक मौदहा बीडीओ श्याम सुंदर विश्वकर्मा, राम सुंदर और अजय कुमार विश्वकर्मा ने आंगतुक अतिथियों और कलाकारों आभार जताया।
पूर्व श्रममंत्री ने बताई अद्वितीय कला की मिशाल
स्व. नाथूराम विश्वकर्मा के पुण्य स्मृति समारोह कार्यक्रम में पूर्व मंत्री बादशाह सिंह ने दिवंगत कलाकार को अद्वितीय कला कौशलता की मिशाल बताया। उन्होंने कहा कि लेखन, गायन और वादन की निपुणता बेजोड़ थी। उनकी काबलियत को भुलाया नही जा सकता। स्मरण करते हुए कहा कि 40 वर्ष पहले इन्हीं के द्वारा रचित नाटक पृथ्वीराज की आंखें ऐतिहासिक कथानक का सजीव चित्रण की झलक टीवी सीरियल में देखने को मिली है।
उपेक्षा का दर्द कलाकारों में झलका
खरेला में आयोजित पुण्य स्मृति समारोह में शिरकत करने आए कलाकारों और साहित्यकारों में सरकारी उपेक्षा का दर्द झलका। 72 वर्षीय द्वारका प्रसाद, 60 वर्ष के संतराम और 50 वर्षीय कलाकार बाबा रमाशंकर, हरगोविंद मसगाव और 70 वर्षीय आत्म प्रकाश विश्वकर्मा ने कहा कि जीवन भर मंच में अभिनय कर कला कौशलता से दर्शकों का मनोरंजन कराया। कला प्रदर्शन से जिंदगी के अंतिम पड़ाव के लिए कोई सहारा नही मिलता। कलाकारों को पेंशन सुविधा की मांग रखते हुए उन्होंने कहा कि जिले स्तर पर बुंदेलखंड में विभिन्न विधाओं से जुड़े सैकड़ों कलाकार गांव में उपेक्षा से बदहाली का जीवन बिता रहे है।
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नगर खरेला में बुंदेली लोक विधा नौटंकी, कीर्तन कला और साहित्य क्षेत्र में अग्रणी रहे स्व. नाथूराम विश्वकर्मा की पांचवीं पुण्य स्मृति समारोह मनाया गया। मुख्य अतिथि पूर्व श्रम मंत्री बादशाह सिंह, हमीरपुर सपा विश्वकर्मा महासभा के जिलाध्यक्ष श्यामदास विश्वकर्मा एवं कीर्तनकार लालचंद्र दीक्षित ने उनके चित्र पर फूल माला चढ़ाकर दीप जलाकर परंपरागत तरीके से कार्यक्रम की शुरुआत कराई।
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विभिन्न विधा के निपुण कलाकारों ने दिवंगत कलाकार को संयुक्त रूप से वंदना और राष्ट्रगीत प्रस्तुत कर श्रद्धांजलि अर्पित की। कानपुर के भजन गायक विनय शर्मा ने सुंदर गीत सुनाकर दर्शकों को भाव विभोर कर दिया। गायक शिव सिंह, भारतेंदु सचान, बाबा रमाशंकर जख्मी ने गजल फिर छिड़ी रात बात फूलों की सुनाकर श्रोताओं को झूमने पर मजबूर कर दिया।
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नौटंकी कलाकारों ने एक फूल दो माली कथानक का शानदार तरीके से मंचन किया। समारोह में अलरा के द्वारका प्रसाद, गोरेलाल प्रजापति, घनश्याम वर्मा, हरगोविंद, जानकीप्रसाद नकरा, लाखन सिंह दिल्ली, संतराम इटायल, मोहन अलीपुरा, मानसिंह खरेला, सुखराम बबेड़ी, सराफत झांसी, बालकिशन, दुलारे चंडौत, रामाधार, उदयभान वर्मा, सुरेश भारती किल्हौवा सहित 38 कलाकारों को मुख्य अतिथि ने शाल उढ़ाकर प्रशस्ती पत्र से सम्मानित किया। कार्यक्रम आयोजक मौदहा बीडीओ श्याम सुंदर विश्वकर्मा, राम सुंदर और अजय कुमार विश्वकर्मा ने आंगतुक अतिथियों और कलाकारों आभार जताया।
पूर्व श्रममंत्री ने बताई अद्वितीय कला की मिशाल
स्व. नाथूराम विश्वकर्मा के पुण्य स्मृति समारोह कार्यक्रम में पूर्व मंत्री बादशाह सिंह ने दिवंगत कलाकार को अद्वितीय कला कौशलता की मिशाल बताया। उन्होंने कहा कि लेखन, गायन और वादन की निपुणता बेजोड़ थी। उनकी काबलियत को भुलाया नही जा सकता। स्मरण करते हुए कहा कि 40 वर्ष पहले इन्हीं के द्वारा रचित नाटक पृथ्वीराज की आंखें ऐतिहासिक कथानक का सजीव चित्रण की झलक टीवी सीरियल में देखने को मिली है।
उपेक्षा का दर्द कलाकारों में झलका
खरेला में आयोजित पुण्य स्मृति समारोह में शिरकत करने आए कलाकारों और साहित्यकारों में सरकारी उपेक्षा का दर्द झलका। 72 वर्षीय द्वारका प्रसाद, 60 वर्ष के संतराम और 50 वर्षीय कलाकार बाबा रमाशंकर, हरगोविंद मसगाव और 70 वर्षीय आत्म प्रकाश विश्वकर्मा ने कहा कि जीवन भर मंच में अभिनय कर कला कौशलता से दर्शकों का मनोरंजन कराया। कला प्रदर्शन से जिंदगी के अंतिम पड़ाव के लिए कोई सहारा नही मिलता। कलाकारों को पेंशन सुविधा की मांग रखते हुए उन्होंने कहा कि जिले स्तर पर बुंदेलखंड में विभिन्न विधाओं से जुड़े सैकड़ों कलाकार गांव में उपेक्षा से बदहाली का जीवन बिता रहे है।