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Maharajganj News: पराग डेयरी के बंद होने से आधी समितियां प्रभावित
Fri, 23 Jun 2023 12:18 AM IST
गोरखपुर ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, महाराजगंज
संवाद न्यूज एजेंसी, महाराजगंज
Updated Fri, 23 Jun 2023 12:18 AM IST
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पुरैना में बना दुग्ध अवशीतन केंद्र।संवाद
फोटो
32 समितियां प्रतिदिन उपलब्ध कराती थीं दूध, 300 लीटर दूध का आवक होगा प्रभावित
संवाद न्यूज एजेंसी
महराजगंज। गोरखपुर में पराग डेयरी बंद होने का असर जिले की करीब आधी समितियों पर पड़ा है। 32 समितियों की ओर से दुग्ध अवशीतन केंद्र को प्रतिदिन दूध उपलब्ध कराया जाता रहा है। डेयरी बंद होने पर सिर्फ 18 समितियों का दूध लिया जा रहा है। इससे न सिर्फ 14 समितियां प्रभावित हुई हैं, बल्कि केंद्र की उत्पादकता भी कम हो गई है।
वर्ष 1996 मेें पुरैना में दुग्ध उत्पादक सहकारी संघ की स्थापना करते हुए 200 से अधिक दुग्ध समितियों को सक्रिय किया गया, उस दौरान उत्पादन भी बेहतर था। समय बीतने के साथ जहां घाटे के कारण समितियां बंद होती गईं, वहीं उनके सुधार के लिए पहल नहीं हुई। एक जनवरी 2016 को विभाग को गोरखपुर में मर्ज कर दिया गया।
पुरैना में खुले संघ को दुग्ध अवशीतन केंद्र के रूप में तब्दील कर दिया गया। तब से अब तक घुघली, परतावल, सदर, मिठौरा व नौतनवां ब्लॉकों में सक्रिय 32 समितियों से 700 से 800 लीटर दूध प्राप्त करते हुए उसे यहां ठंडा किया जाता था व गोरखपुर भेजा जाता था।
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अब गोरखपुर में डेयरी को बंद कर दिया गया तो मानकों के तहत प्राप्त होने वाले दूध को ही गोरखपुर भेजने के निर्देश दिए गए हैं। ऐसे में 14 समितियों का दूध अब नहीं लिया जा रहा है। दूध न लिए जाने से करीब 300 लीटर की आवक प्रभावित हुई है। इससे दूध उपलब्ध कराने वाली समितियों व उससे जुड़े लोगों की मुश्किल बढ़ गई है।
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क्या है दूध का मानक
फूड सेफ्टी एंड स्टेंडर्ड अथॉरिटी ऑफ इंडिया (एफएसएसएआई) ने दूध के जो मानक तय किए हैं, उसके तहत उसमें 4.5 प्रतिशत वसा व 8.5 प्रतिशत ठोस पदार्थ होना जरूरी है। इससे कम मानक के दूध का बेचने की अनुमति नहीं है। इससे कम मानक के दूध का प्रयोग पनीर, खोआ व अन्य सामग्रियों को बनाने में किया जाता है।
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समितियों का पांच लाख रुपये बाकी
दुग्ध अवशीतन केंद्र को दूध उपलब्ध कराने वाली समितियों से जुड़े लोगों की मुश्किल बढ़ गई हैं। दूध का उत्पादन करने वाली पुरानी समितियों का करीब पांच लाख रुपये बाकी है। उनका भुगतान भी फंसा हुआ है। सदर की एक समिति से जुड़े चेहरी के पशुपालक राजाराम ने बताया कि पहले समिति को दूध देने से एकमुश्त धन मिल जाता था, अब फुटकर में बेचना पड़ेगा। नए ग्राहकों की तलाश करनी होगी।
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कोट
पराग डेयरी के बंद होने से जिले की 14 समितियां प्रभावित हुई हैं। शेष 18 समितियों के दूध को प्राप्त करते हुए उसे पहले की तरह ठंडा करते हुए गोरखपुर भेजा जा रहा है। मानकों के तहत प्राप्त होने वाले दूध को गोरखपुर से एकत्र कर अयोध्या भेजने का कार्य होता है।
