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Maharajganj News: कुंभ में बिछड़ी महिला, दूसरों की मदद से घर पहुंची
Thu, 30 Jan 2025 08:50 PM IST
गोरखपुर ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, महाराजगंज
संवाद न्यूज एजेंसी, महाराजगंज
Updated Thu, 30 Jan 2025 08:50 PM IST
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सिसवा बाजार। कस्बा सुभाष नगर वार्ड की कमलावती कुंभ में पति से बिछड़ने के बाद कुशीनगर के श्रद्धालुओं की मदद से बुधवार की शाम घर पहुंचीं। इसके बाद परिजनों ने ली राहत की सांस ली।
सुभाष नगर वार्ड निवासी श्रीनिवास कुशवाहा और उनकी पत्नी कमलावती देवी 27 जनवरी को कुंभ स्नान के लिए प्रयागराज गए थे। मौनी अमावस्या को प्रात: स्नान के बाद गंगा मईया की पूजा करने के बाद वापसी में कमलावती देवी रास्ता भटक गईं। पति-पत्नी एक दूसरे को ढूंढ़ते रहे पर कमलावती नहीं मिलीं। इसके बाद श्रीनिवास ने घर वालों को जानकारी दी। इससे घर में कोहराम मच गया।
उसके बाद ढूंढने का प्रयास होने लगा। बुधवार की शाम जब घर पहुंचीं तब परिजनों ने राहत की सांस ली। कमलावती ने बताया कि जब वो पति से बिछड़ी तो मेले में ढूंढने लगीं, लेकिन ना तो सेक्टर का नाम याद था और ना ही कोई रास्ता समझ में आ रहा था। दिन भर भूखे-प्यासे पति को खोजती रहीं।
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शाम में जहां गुमशुदा के लिए माइक से घोषणा की जा रही थीं उनके पास गईं और अपनी आपबीती सुनाई पर माइक में खराबी होने के कारण घोषणा नहीं हो पाई, पर वहां कुशीनगर के कुछ लोग खड़े थे, जिन्होंने कमलावती की दास्तान सुनकर उन्हें ढांढस बंधाया और अपने साथ लेकर गोरखपुर आए और वहां सिसवा का टिकट कटाकर ट्रेन में बैठा दिया। इसके बाद वह अपने घर सकुशल पहुंच सकीं।
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सुभाष नगर वार्ड निवासी श्रीनिवास कुशवाहा और उनकी पत्नी कमलावती देवी 27 जनवरी को कुंभ स्नान के लिए प्रयागराज गए थे। मौनी अमावस्या को प्रात: स्नान के बाद गंगा मईया की पूजा करने के बाद वापसी में कमलावती देवी रास्ता भटक गईं। पति-पत्नी एक दूसरे को ढूंढ़ते रहे पर कमलावती नहीं मिलीं। इसके बाद श्रीनिवास ने घर वालों को जानकारी दी। इससे घर में कोहराम मच गया।
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उसके बाद ढूंढने का प्रयास होने लगा। बुधवार की शाम जब घर पहुंचीं तब परिजनों ने राहत की सांस ली। कमलावती ने बताया कि जब वो पति से बिछड़ी तो मेले में ढूंढने लगीं, लेकिन ना तो सेक्टर का नाम याद था और ना ही कोई रास्ता समझ में आ रहा था। दिन भर भूखे-प्यासे पति को खोजती रहीं।
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शाम में जहां गुमशुदा के लिए माइक से घोषणा की जा रही थीं उनके पास गईं और अपनी आपबीती सुनाई पर माइक में खराबी होने के कारण घोषणा नहीं हो पाई, पर वहां कुशीनगर के कुछ लोग खड़े थे, जिन्होंने कमलावती की दास्तान सुनकर उन्हें ढांढस बंधाया और अपने साथ लेकर गोरखपुर आए और वहां सिसवा का टिकट कटाकर ट्रेन में बैठा दिया। इसके बाद वह अपने घर सकुशल पहुंच सकीं।