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तालाबों में इमारते बनने से तेजी से घट रही जल भंडारण क्षमता

Fri, 12 Oct 2018 10:12 PM IST
Updated Fri, 12 Oct 2018 10:12 PM IST
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तालाबों में इमारते बनने से तेजी से घट रही जल भंडारण क्षमता

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महोबा। सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बाद भी तालाबों से अवैध कब्जे नहीं हटाए जा रहे है, जिससे धीरे-धीरे तालाबों में इमारते बन जाने से उनकी जल-भंडारण क्षमता तेेजी से घट रही है। तालाबों का क्षेत्रफल घटता जा रहा है। इसके बाद भी प्रशासनिक अधिकारी कोई ध्यान नहीं दे रहे हैं।
चंदेल शासकों द्वारा बनवाए गए मदन सागर, कीरत सागर और कल्याण सागर सरोवर बस्ती के करीब होने के कारण तालाबों पर धड़ल्ले से अवैध कब्जे हो रहे हैं। इन तालाबों में बिना रजिस्टर्ड बैनामा कराए दर्जनों लोगों ने अवैध कब्जे करके इमारतें खड़ी कर दी है। इतना ही नहीं अभी भी तालाबों में अवैध कब्जे होते जा रहे हैं। राजस्व विभाग के कर्मचारियों की मिली-भगत से तालाबों का क्षेत्रफल तेजी से घट रहा है। शिकायतों के बाद भी अधिकारियों द्वारा कोई कार्रवाई नहीं की गई है।
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गौरतलब है कि दो साल पहले जिला प्रशासन द्वारा अभियान चलाकर कीरत सागर सरोवर की नापतौल कराकर अवैध कब्जे हटाने के निर्देश दिए थे। अभियान में राजस्व विभाग के अधिकारियों के साथ-साथ सिंचाई विभाग के अधिकारियों द्वारा तालाबों की भूमि पर बने अस्थाई मकानों व फाउंडेशन को हटवा दिया गया था लेकिन पूर्व अधिकारियों के जाते ही तालाबों पर पुन: अवैध कब्जे शुरू हो गए।
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कहां गई एंटी भू-माफिया टीम
महोबा। सूबे में भाजपा की सत्ता आने पर शासन के आदेश पर जिले में एंटी भू-माफिया टीम का गठन किया गया लेकिन टीम द्वारा आजतक अभियान चलाकर किसी भी तरह के अवैध कब्जे नहीं हटाए गए। एंटी भू-माफिया टीम को अवैध कब्जों की शिकायतें मिलने के बाद भी टीम ने कोई कार्रवाई नहीं की, जिससे भू-माफियाओं के हौंसले बुलंद है और जिले में अवैध तरीके से कब्जे हो रहे हैं। वही एंटी भू-माफिया टीम शांत बैठी है।
बारिश में टापू बन जाते हैं तालाब में बने मकान
महोबा। तालाबों की जमीन में मकान बना लिए जाने से बारिश के मौसम मेें लोगों के मकान टापू बन जाते हैं। मकानों के चारों तरफ तालाब का पानी भर जाने से घरों में आना-जाना बंद हो जाता है। ऐसी स्थिति में लोग नाव से घर आते-जाते हैं। नाव न मिलने पर घंटों घरों में कैद रहते हैं। बारिश के दो माह तक यहां के बाशिंदें घर आने-जाने के लिए नाव का सहारा लिया करते हैं। मकानों के चारों तरफ पानी भर जाने से तालाब से आने वाले कीड़े-मकोड़े घुस जाते हैं।
ढिलाई के चलते हो रहे अवैध कब्जे

मदन सागर समेत कई तालाब चंदेल राजाओं ने पहाड़ों के बीच बनाए थे, जिससे बारिश के पानी से तालाब भर सके। यदि प्रशासन राजस्व विभाग के अधिकारियों ओर कर्मचारियों से जांच कराए तो बड़े पैमाने पर अवैध कब्जा-धारक तालाबों की जमीन पर इमारते बनाए मिलेंगे। प्रशासन की ढिलाई के चलते तालाबों में अवैध कब्जे हो रहे हैं।
तालाबों को बचाने के लिए प्रशासन उठाए सख्त कदम
तालाबों के किनारे अवैध निर्माण होने से तालाबों का पानी भी प्रदूषित हो रहा है। तालाबों को बचाने के लिए प्रशासन को सख्त कदम उठाना होना। साथ ही अवैध कब्जा-धारकों के खिलाफ कार्रवाई होनी चाहिए। तभी इस पर रोक लग सकेगी। चंदेलकालीन सरोवर जलस्तर मेनटेन रखने के साथ-साथ पानी की समस्या से भी निजात दिला रहे हैं। इनकी सुरक्षा जरूरी है।

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तालाबों की जमीन अवैध कब्जे हटाने के लिए समय-समय पर अभियान चलता है। और अवैध कब्जे हटाए जाते हैं। यदि इसके बाद भी कहीं अवैध कब्जे किए जाते हैैं और इसकी शिकायत मिलेगी तो अवैध कब्जे हटाकर कब्जाधारकों के खिलाफ कार्रवाई की जाएगी।
पूनम निगम
अपर जिलाधिकारी, महोबा
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तालाबों पर कब्जा, घट रही जल भंडारण क्षमता
-सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बाद भी नहीं हट रहे तालाबों से अवैध कब्जे
अमर उजाला ब्यूरो
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