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गुरु गोरखनाथ की परिक्रमा में जुटी श्रद्घालुओं की जुटी भीड़
Updated Tue, 29 May 2018 11:28 PM IST
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गुरु गोरखनाथ की परिक्रमा में जुटी श्रद्धालुओं की जुटी भीड़
06 परिचय- परिक्रमा करते श्रद्धालु
अमर उजाला ब्यूरो
महोबा। गुरु गोरखनाथ परिक्रमा समिति के तत्वावधान में ऐतिहासिक गोरखागिरि की परिक्रमा सुबह 6 बजे शिवतांडव मंदिर से श्रृद्धा, भक्ति व रामधुन के साथ हुई। परिक्रमा यात्रा पठवा के बाल हनुमान मंदिर, राम जानकी मंदिर, कबीर आश्रम, बाबा फीरोजशाह की दरगाह, काली माता व छोटी चंद्रिका मंदिर से पुलिस लाइन होते हुए नगौरिया मंदिर व काल भैरव मंदिर से शिवतांडव मंदिर में आकर समाप्त हुई। इसके बाद शिवतांडव प्रांगण में हवन पूजन के बाद सत्संग व संगोष्ठी आयोजित की गई।
गोष्ठी में डॉ. एलसी अनुरागी ने एतिहासिक गोरखागिरि का महत्व बताते हुए कहा कि 14 वर्ष के वनवास काल में भगवान राम, सीता व लक्ष्मण इस पर्वत पर रहे हैं। उस समय की बनी सीता रसोई व रामकुंड आज भी इसका प्रमाण दे रहे हैं। इसके बाद सत्संग में कंचन तिवारी व ग्राम पठा की मन्नू अनुरागी ने भगवान शंकर के भजन सुनाएं। बाद में गोरखागिरि के विकास के लिए संगोष्ठी हुई। एआरएम रमाशंकर ने कहा कि परिक्रमा परिधि में सघन पौधरोपण किया जाना चाहिए। दूधिया कुईया के पास बनी तलैया की खुदाई, गहराई कराए जाए व घाट बनवाए जाए। जिला प्रशासन की सहायता के लिए जोर दिया गया।
पूर्व प्रधानाचार्य शिवकुमार गोस्वामी नेे कहा कि गोरखगिरि पर्वत का नाम गुरु गोरखनाथ के इस पर्वत पर तप करने कारण हुआ इसलिए शिवतांडव मंदिर में गुरु गोरखनाथ प्रवेश द्वार बनाए जाने की जिला प्रशासन से मांग की। इस मौके पर शरद तिवारी दाऊ, प्रमोद सक्सेना, एमपी भदौरिया, विजय तिवारी आदि मौजूद रहें।
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06 परिचय- परिक्रमा करते श्रद्धालु
अमर उजाला ब्यूरो
महोबा। गुरु गोरखनाथ परिक्रमा समिति के तत्वावधान में ऐतिहासिक गोरखागिरि की परिक्रमा सुबह 6 बजे शिवतांडव मंदिर से श्रृद्धा, भक्ति व रामधुन के साथ हुई। परिक्रमा यात्रा पठवा के बाल हनुमान मंदिर, राम जानकी मंदिर, कबीर आश्रम, बाबा फीरोजशाह की दरगाह, काली माता व छोटी चंद्रिका मंदिर से पुलिस लाइन होते हुए नगौरिया मंदिर व काल भैरव मंदिर से शिवतांडव मंदिर में आकर समाप्त हुई। इसके बाद शिवतांडव प्रांगण में हवन पूजन के बाद सत्संग व संगोष्ठी आयोजित की गई।
गोष्ठी में डॉ. एलसी अनुरागी ने एतिहासिक गोरखागिरि का महत्व बताते हुए कहा कि 14 वर्ष के वनवास काल में भगवान राम, सीता व लक्ष्मण इस पर्वत पर रहे हैं। उस समय की बनी सीता रसोई व रामकुंड आज भी इसका प्रमाण दे रहे हैं। इसके बाद सत्संग में कंचन तिवारी व ग्राम पठा की मन्नू अनुरागी ने भगवान शंकर के भजन सुनाएं। बाद में गोरखागिरि के विकास के लिए संगोष्ठी हुई। एआरएम रमाशंकर ने कहा कि परिक्रमा परिधि में सघन पौधरोपण किया जाना चाहिए। दूधिया कुईया के पास बनी तलैया की खुदाई, गहराई कराए जाए व घाट बनवाए जाए। जिला प्रशासन की सहायता के लिए जोर दिया गया।
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पूर्व प्रधानाचार्य शिवकुमार गोस्वामी नेे कहा कि गोरखगिरि पर्वत का नाम गुरु गोरखनाथ के इस पर्वत पर तप करने कारण हुआ इसलिए शिवतांडव मंदिर में गुरु गोरखनाथ प्रवेश द्वार बनाए जाने की जिला प्रशासन से मांग की। इस मौके पर शरद तिवारी दाऊ, प्रमोद सक्सेना, एमपी भदौरिया, विजय तिवारी आदि मौजूद रहें।
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