-उमाशंकर शर्मा, स्थानीय प्रभारी दुग्ध अवशीतन केंद्र
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32 समितियां प्रतिदिन उपलब्ध कराती थीं दूध, 300 लीटर दूध का आवक होगा प्रभावित
संवाद न्यूज एजेंसी
महराजगंज। गोरखपुर में पराग डेयरी बंद होने का असर जिले की करीब आधी समितियों पर पड़ा है। 32 समितियों की ओर से दुग्ध अवशीतन केंद्र को प्रतिदिन दूध उपलब्ध कराया जाता रहा है। डेयरी बंद होने पर सिर्फ 18 समितियों का दूध लिया जा रहा है। इससे न सिर्फ 14 समितियां प्रभावित हुई हैं, बल्कि केंद्र की उत्पादकता भी कम हो गई है।
वर्ष 1996 मेें पुरैना में दुग्ध उत्पादक सहकारी संघ की स्थापना करते हुए 200 से अधिक दुग्ध समितियों को सक्रिय किया गया, उस दौरान उत्पादन भी बेहतर था। समय बीतने के साथ जहां घाटे के कारण समितियां बंद होती गईं, वहीं उनके सुधार के लिए पहल नहीं हुई। एक जनवरी 2016 को विभाग को गोरखपुर में मर्ज कर दिया गया।
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पुरैना में खुले संघ को दुग्ध अवशीतन केंद्र के रूप में तब्दील कर दिया गया। तब से अब तक घुघली, परतावल, सदर, मिठौरा व नौतनवां ब्लॉकों में सक्रिय 32 समितियों से 700 से 800 लीटर दूध प्राप्त करते हुए उसे यहां ठंडा किया जाता था व गोरखपुर भेजा जाता था।
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अब गोरखपुर में डेयरी को बंद कर दिया गया तो मानकों के तहत प्राप्त होने वाले दूध को ही गोरखपुर भेजने के निर्देश दिए गए हैं। ऐसे में 14 समितियों का दूध अब नहीं लिया जा रहा है। दूध न लिए जाने से करीब 300 लीटर की आवक प्रभावित हुई है। इससे दूध उपलब्ध कराने वाली समितियों व उससे जुड़े लोगों की मुश्किल बढ़ गई है।
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क्या है दूध का मानक
फूड सेफ्टी एंड स्टेंडर्ड अथॉरिटी ऑफ इंडिया (एफएसएसएआई) ने दूध के जो मानक तय किए हैं, उसके तहत उसमें 4.5 प्रतिशत वसा व 8.5 प्रतिशत ठोस पदार्थ होना जरूरी है। इससे कम मानक के दूध का बेचने की अनुमति नहीं है। इससे कम मानक के दूध का प्रयोग पनीर, खोआ व अन्य सामग्रियों को बनाने में किया जाता है।
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समितियों का पांच लाख रुपये बाकी
दुग्ध अवशीतन केंद्र को दूध उपलब्ध कराने वाली समितियों से जुड़े लोगों की मुश्किल बढ़ गई हैं। दूध का उत्पादन करने वाली पुरानी समितियों का करीब पांच लाख रुपये बाकी है। उनका भुगतान भी फंसा हुआ है। सदर की एक समिति से जुड़े चेहरी के पशुपालक राजाराम ने बताया कि पहले समिति को दूध देने से एकमुश्त धन मिल जाता था, अब फुटकर में बेचना पड़ेगा। नए ग्राहकों की तलाश करनी होगी।
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कोट
पराग डेयरी के बंद होने से जिले की 14 समितियां प्रभावित हुई हैं। शेष 18 समितियों के दूध को प्राप्त करते हुए उसे पहले की तरह ठंडा करते हुए गोरखपुर भेजा जा रहा है। मानकों के तहत प्राप्त होने वाले दूध को गोरखपुर से एकत्र कर अयोध्या भेजने का कार्य होता है।
-उमाशंकर शर्मा, स्थानीय प्रभारी दुग्ध अवशीतन केंद्र